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जनसंख्या का सिद्धांत

जनसंख्या संबंधी पक्षों को विभिन्न जनसंख्या के सिद्धांत में समझने का प्रयास किया गया. इनमें जनसंख्या का आर्थिक सामाजिक विश्लेषण करते हुए जनसंख्या संबंधी चुनौतियों को कम करने और समाप्त करने की दिशा में सुझाव दिए गए. इनमें प्रारंभिक सिद्धांतों में माल्थस एवं मार्क्स का सिद्धांत तथा आधुनिक सिद्धांतों में जनसंख्या संक्रमण मॉडल तथा अनुकूलतम जनसंख्या का सिद्धांत प्रमुख है.

वर्तमान में जनसंख्या का सामाजिक आर्थिक विश्लेषण अनुकूलतम जनसंख्या के अवधारणा पर की जा रही है और जनसंख्या को एक संसाधन के रूप में और सामाजिक पूंजी के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास किया जा रहा है.

माल्थस का सिद्धांत (Malthusian Theory of Population)

माल्थस ने जनसंख्या का सामाजिक कारक के रूप में अध्ययन किया और जनसंख्या की प्रवृतियों के आधार पर संसाधन एवं जनसंख्या के अंतर्संबंधो के आधार पर अपने सिद्धांत का प्रतिपादन जनसंख्या के सिद्धांत नामक पुस्तक में किया.

इसमें उन्होंने माना की संसाधनों की उपलब्धता जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करती है. उनके अनुसार यदि किसी प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित न किया जाये तो तब जनसंख्या में वृद्धि ज्यामितीय अनुपात में होता है जबकि संसाधन में वृद्धि अंकगणितीय अनुपात में होता है. ऐसे में एक समय के बाद संसाधन का आभाव होने लगता है. इस तरह उन्होंने तीन अवस्थाओं को बताया.

पहली अवस्था में उन्होंने माना की जनसंख्या के मुकाबले संसाधन अधिक होती है, दुसरे में उन्होंने माना की दोनों बराबर होते है और तीसरी अवस्था में माना की संसाधन के मुकाबले जनसंख्या अधिक होती है. उनके अनुसार तीसरी अवस्था में जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर चुनौती बन जाती है और संसाधन की भारी कमी हो जाती है. ऐसे में युद्ध, अकाल, भुखमरी आदि के कारण जनसंख्या पुनः कम हो जाती है और पहली अवस्था में वापस आ जाती है.

इस सिद्धांत में अपनाये गए आधार और उपायों के संदर्भ में इसकी काफी आलोचना की जाती है लेकिन भले ही यह सिद्धांत अपने मौलिक रूप में न लागू होता हो लेकिन जनसंख्या वृद्धि संसाधन पर दबाब डालती है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता. इस आधार पर इस सिद्धांत आज भी प्रासंगिक बना हुआ है.

माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत और नवमाल्थस वाद को विस्तार से पढने के लिए यहां क्लिक करें.

मार्क्स का सिद्धांत (Marx Theory of Population)

मार्क्स ने साम्यवादी चिंतन पर आधारित जनसंख्या से संबंधित चिंतन को विचारधारा के रूप में प्रस्तुत किया. इसे मार्क्स का जनसख्या सिद्धांत कहा जाता है. इसके अनुसार जनसख्या पूंजीवाद के अंतर्गत समस्या का रूप लेती है. उन्होंने माल्थस के सिद्धांत के इस बात को की ” संसाधन की उपलब्धता जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करती है” को नकार दिया.

इनके अनुसार संसाधन की उपलब्धता और बेहतर जीवन स्तर जनसंख्या को हतोत्साहित करता है क्योंकि व्यक्ति अधिक उच्च जीवन स्तर को बनाये रखना चाहता है. और चूँकि श्रमिक वर्ग के पास संसाधन का आभाव होता है अतः श्रम संचय के लिए वह अधिक संतान की ओर आकर्षित होता है जो जनसंख्या वृद्धि को बढाती है.

