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लोकसभा बनाम राज्यसभा

लोकसभा और राज्यसभा की तुलना तीन दृष्टिकोण से किया जा सकता है. पहला, जहां राज्यसभा और लोकसभा समान हो, दूसरा, जहां राज्यसभा के मुकाबले लोकसभा को अधिक शक्ति प्राप्त है और तीसरा, जहां राज्यसभा को विशेष शक्तियां प्राप्त होती है.

राज्यसभा और लोकसभा समान हो

कुछ प्रमुख मामलों में राज्यसभा की शक्तियां एवं स्थिति लोकसभा के समान ही होती है. ऐसे स्थितियां निम्नलिखित हो सकती है.

  • संसद में साधारण विधेयको को लाना और उनको पारित किया जाना
  • संविधान संशोधन विधेयक को लाना एवं पारित किया जाना
  • वित्तीय विधेयक को लाना जिसमें भारत की संचित निधि से व्यय शामिल होता है.
  • राष्ट्रपति का निर्वाचन एवं महाभियोग
  • उपराष्ट्रपति का निर्वाचन एवं पद से हटाया जाना. यह उल्लेखनीय है की राज्यसभा उपराष्ट्रपति को हटाने की पहल करती है तथा विशेष बहुमत से संकल्प पारित करती है लेकिन इसके लोकसभा से सामान्य स्वीकृति मिलने के बाद ही उपराष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है.
  • राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के जज, सीईओ एवं लेखा महानियंत्रक को हटाने की सिफारिश करने के सम्बन्ध में भी राज्यसभा और लोकसभा की शक्तियाँ समान होती है.
  • राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश की स्वीकृति के संदर्भ में,
  • राष्ट्रपति द्वारा घोषित तीनों प्रकार के आपातकाल की स्वीकृति के संदर्भ में,
  • प्रधानमंत्री सहित मंत्री का चयन के संबंध में, यह उल्लेखनीय है की प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्री दोनों में से किसी एक सदन का सदस्य होना चाहिए. हालांकि वे केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं
  • संवैधानिक इकाइयों जैसे वित्त आयोग, यूपीएससी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आदि की रिपोर्ट पर विचार करने के संबंध में,
  • सुप्रीम कोर्ट एवं संघ लोक सेवा आयोग के न्याय क्षेत्र में विस्तार करने के संबंध में,

उपरोक्त मामलें में राज्यसभा एवं लोकसभा की शक्तियां एवं स्थिति समान होती है.

राज्यसभा के मुकाबले लोकसभा को अधिक शक्ति प्राप्त हो

कुछ मामलों में राज्यसभा के मुकाबले लोकसभा को अधिक शक्ति प्राप्त होती है. ऐसे मामलें निम्नलिखित हो सकती है.

  • धन विधेयक लोकसभा में लाया जा सकता है इसे राज्यसभा में नहीं लाया जा सकता.
  • राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती. उसे इस विधेयक को सिफारिश या बिना सिफारिश के 14 दिन के भीतर लोकसभा के लौटाना अनिवार्य होता है.
  • लोकसभा, राज्यसभा की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है. दोनों ही मामलों में इसे दोनों सदनों द्वारा स्वीकृत माना जाएगा.
  • कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसके बताने की अंतिम शक्ति लोकसभा अध्यक्ष के पास होती है.
  • दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है.
  • संयुक्त बैठक की स्थिति में लोकसभा की सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण जीत होती है. लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों की संख्या दोनों सदनों में विपक्ष से कम हो तो ऐसा नहीं भी हो सकता है.
  • राज्यसभा सिर्फ बजट पर चर्चा कर सकती है उसके अनुदान की मांगों पर मतदान नहीं करती.
  • राष्ट्रीय आपातकाल समाप्त करने का संकल्प लोकसभा द्वारा ही पारित किया जा सकता है.
  • राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित करने पर मंत्री परिषद को नहीं हटाया जा सकता क्योंकि मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व लोकसभा के प्रति होता है लेकिन राज्यसभा सरकार की नीतियों कार्यों पर चर्चा एवं आलोचना कर सकती है.

राज्यसभा को विशेष शक्तियां प्राप्त हो

संघीय चरित्र होने के कारन राज्यसभा को दो विशेष शक्ति दी गई है, जो लोकसभा के पास नहीं है. ये निम्नलिखित है.

  • यह संसद को राज्य सूची (अनुच्छेद 249) में से विधि बनाने हेतु अधिकृत कर सकती है.
  • यह संसद को केंद्र व राज्य दोनों के लिए नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन हेतु अधिकृत कर सकती है (अनुच्छेद 312)

स्पष्ट है की जहाँ एक तरफ कुछ मामलों में लोकसभा को कुछ विशेष अधिकार दिए गए है वहीँ दूसरी तरफ कुछ दुसरे मामले में राज्यसभा को अधिक शक्तियां दी गई है. इसी के साथ कुछ ऐसे भी मामलें है जहाँ राज्यसभा और लोकसभा को समान रूप से शक्तिशाली बनाया गया है.

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