बुधवार, फ़रवरी 28, 2024
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बिहार में कैसे मनाया जाता है भाई दूज,जानिए क्यों खिलाती हैं बहनें बजरी

आज पुरे देश में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है. इस दिन भाई अपने बहनों के घर जातें हैं. बहन उनका स्वागत करती हैं, तिलक लगाती हैं और भोजन कराती हैं, साथ ही भाई के सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं. बहन अपने भाई की आरती उतार कर उनकी लंबी उम्र की कामना भी करती है. बिहार में भी इसकी धूम देखने को मिली भाई बहनों का पवित्र त्योहार भैया दूज उत्साह पूर्वक मनाया गया. भाई -बहन के प्यार का प्रतीक होता है ये त्योहार.आज के दिन यमराज की भी पूजा की जाती है. कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज पहली बार अपनी बहन यमुना के घर गए थे, तब से ही इस तिथि को यम द्वितीया या भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. यह दिवाली के दूसरे दिन मनाया जाता है.

बिहार में बहनें कैसे करती हैं भाई दूज की पूजा 

परंपरा के अनुसार पूजा स्थल पर आसपास की बहनें व महिलाएं पूजा की थाल लेकर जुट जाती हैं. साथ ही गाय के गोबर से चकोर चंदोबा बनाया जाता है. इसके मध्य में पूजन की सभी सामग्री रखी जाती है. पूजन के दौरान ईंट, समाठ, बजरी, नारियल, रूई, रेंगनी का कांटा, फल-फूल, नैवेद्य आदि चढ़ाकर पूजा-अर्चना कर इस पूजा में बहनें समूह बनाकर एकजुट होकर लकड़ी के समाठ से गोधन कूटकर अपने भाईयों के दुश्मन को नाश करने का संकल्प लेने के साथ परंपरागत तरीके से पूजा करती हैं. इस दौरान बहनें उपवास रखकर पूजा करती हैं. पूजन के उपरांत बहनें अपने भाईयों को बजरी व नारियल का प्रसाद खिलाती हैं. साथ ही भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र भी बांधती है.

क्यों खिलाती हैं बहनें भाई को बजरी
बिहार में भाई दूज पर बहनें पारंपरा के अनुसार बजरी अपने भाई को खिलाती हैं. लोक कथाओं के अनुसार बजरी खिलाने से भाई को ताकत मिलती है. जिससे उसका शरीर मजबूत होता है. साथ ही एक और परंपरा को बिहार में भाई दूज पर निभाया जाता है.

बहनें अपने भाईयों को खूब कोसती हैं इस दिन 
परंपरा के अनुसार बहनें अपने भाईयों को खूब कोसती हैं फिर अपनी जीभ पर कांटा चुभाती हैं और अपनी गलती के लिए यम भगवान से माफी मांगती हैं. इस परंपरा के पीछे पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि भाईयों को कोसने से उन्हें मृत्यु का भय नहीं रहता है. आपको बता दें कि, जब बहनें अपने भाईयों को कोसती हैं तो उसके बाद वह भगवान यम से प्रार्थना करती हैं कि उनके भाईयों को किसी प्रकार का भय ना रहें.

तिलक लगाने का मंत्र
केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम।
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु।।

कान्ति लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलं बलम्।
ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्यहम्।।

भाई दूज पूजा मंत्र

गंगा पूजे यमुना को,
यमी पूजे यमराज को,
सुभद्रा पूजा कृष्ण को,
गंगा यमुना नीर बहे,
मेरे भाई की आयु बढ़े

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