रविवार, फ़रवरी 25, 2024
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बिहार में खरीफ सीजन में जरूरत के अनुपात में 22 फीसदी कम यूरिया खाद की हुई आपूर्ति

बिहार सरकार की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार खरीफ सीजन 1 अप्रैल से 12 सितंबर तक बिहार को 10.10 लाख मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता थी. इसके अनुरूप इस समयावधि तक केंद्र सरकार की तरफ से 7.89576 लाख मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति की गई है.

ब‍िहार ने केंद्र सरकार से जरूरत के अनुपात में उर्वरकों की आपूर्त‍ि करने की मांग की थी

खरीफ सीजन अपने पीक पर है. जिसमें खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की पैदावार देश भर में की जाती है. तो वहीं देश के कृषि सीजनों में ही खरीफ सीजन में सबसे अधिक खाद की मांग होती है. लेकिन, इस खरीफ सीजन बिहार में खाद का संकट बना हुआ है. इस वजह से किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बिहार में उपजे इस खाद संकट का मुख्य कारण कम आपूर्ति है. जानकारी के मुताबिक इस खरीफ सीजन जरूरत के मुताबिक केंद्र सरकार की तरफ से 22 फीसदी कम यूरिया का आंवटन बिहार को किया गया है. बिहार सरकार का दावा है कि केंद्र सरकार की तरफ से यूरिया के आवंटन में पीक सीजन (जून से अगस्त) तक यह कटौती की गई है.

10.10 लाख मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता

बिहार सरकार की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार खरीफ सीजन 1 अप्रैल से 12 सितंबर तक बिहार को 10.10 लाख मीट्रिक टन खाद की आवश्यकता थी. इसके अनुरूप इस समयावधि तक केंद्र सरकार की तरफ से 7.89576 लाख मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति की गई है, जो आवश्यकता के अनुपात का 78 फीसदी है.

बिहार सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार जून में आवश्यकता के अनुसार 1.20 लाख मीट्रिक टन के अनुपात में 1.03 लाख मीट्रिन खाद की आपूर्ति की गई. इसी तरह जुलाई में 2.50 लाख मीट्रिक टन मांग के अनुपात में 1.72 लाख मीट्रिक टन और अगस्त में 2.80 लाख मीट्रिक टन जरूरत के अनुपात में 2.51 लाख मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति की गई.

DAP की आपूर्ति भी 64 फीसदी ही हुई

इस खरीफ सीजन यूरिया के साथ ही बिहार को DAP की भी कम आपूर्ति की गई है. बिहार सरकार से मिली जानकारी के अनुसार इस खरीफ सीजन 3 लाख मीट्रिक टन DAP की आवश्यकता थी, इसके अनुरूप 1.90 लाख मीट्रिक टन DAP की आपूर्ति की गई है, जो 64 फीसदी है. वहीं एनपीके भी कुल जरूरत 2 लाख टन के अनुपात में 1.61 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति बिहार को हुई है.

पिछले खरीफ सीजन में भी कम हुई थी आपूर्ति

बिहार समेत कई राज्यों में बीते खरीफ सीजन में खाद संकट गहरा गया था. इस वजह से किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था. इसी कड़ी में बिहार को अपनी जरूरतों के अनुपात में सिर्फ 77 फीसदी यूरिया की आपूर्ति की गई थी. इसी तरह पिछले खरीफ सीजन में बिहार को जरूरत के अनुपात में DAP की आपूर्ति 58 फीसदी और एनपीके की आपूर्ति 86 फीसदी की हुई थी.

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