Home BPSC प्रारंभिक परीक्षा भारतीय अर्थव्यवस्था SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) हिंदी में

SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) हिंदी में

यह एक सूचना प्रौद्योगिकी मंच है. इसे 1973 में 7 बैंकों ने मिलकर तैयार किया था. इसने 1977 से कार्य करना प्रारम्भ किया. इस व्यवस्था में पहले से उपस्थित टैलेक्स नामक व्यवस्था को प्रतिस्थापित किया. इस व्यवस्था में प्रयोग किया जाने वाला सर्वर बेल्जियम के ब्रुसेल्श में है.

क्‍या होता है SWIFT

स्‍विफ्ट की फुल फॉर्म होती है Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunications. यह एक तरह का संदेश भेजने और प्राप्‍त करने वाला नेटवर्क है जि‍सका इस्‍तेमाल दुनि‍याभर के बैंक और फाइनेंशि‍यल सेवाएं देने वाली अन्‍य संस्‍थाएं करती हैं। इनके माध्‍यम से पेमेंट बहुत तेज हो जाती है। हर बैंक को उसका एक SWIFT कोड़ मि‍लता है, जि‍ससे उसकी पहचान होती है।

उदाहरण से समझें

मान लें आपका खाता दि‍ल्‍ली में स्‍टेट बैंक में है और आपको तुरंत अमेरि‍का के कि‍सी बैंक में खाता रखने वाले अपने जानकार को कुछ रुपए भेजने हैं तो आप इसके लि‍ए अपने बैंक से आग्रह कर सकते हैं। आपका स्‍टेट बैंक पेमेंट ट्रांसफर स्‍विफ्ट मैसेज उस अमेरि‍की बैंक को भेज देगा, जिसमें आपके जानकार का एकाउंट है। उस बैंक को आने वाले पैसों के बारे में जैसी ही स्‍विफ्ट संदेश मि‍ल जाएगा वह आपके जानकार के एकाउंट में रुपए क्रेडि‍ट कर देगा।


इस पूरी व्यवस्था से विश्व के 200 से ज्यादा देश एवं क्षेत्र के 11000 से ज्यादा बैंक और वित्तीय संस्थान जुड़े हैं इससे जुड़े हर एक बैंक की प्रत्येक शाखा का एक विशिष्ट स्विफ्ट कोड होता है, जो की 8 से 11 डिजिट का एक अल्फान्यूमैरिक कोड है. यह कोड उस शाखा की विशिष्ट पहचान बन जाती है.

Swift Platform दो बैंक के बीच वित्तीय संदेश के आदान-प्रदान की एक व्यवस्था है. इसके माध्यम से किसी बैंक की एक शाखा किसी अन्य देश में कार्यरत बैंक के किसी शाखा को निधि अंतरण के उद्देश्य से निवेदन भेजती है. यानी की स्विफ्ट का प्रयोग एक खाते से किसी अन्य खाते में फण्ड ट्रांसफर के उद्देश्य से होता है.

पीएनबी एवं नीरव मोदी वाले घटना में भी स्विफ्ट का प्रयोग हुआ था. इस घटना में अन्य देशों में कार्यरत बैंको से नीरव मोदी की कंपनी को ऋण उपलब्ध कराने के लिए पीएनबी के कुछ अधिकारियों ने अनाधिकृत रूप से इस व्यवस्था का प्रयोग किया. एवं इसी के माध्यम से पीएनबी को उत्तरदाई बनाकर लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी किया. इस प्रक्रिया में कंपनी को सेबी से अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है.

पीएनबी एवं नीरव मोदी वाले घटना में SWIFT का किया गया दुरुपयोग

जब भी किसी बैंक की तरफ से LoU जारी किया जाता है. इसके बाद क्रेडिट ट्रांसफर की जानकारी व‍िदेश में स्थ‍ित बैंक को दी जाती है. यह जानकारी SWIFT (Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication) व्यवस्था के जरिये दी जाती है. यह एक अहम जानकारी होती है, जिसके जरिये बैंक अपनी सहमति और गारंटी देता है.

स्व‍िफ्ट की जानकारी देने के लिए  बैंक अध‍िकारी को लॉग इन करना पड़ता है और इसमें गोपनीय जानकारी दर्ज करनी पड़ती है. इसमें अकाउंट नंबर और SWIFT कोड शामिल होता है. सामान्य तौर पर इसमें तीन लेयर होते हैं. कोर बैंक‍िंग सिस्टम (CBS) में एक ‘मेकर (कोड तैयार करने वाला), चेकर (जांच करने वाला) और वेरीफायर (जानकारी पुख्ता करने वाला) होता है, जिनसे गुजरने के बाद ही यह जारी होता है.

दरअसल, ‘स्विफ्ट’ से जुड़े मैसेज पीएनबी के पिनैकल सॉफ्टवेयर सिस्टम में तत्काल ट्रैक नहीं होते हैं क्योंकि ये बैंक के CBS में एंट्री किए बिना जारी किए जाते हैं. इसी का फायदा पीएनबी के दो कर्मचारियों ने उठाया और करोड़ों का लेन-देन किया.

CBS क्या ?

कोर बैंक‍िंग सिस्टम अथवा सीबीएस वह सिस्टम होता है, जिससे बैंक की सभी शाखाएं जुड़ी होती हैं. सीबीएस ही है, जिसकी वजह से आप बैंक की किसी भी ब्रांच से अपना अकाउंट ऑपरेट कर पाते हैं और पैसे भेज पाते हैं. इस व्यवस्था के आने के बाद आप एक ब्रांच के नहीं, बल्क‍ि सीधे बैंक के ग्राहक बन जाते हैं. यहां पर बैंक‍िंग सिस्टम में होने वाले हर ट्रांजैक्शन को रियल टाइम पर अपडेट किया जाता है.

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