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मौसम एवं जलवायु

मौसम क्या है

वायुमंडल के अल्पकालिक या क्षणिक दशाओं को मौसम (Weather) कहते है| यदि हम किसी विशेष दिन सप्ताह या माह के वायुमंडलीय दशाओं का किसी विशेष क्षेत्र या स्थान के संदर्भ में उल्लेख करते है तो यह मौसम को बताता है| इस तरह मौसम वायुमंडलीय दशा का अल्पकालिक एवं स्थानिक प्रतिरूप है जो घंटे, दिन, सप्ताह, महीने से निर्धारित होता है| मौसमी दशाओं में इसी कारण परिवर्तनशीलता पायी जाती है|

टेवार्था के अनुसार किसी स्थान का मौसम वहां की वायुमंडलीय दशाओं तापमान, वायुदाब, आर्द्रता, पवन एवं वृष्टि का अल्पकालिक योग है| सौर विकिरण, वायु का तापमान, वायुदाब, पवन, आर्द्रता एवं वर्षा, मेघच्छादन आदि मौसम की उत्पत्ति के लिए आवश्यक तत्व है|

जलवायु क्या है

किसी स्थान या प्रदेश के मौसम के दीर्घकालिक दशाओं के औसत का योग जलवायु (Climate) कहलाता है| किसी स्थान अथवा प्रदेश के दिन प्रतिदिन के मौसम के दीर्घकालिक औसत को वहां की जलवायु कहते है| अंतराष्ट्रीय मौसम संस्थान ने जलवायु के निर्धारण के लिए मौसम के विभिन्न तत्वों का औसत निकालने के लिए 31 वर्षों की अवधि को प्रमाणिक माना है|

ट्रेवार्था ने दिन प्रतिदिन के मौसम की दशाओं की विविधता के समन्वय को जलवायु कहा है| ग्रिफिथ टेलर के अनुसार जलवायु मौसम का समाकलन (Integration) है तो मौसम जलवायु का विभेदन (Differentiation है|

क्रिचफिल्ड ने जलवायु को औसत मौसम से कहीं अधिक व्यापक माना है| इसके अनुसार किसी प्रदेश कि जलवायु के निर्धारण के लिए की वायुमंडलीय दशाओं के लिए औसत, उनकी प्रवृतियों तथा सम्भावनाओं के अतिरिक्त उनकी आतिशयताओं का भी समन्वय किया जाना चाहिए|

मौसम एवं जलवायु को निर्धारित एवं प्रभावित करने वाले कारक

मौसम एवं जलवायु को विभिन्न कारक प्रभावित करते है, ये इस प्रकार है:

खगोलीय कारक: सूर्य एवं पृथ्वी की सापेक्षिक स्थिति में परिवर्तन, घुर्णन गति, परिक्रमण गति, सूर्य का उत्तरायण एवं दक्षिणायन|

क्षोभमंडलीय या वायुमंडलीय कारक: क्षोभमंडल की तापीय विशेषता, वायु प्रवाह, वायुमंडल की पारदर्शिता|

जल एवं स्थल का वितरण: महाद्वीपीय एवं महासागरों कि स्थिति एवं प्रकृति|

स्थलाकृतिक अथवा उच्चावच कारक: पर्वत, पठार, मैदान, घाटी, मरुस्थल|

उपरोक्त कारको के अंतर्क्रिया के कारण मौसमी एवं जलवायविक परिघटनाएं निर्धारित एवं प्रभावित होती है|

मौसम-जलवायु अंतर्संबंध

यदि मौसमी दशा का दीर्घकालिक औसत निकाला जाए तब भी जलवायु का निर्धारण किया जा सकता है| ऐसे में मौसम एवं जलवायु पुर्णतः अंतर्संबंधित है लेकिन जलवायु की औसत दशाओं में अधिक परिवर्तनशीलता नहीं पाई जाती जबकि मौसम एक परिवर्तनशील परिघटना है| जलवायु का सामान्यतः स्थिर दशा के रूप में अध्ययन किया जाता है लेकिन यदि जलवायु के औसत दशाओं में जैसे औसत तापमान, औसत वायुदाब, औसत वर्षा की मात्रा में परिवर्तन होता है तब इसे जलवायु परिवर्तन कहते है|

यदि जलवायु में परिवर्तन होता है तब इससे मौसमी परिवर्तन की स्थिति भी स्वीकार की जा सकती है| अर्थात मौसम में अत्यधिक परिवर्तन जलवायु परिवर्तन का संसूचक है लेकिन मौसम स्वयं में एक परिवर्तनशील दशा है ऐसे में जलवायु परिवर्तन के संबंध में इसकी परिवर्तनशीलता को समझना एक चुनौती है|

मौसम एक परिवर्तनशील तथ्य है लेकिन परिवर्तनशीलता का भी एक नियम और सीमा होती है, ऐसे में इन सीमाओं का टूटना और नियम का उलंघन यदि बार-बार घटित होती है तब यह संभावित जलवायु परिवर्तन का सूचक है| इन दशाओं में वायुमंडलीय परिसंचरण में भी परिवर्तनशीलता दिखाई देगी| इसके अध्ययन से भी जलवायु परिवर्तन की सम्भावना और सीमाओं को समझा जा सकता है| इस दिशा में वैज्ञानिक अनुसन्धान विशेष रूप से किया जा रहा है|

स्पष्ट है कि मौसम एवं जलवायु वायुमंडलीय दशा है| जहाँ मौसम अल्पकालिक एवं स्थानिक वायुमंडलीय दशा है वहीँ वायुमंडलीय दशा के दीर्घकालिकऔसत से जलवायु का निर्धारण होता है इसका स्वरूप स्थानिक एवं प्रादेशिक दोनों होता है| मौसम एवं जलवायु को विभिन्न खगोलीय, क्षोभमंडलीय या वायुमंडलीय कारक, जल एवं स्थल का वितरण, स्थलाकृतिक अथवा उच्चावच कारक, तत्व प्रभावित करते है| मौसम एवं जलवायु पुर्णतः अंतर्संबंधित है लेकिन जलवायु की औसत दशाओं में अधिक परिवर्तनशीलता नहीं पाई जाती जबकि मौसम एक परिवर्तनशील परिघटना है|

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