रविवार, फ़रवरी 25, 2024
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पहले प्रयास में ही भोजपुर की रिचा बनीं जज, मां बोलीं- बेटों से ज्यादा बेटी पर भरोसा था

बिहार में हुई 31वीं न्यायिक सेवा की परीक्षा के परिणाम में बेटियों का जलवा देखने को मिल रहा है. आरा के एक बैंक कर्मी की बेटी रिचा भारद्वाज ने पहले प्रयास में सफलता हासिल की है. रिचा को न्यायिक सेवा की परीक्षा में 36वां रैंक हासिल हुआ है. इसके बाद से रिचा के घर और रिश्तेदारों के बीच खुशी का माहौल है. हर कोई रिचा की सफलता की सराहना कर रहा है और घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

आरा से हुई प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा
रिचा मूल रूप से मोतिहारी की रहने वाली हैं, लेकिन इनका परिवार आरा शहर के मदनजी के हाता मुहल्ले में किराए के मकान में रहता है. रिचा के पिता आलोक कुमार पांडेय आरा स्थित मध्य बिहार ग्रामीण बैंक में काम करते हैं.रिचा की 5वीं तक की पढ़ाई आरा के जीन पॉल स्कूल से संपन्न हुई. इसके बाद 10th, 12th और एलएलबी की पढ़ाई वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान से पूरी हुई. फिर रिचा ने एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा से एलएलएम की डिग्री ली.

‘महिलाओं को न्याय दिलाना प्राथमिकता’
रिचा भारद्वाज ने न्यूज18 लोकल से बताया कि वे शुरू से न्यायिक सेवा में जाना चाहती थीं. इसलिए एलएलएम की पढ़ाई के बाद उन्होंने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी. बीपीएससी के द्वारा आयोजित बिहार न्यायिक सेवा की परीक्षा में उन्हें 36वां रैंक हासिल हुआ है. उन्हें पहले प्रयास में यह सफलता मिली है. रिचा ने बताया कि उनकी सफलता का श्रेय फेमिली और टीचर्स को जाता है. उनके सहयोग और मार्गदर्शन से ही यह संभव हो सका है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से महिलाओं को अधिकार और न्याय मिल सके, इसके लिए भरपूर काम करेंगी.

संघर्ष और समर्पण से मिली सफलता
वहीं, बेटी की इस सफलता पर मां शीला पांडेय ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि रिचा को उसके संघर्ष और समर्पण के कारण सफलता मिली है. वह शुरू से न्यायिक सेवा में जाना चाहती थी. उसका लक्ष्य स्पष्ट था और इस दिशा में लगातार मेहनत करती रही.

आज रिचा की वजह से पूरा परिवार गौरवान्वित है. रिजल्ट आने के बाद से बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

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