Saturday, November 28, 2020

    अपस्फीति या मुद्रा संकुचन (Deflation)

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    यह मुद्रास्फीति का ही विपरीतार्थक है. जब वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में निरंतर बढ़ोतरी होती है तो इसे मुद्रास्फीति कहा जाता है, ठीक इसके विपरीत जब वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में निरंतर कमी की दशा को अपस्फीति या मुद्रा संकुचन या विस्फीति (Deflation)कहते है.

    मुद्रा संकुचन का कारण क्या होता है ?- जब कोई वस्तु एवं सेवा लगातार सस्ती होती जाती है, तो धीरे धीरे मुद्रा संकुचन में परिणत हो जाती है. किसी वस्तु का मूल्य सामान्यतः तब नीचे आता है जब समग्र आपूर्ति समग्र मांग को पार कर जाए. अथवा समग्र मांग आपूर्ति से नीचे चली जाए. मांग के नीचे आने के निम्नलिखित कारण हो सकते है-

    • अर्थव्यवस्था में तरलता का कम हो जाना
    • बेरोजगारी की दर में बढ़ोतरी
    • किसी देश की अर्थव्यवस्था का चरम पर पहुँच जाना
    • किसी देश की अधिकांश अर्थव्यवस्था का वृद्ध हो जाना

    मुद्रा संकुचन के प्रभाव क्या होते है? – मुद्रा संकुचन का किसी भी अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इससे आर्थिक संवृद्धि नीचे आती है. अर्थव्यवस्था में तरलता में कमी आती है और बेरोजगारी की दर बढती है. जिस तरह अनियंत्रित मुद्रास्फीति किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है उसी तरह मुद्रा संकुचन भी किसी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं है.