Friday, December 4, 2020

    संस्फीति (Reflation)

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    संस्फीति भी मुद्रास्फीति की ही एक दशा है. जब मांग में पुनः बढ़ोतरी के कारण वस्तु एवं सेवा का मूल्य फिर से उपर जाने लगता है तो इस स्थिति को संस्फीति कहते है.

    जब वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में निरंतर कमी उत्पन्न हो तब यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. अतः अर्थव्यवस्था में मांग को पुनः जन्म देने के उद्देश्य से एक देश की केन्द्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करती है एवं अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त तरलता सुनिश्चित करती है. मांग को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में कटौती करती है. इससे मांग बढती है एवं इसके फलस्वरूप मूल्य फिर बढ़ने लगता है. यह स्थिति संस्फीति कहलाती है.

    अपस्फीति या मुद्रा संकुचन, अवस्फीति एवं संस्फीति को सरल रूप से समझने के बाद आइये अब संवृद्धि रहित मुद्रास्फीति (stagflation) के बारे में समझने की कोशिश करते है.