सिख धर्म

सिख शब्द का शाब्दिक अर्थ शिष्य होता है | इस धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक भी कबीर की तरह तीर्थयात्रा, जप-तप, पूजा-पाठ, जाती पाती आदि आडम्बरों के कट्टर विरोधी थे | 2011 के जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी का 1.7% सिख धर्म को मानते है |

16 वीं शताब्दी में भारत में उदित इस धर्म के संस्थापक सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक माने जाते हैं | इनका जन्म वर्तमान पाकिस्तान के ननकाना साहिब नामक स्थान पर हुआ था |

गुरु नानक ने हिंदू मुस्लिम एकता पर बल देते हुए ऐसे मत का प्रवर्तन किया जिसमें दोनों की समर्पण भावना झलकती है | नानक ने ईश्वर को निराकार, अबोधगम्य और अविनाशी बताया | उनके अनुसार एक ही ईश्वर सभी धर्मों में प्रकट हुआ है और एकमात्र कर्ता है | उन्होंने अहंकार के खतरों से बचने का उपदेश दिया | नानक ने निस्वार्थ भाव से सेवा पर अधिक बल दिया और साथ ही झूठ व पाखंड को मानवता का सबसे बड़ा शत्रु तथा धर्म के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बताया |

उन्होंने असमानता का घोर विरोध किया तथा सभी प्रकार के भेदभाव को सिरे से नकार दिया | वह मूर्ति पूजा के खिलाफ थे उन्होंने अंधविश्वासों का जमकर विरोध किया चाहे वह हिंदुओं के हो या मुसलमानों के | गुरु नानक ने जगह-जगह घूमकर अंधविश्वासों से बचने व उस सच्चे निरंकार के प्रति समर्पित होने का संदेश दिया | उन्होंने कविताओं और गीतों के माध्यम से भाईचारा सहिष्णुता प्रेम एवं भक्ति का प्रकाश फैलाया | उनके विचारों गीतों व कविताओं का संकलन किया गया जिसे पवित्र ‘आदि ग्रंथ’ का नाम दिया जाता है | 

गुरु नानक की शिक्षाएं 3 तरीके से व्यवहार में लाई जाती हैं| बंद चक्कों अर्थात दूसरों से बांटो और जरूरतमंदों की मदद करो; कीरत करो अर्थात धूर्तता और छल के बिना ईमानदारी के साथ आजीविका चलाना; नाम जपना अर्थात ईश्वर का नाम जपना तथा सदैव स्मरण करना ईश्वर का नाम लेना, ईश्वरीय आज्ञा का पालन करना, गुरुओं का आदर व अनुसरण करना, ईश्वर के गुणों का गुणगान करना और इश्वर पर संदेह न करना सिक्ख धर्म की मूलभूत शिक्षाएं हैं |

गुरु नानक के बाद नौ गुरु और हुए 10वें और आखरी गुरु गुरु गोविंद सिंह थे | इन्होने मुगलों के खिलाफ लड़ाका फौज तैयार की जिसे ‘खालसा’ के नाम से जाना जाता है |  सिख धर्म की शाखा खालसा में पांच वस्तुएं कंघा, कड़ा, केस, कच्छा तथा कृपाण के प्रयोग पर बल दिया गया है |

सिख धर्म आज भारत में माने जाने वाले प्रमुख धर्मों में से एक है जिसके अनुयायियों की संख्या काफी अधिक है | इस धर्म के प्रमुख सिद्धांत व शिक्षाएं इस प्रकार हैं:

  • एकेश्वरवाद में विश्वास 
  • आत्मा की अमरता में विश्वास 
  • मूर्ति पूजा का विरोध 
  • बाल विवाह का विरोध 
  • जाति प्रथा का विरोध

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