रविवार, फ़रवरी 25, 2024
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बिहार में डीजल पर मिल रही भारी सब्सिडी, फिर भी सरकार से क्यों नाराज हैं किसान?

दक्षिण बिहार के धनरुआ में एक किसान ने कहा कि धान की बुवाई और रोपाई के समय अच्छी बारिश नहीं हुई. वहीं, 20 जुलाई के बाद जरूरत से ज्यादा बारिश हो गई. इससे फसलों को नुकसान हुआ. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल डीजल सब्सिडी नहीं हो सकता.

बिहार के कई इलाकों में इस बार अच्छी बारिश नहीं हुई. ऐसे में कई जिलों में सिंचाई के लिए पानी का संकट बना हुआ है. इसी बीच बिहार सरकार ने किसानों के संकट को देखते हुए 100 करोड़ का डीजल अनुदान देने की घोषणा कर दी है. कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने खुद इसकी पुष्टी की है. उन्होंने कहा है कि इस योजना के तहत किसानों को सिंचाई सहित कृषि कार्यों के लिए डीजल खरीदने पर 700 रुपये प्रति एकड़ जमीन के हिसाब से सब्सिडी दी जाएगी. हालांकि, बिहार सरकार के इसक कदम के बावजूद भी किसान खुश नहीं हैं. वे इसे मात्र एक दिखावा कह रहे हैं.

न्यूज वेबसाइट डाउन टू अर्थ के मुताबिक, बिहार सरकार ने 28 जुलाई को अगले तीन महीनों के लिए कृषि उपयोग के लिए डीजल सब्सिडी प्रदान करने का फैसला किया था, क्योंकि प्रदेश के कई क्षेत्रों में जून से मध्य जुलाई अच्छी बारिश नहीं हुई थी. विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि नया सब्सिडी कोष उसी उद्देश्य के लिए जुलाई में सरकार द्वारा पहले ही आवंटित किए गए 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त होगा. अधिकारी ने दावा किया कि यह राशि सूखे के वर्ष के दौरान कृषि उपयोग के लिए डीजल सब्सिडी के लिए राज्य द्वारा आवंटित अब तक की सबसे बड़ी राशि होगी.

धान की बुवाई और रोपाई के समय अच्छी बारिश नहीं हुई

दक्षिण बिहार के धनरुआ में मसौरी के एक बड़े किसान उमेश ने कहा कि धान की बुवाई और रोपाई के समय अच्छी बारिश नहीं हुई. वहीं, 20 जुलाई के बाद जरूरत से ज्यादा बारिश हो गई. इससे फसलों को नुकसान हुआ. उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल डीजल सब्सिडी नहीं हो सकता. सरकार को किसानों के लिए कुछ करना चाहिए. अगर वे दावा कर रहे हैं कि इस तरह की सब्सिडी इस संकट को कम करेगी जिसने कृषि राज्य के लगभग सभी जिलों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है, तो यह केवल नीति निर्माताओं, योजनाकारों के रूप में उनकी अपर्याप्तता को दर्शाता है.

बिहार के कई अन्य हिस्सों की जमीनी हकीकत है

वहीं, दक्षिण बिहार के गया जिले के एक अन्य किसान रामस्वरूप ने कहा कि उसके परिवार को जून से अब तक तीन एकड़ से अधिक धान की फसल का नुकसान हुआ है. जिले के मोहनपुर प्रखंड के एक किसान परशुराम मांझी ने जुलाई में इस संबंध में निर्णय लिए जाने के बाद पिछली बार गया में 40 प्रतिशत से अधिक किसानों को डीजल सब्सिडी नहीं मिली है. सब्सिडी की अधिकांश राशि बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा हड़प ली जाती है. मांझी ने कहा कि यह सिर्फ मोहनपुर में ही नहीं बल्कि बिहार के कई अन्य हिस्सों की जमीनी हकीकत है.

कृषि उपयोग के लिए (जुलाई में) डीजल सब्सिडी के लिए आवंटित 100 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि में से 96.3 करोड़ रुपये पहले ही बिहार के 38 जिलों के किसानों तक पहुंच चुके हैं. नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के राजगिराह गांव के एक बड़े किसान उमराव यादव ने कहा कि बिहार के बहुत कम किसानों के पास वैकल्पिक व्यवसाय है और अधिकांश ग्रामीण आबादी कृषि पर निर्भर हैं. ऐसे में डीजल सब्सिडी किसी भी तरह से समाधान नहीं हो सकती है.

यह कृषि संकट का समाधान नहीं हो सकता है

वहीं, राज्य के कृषि विभाग के उप निदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सब्सिडी से किसानों को फायदा होने वाला है. उन्होंने कहा कि विभाग संकट का जमीनी स्तर का सर्वेक्षण कर सकता है, लेकिन आगे कोई विवरण नहीं दिया. बता दें कि बिहार में लगभग 50 प्रतिशत किसान साझा खेती पर निर्भर हैं; वे जमींदार नहीं हैं. इस सब्सिडी से लाभान्वित होने वाले अधिकांश किसान वे होंगे जिनके पास जमीन का एक छोटा या बड़ा हिस्सा है. डीजल सब्सिडी एक वैध कदम है अगर इसे ठीक से वितरित किया जाता है लेकिन यह कृषि संकट का समाधान नहीं हो सकता है.

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