लोकसभा

लोकसभा की बैठक

प्रथम बैठक से लेकर सत्रावसान (लोकसभा के मामले में विघटन) के मध्य की समयावधि को संसद का सत्र कहते है. इस दौरान सदन प्रत्येक दिन आहूत (सभा में उपस्थित होने का आदेश) होता है.

संसद की एक सत्र में काफी बैठकें होती है और प्रत्येक दिन 2 सत्र होते हैं: सुबह की बैठक 11:00 बजे से 1:00 बजे तक और दोपहर के भोजन के बाद 2:00 से 6:00 तक.

संसद की बैठक को स्थगन या अनिश्चितकाल के लिए स्थगन या सत्रावसान या विघटन द्वारा समाप्त किया जा सकता है.

संसद सत्र का स्थगन (Adjournment of parliament session)

स्थगन द्वारा बैठक के कार्य को कुछ निश्चित समय के लिए निलंबित किया जाता है. यह निश्चित समय कुछ घंटे कुछ दिन अथवा कुछ सप्ताह हो सकता है.

अनिश्चित काल के लिए स्थगन (Indefinite adjournment)

इसका अभिप्राय है सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाना. अर्थात इसमें सदन को बिना यह बताएं स्थगित कर दिया जाता है कि अब उसे दोबारा किस दिन आहूत किया जाएगा.

अनिश्चित काल के लिए स्थगन करने की शक्ति लोकसभा के मामले में लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के मामले में राज्यसभा के सभापति की होती है.

अनिश्चित काल के लिए स्थगन की स्थिति में अध्यक्ष अथवा सभापति किसी भी समय सदन की बैठक पुनः आहूत कर सकता है. वह स्थगन दिन या समय से पहले भी सदन की बैठक आहूत कर सकता है या अनिश्चितकाल के लिए स्थगन के उपरांत किसी भी समय आहूत कर सकता है.

संसद का सत्रावसान (Prorogation of parliament)

पीठासीन अधिकारी अर्थात लोकसभा अध्यक्ष अथवा राज्य सभा का सभापति सदन के सत्र के पूर्ण होने पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करता है. इसके कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति सदन सत्रावसान की नोटिस जारी करता है. हालांकि राष्ट्रपति सत्र के दौरान भी किसी भी समय सत्रावसान कर सकता है

संसद सत्र का विघटन (Dissolution of parliament session)

राज्यसभा एक स्थायी सदन है ऐसे में उसका विघटन नहीं किया जा सकता इसीलिए सिर्फ लोकसभा का विघटन होता है. विघटन के कारण विद्यमान सभा का जीवन काल समाप्त हो जाता है और उसका पुनर्गठन नये चुनाव के बाद ही होता है.

लोकसभा का विघटन दो स्थिति में हो सकता है: स्वयं विघटन और राष्ट्रपति द्वारा विघटन.

स्वयं विघटन: 5 वर्ष के कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद लोकसभा स्वयं विघटित हो जाती है.

यह उल्लेखनीय है की किसी आपात काल की स्थिति में लोकसभा के कार्यकाल को एक निश्चित समय के लिए बढ़ा दिया जाता है, ऐसे में उस बढे हुए कार्यकाल के पूरा हो जाने की स्थिति में और पुनः न बढ़ाये जाने की स्थिति में लोकसभा स्वयं विघटित हो जाती है

राष्ट्रपति द्वारा विघटन: राष्ट्रपति लोकसभा के पञ्च वर्ष के कार्यकाल के पुरा होने से पूर्व भी विघटन कर सकता है.

लोकसभा विघटन और लंबित विधेयक

भारतीय संसदीय व्यवस्था में सत्तारूढ़ सरकार लोकसभा के प्रति प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होती है. लोकसभा में बहुमत खो देने पर सरकार गिर जाती है ठीक इसी तरह 5 साल का कार्यकाल पुरा हो जाने अथवा आपात काल के द्वारा बढ़ाये गए समय की समाप्ति के बाद लोकसभा का विघटन हो जाता है. ऐसे में वर्तमान सरकार के सभी कार्य जैसे विधेयक, प्रस्ताव, संकल्प, नोटिस, याचिका आदि स्वतः समाप्त हो जाते है.

संसदीय व्यवस्था और लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिहाज से यह प्रावधान किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है लेकिन यह व्यवस्था हर हाल में देश के सही नहीं भी हो सकती है इसीलिए हमारे संविधान में कुछ ऐसी भी व्यवस्था मिलती है जहाँ स्पष्ट रूप से वर्णित है की कुछ केशेज में विधेयक आदि चीजें समाप्त नहीं होगी.

लोकसभा के विघटन के बाद विधेयकों के संबंध में जो स्थितियां अपनाइ जाती है वह निम्नलिखित है:

  • वैसे लंबित विधेयक अथवा आश्वासन जिनकी जांच सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति द्वारा की जानी होती है, लोकसभा के विघटन पर समाप्त नहीं होते हैं.
  • विचाराधीन विधेयक जो लोकसभा में है. चाहे वे लोकसभा में रखे गए हो या फिर राज्यसभा द्वारा हस्तांतरित किए गए हो समाप्त हो जाते हैं.
  • लोकसभा में पारित किंतु राज्यसभा में विचाराधीन विधेयक समाप्त हो जाता है.
  • ऐसा विधेयक जो दोनों सदनों में असहमति के कारण पारित ना हुआ हो और राष्ट्रपति ने विघटन होने से पूर्व दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई हो समाप्त नहीं होता.
  • ऐसा विधेयक जो राज्यसभा में विचाराधीन हो लेकिन लोकसभा द्वारा पारित ना हो, समाप्त नहीं होता.
  • ऐसा विधेयक जो दोनों सदनों द्वारा पारित हो और राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए विचाराधीन हो समाप्त नहीं होता.
  • ऐसा विधेयक जो दोनों सदनों द्वारा पारित हो लेकिन राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटा दिया गया हो समाप्त नहीं होता है

स्पष्ट है की लोकसभा के विघटन के बाद सामान्यतः इसके सारे कार्य जैसे विधेयक, प्रस्ताव, संकल्प, नोटिस, याचिका आदि समाप्त हो जाते हैं लेकिन कुछ स्थिति में यह बने रहते है.

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