अतः उनके अनुसार अगर साम्यवाद की स्थापना हो जाए तो जनसंख्या वृद्धि स्वतः नियंत्रित हो जाएगी. इन्होने भी श्रम की मांग और श्रम की आपूर्ति पर आधारित तीन अवस्थाओं को बताया. इसके बारे में विस्तार से पढने के लिए क्लिक करें.

मार्क्स के सिद्धांत का सकारात्मक पक्ष इनकी जीवन स्तर और संसाधन संबंधी विचारधारा है जिसमें यह माना गया की उच्च जीवन स्तर जनसख्या वृद्धि को हतोत्साहित करती है. यह वर्तमान में भी स्वीकृत है लेकिन इन समस्याओं का समाधान केवल साम्यवाद में ही संभव है ऐसा नहीं माना जा सकता. इन्हीं आधारों पर इस सिद्धांत की आलोचना भी की जाती है.

जनसंख्या संक्रमण मॉडल (Population Transition Model)

यह जनसख्या के संदर्भ में दिया गया सर्वप्रमुख सिद्धांत है. इसमें पापुलेशन संबंधी अवस्थाओं की व्याख्या की गई. इस सिद्धांत के अनुसार जनसंख्या संरचना किसी समाज की सामाजिक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है. और जैसे ही इसमें सुधार होता है तो वह पिछड़ी अवस्था से विकसित अवस्था में प्रवेश कर जाता है.

इसमें जनसख्या संक्रमण की चार अवस्थाओं को माना गया. पहली अवस्था में समाज आर्थिक सामाजिक रूप से पिछड़ा होता है और जहाँ जन्मदर और मृत्यु दर दोनों अधिक होती है. अतः जनसंख्या नियंत्रित होती है. जब समाज की आर्थिक सामाजिक स्थिति थोड़ी अच्छी होती है तो वह दूसरी अवस्था में प्रवेश कर जाती है. इसमें जन्म दर अभी भी अधिक होती है लेकिन मृत्यु दर घटने लगती है. ऐसे में पापुलेशन तेजी से बढ़ने लगती है. इसे जनसंख्या विस्फोट कहते है.

तीसरी अवस्था में आर्थिक सामाजिक स्थिति बेहतर हो जाती है और मृत्यु दर काफी कम हो जाती है लेकिन सामाजिक जागरूकता के कारण जन्म दर में भी कमी आती है. चौथी अवस्था में सामाजिक विकास की प्रक्रिया आर्थिक विकास के समान ही तीव्र और प्रभावशाली हो जाती है. इससे जन्म और मृत्यु दोनों पर प्रभावशाली नियंत्रण स्थापित होता है और जनसख्या में स्थायित्व आ जाता है.

इस तरह इस मॉडल में माना गया की यदि सामाजिक आर्थिक विकास की प्रक्रिया को तीव्र किया जाए तो तब जनसंख्या की आदर्श दशा को प्राप्त किया जा सकता है. लेकिन एक पांचवी अवस्था की कल्पना के साथ इस सिद्धांत की आलोचना भी की जाती है इसे तथा इस सिद्धांत को विस्तार से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें.

अनुकूलतम जनसंख्या का सिद्धांत (Optimum Theory of Population)

अनुकूलतम जनसंख्या के सिद्धांत के पहले दिए गए सिद्धांतों में सामान्यतः जनसंख्या वृद्धि को एक समस्या के रूप में देखा गया और जनसंख्या नियंत्रण के संदर्भ में सुझाव दिए गए. जबकि इसके विपरीत अनुकूलतम जनसंख्या के सिद्धांत में यह माना गया कि कोई भी जनसंख्या अनुकूलतम हो सकती है यदि संसाधनों का विकास उपलब्ध जनसंख्या की तुलना में पर्याप्त किया गया हो.

अर्थात अनुकूलतम जनसंख्या का सिद्धांत के अनुसार यदि जनसंख्या एवं संसाधन का अनुपात संतुलित है तब यह समस्या का रूप नहीं लेती.

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