Home BPSC सिविल सेवा नोट्स संसद का संयुक्त सत्र (लोकसभा और राज्यसभा )

संसद का संयुक्त सत्र (लोकसभा और राज्यसभा )

साधारण विधेयक और कुछ वित्त विधेयक के संबंध में राज्यसभा की सहमति न मिल पाने पर गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसी गतिरोध की स्थिति को दूर करने के संबध में संविधान में संयुक्त बैठक की व्यवस्था मिलती है.

संयुक्त बैठक के अंतर्गत राष्ट्रपति दोनों सदनों की एक साथ बैठक बुलाते है और संबंधित विधेयक पर वोटिंग करायी जाती है. क्योंकि लोकसभा सदस्यों की संख्या राज्यसभा सदस्यों की संख्या के मुकाबले अधिक होती है , विधेयक पारित हो जाती है. इस स्थिति को गतिरोध की समाप्ति का नाम दिया जाता है. संविधान के लागू होने के बाद से कई बार समय समय इस व्यवस्था का उपयोग किया जा चूका है.

संयुक्त बैठक बुलाये जाने की परिस्थितियाँ

संयुक्त बैठक निम्न परिस्थितियों में बुलाई जा सकती है. इन परिस्थितियों में विधेयक को निपटाने हेतु राष्ट्रपति दोनों सदनों की बैठक बुलाता है:

  1. यदि किसी विधेयक को राज्यसभा द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया हो
  2. यदि लोकसभा राज्यसभा द्वारा विधेयक में किए गए संशोधनों को मानने से असहमत हो,
  3. विधेयक राज्यसभा में 6 महीने से ज्यादा समय से लंबित हो

नोट: इस 6 माह की अवधि में उस समय को नहीं गिना जाता जब दुसरे सदन में चार क्रमिक दिनों हेतु सत्रावसान या स्थगन रहा हो.

संयुक्त बैठक साधारण विधेयक और कुछ प्रकार के वित्त विधेयक में ही बुलाई जा सकती है. धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के बारे में इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं मिलती है.

यदि कोई विधेयक लोकसभा के विघटित हो जाने के कारण छूट जाता है तो संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती है लेकिन संयुक्त बैठक तब बुलाई जा सकती है जब राष्ट्रपति इस प्रकार की बैठक की नोटिस देते हैं जो लोकसभा विघटन से पूर्व जारी कर दिया गया हो. राष्ट्रपति की इस नोटिस के बाद कोई भी सदन इस विधेयक पर कोई कार्यवाही नहीं कर सकता.

संयुक्त बैठक की अध्यक्षता

इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) करता है. इसके अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष यह दायित्व निभाता है. यदि उपाध्यक्ष भी अनुपस्थित हो तो राज्यसभा का उपसभापति यह दायित्व निभाता है.

यदि राज्यसभा का उपसभापति भी अनुपस्थित हो तो संयुक्त बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा इस बात का निर्णय किया जाता है की अध्यक्षता कौन करेगा. लेकिन राज्यसभा का सभापति संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता है

अन्य तथ्य

  • संयुक्त बैठक का कोरम (बैठक हेतु न्यूनतम सदस्य) दोनों सदनों की कुल सदस्य संख्या का एक बटे दसवां भाग होता है.
  • बैठक की कार्यवाही लोकसभा के प्रक्रिया और नियमों के अनुसार संचालित होती है, ना कि राज्यसभा के नियमों के अनुसार.
  • सामान्यतः लोकसभा के सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण संयुक्त बैठक में लोकसभा की शक्ति ज्यादा होती है

संयुक्त बैठक की व्यवस्था में कोई भी संशोधन केवल दो परिस्थितियों के अलावा नहीं किया जा सकता

  1. वे संशोधन जिनके बारे में दोनों सदन अंतिम निर्णय न ले पाएं हों,
  2. वे संशोधन जो इस विधेयक के पारित होने में विलंब कारणों से अनिवार्य हो गए हो.

अब तक बुलाया गया जॉइंट मीटिंग

1950 से दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को को तीन बार बुलाया गया है और इसके द्वारा निम्न 3 विधेयक पारित हुए

  • दहेज प्रतिषेध विधेयक 1960
  • बैंक सेवा आयोग विधेयक 1977
  • आतंकवाद निवारण विधेयक 2000

स्पष्ट है की संयुक्त बैठक की व्यवस्था भारतीय संविधान में अपनाई गई आसाधारण व्यवस्था है, जिससे विधेयक को लेकर गतिरोध की स्थिति समाप्त की जा सकती है. लेकिन इसकी एक मुख्य सीमा यह कही जा सकती है की यह राज्यसभा की भूमिका को कमजोर करता है.

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