रविवार, फ़रवरी 25, 2024
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बिहार की सियासत में सभी अटकलों-कयासों को जवाब देती अमित शाह-नीतीश कुमार की यह तस्वीर

राष्ट्रीय जनता दल द्वारा शुक्रवार को आयोजित इफ्तार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शामिल होने के बाद से ही बिहार की सियासत में अटकलों का बाजार गर्म हो गया. खास तौर पर जब तेज प्रताप यादव ने यह कहा कि चाचा (नीतीश कुमार) से बात हो गई है और बिहार में जल्द ही खेला होगा. इसके साथ ही चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. नीतीश कुमार के महागठबंधन की ओर झुकाव की बातें सामने आनें लगीं. हालांकि, शनिवार की सुबह जब वीर कुंवर सिंह की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात की तो तमाम कयासबाजियों पर विराम लगा दिया और एसी बातों को आधारहीन करार दिया.

इसके एक कदम आगे एक और बात हुई. गृह मंत्री अमित शाह आरा के जगदीशपुर में 1857 के विद्रोह के नायकों में से एक बाबू वीर कुंवर सिंह की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जाते समय पटना पहुंचे तो सीएम नीतीश कुमार ने स्वयं उनका स्वागत किया. इसके बाद अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच पटना एयरपोर्ट पर स्टेट हैंगर में लगभग 15 मिनट तक बंद कमरे में अकेले मुलाकात हुई. ऐसे में माना जा सकता है कि नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने की खबरों में कोई दम नहीं है.

इन अटकलबाजियों की हवा तब भी निकल गई जब राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने साफ तौर पर कहा कि महागठबंधन में फिलहाल कोई पद खाली नहीं है. राजद नेता ने कहा कि नीतीश कुमार पर भरोसा करना मुश्किल है. दरअसल, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की खबरों के बीच शु्क्रवार को राजद विधायक और लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ हो सकता है और हमलोगों की सरकार बन सकती है.

तेजप्रताप यादव ने बिहार में सरकार बनाने का भी दावा करते हुए कहा था कि हम सरकार बनाएंगे और खेल खुल जाएगा. यह एक रहस्य है. नीतीश जी के साथ गुप्त बातचीत हुई. जाहिर है इसके बाद सियासत गर्म हो गई और मामला और तूल पकड़ने लगा था. हालांकि, शनिवार को नीतीश कुमार ने साफ किया कि ये बातें आधारहीन हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था, ऐसी इफ्तार पार्टियों में बहुत से लोगों को आमंत्रित किया जाता है. इसका राजनीति से क्या संबंध है? हम भी एक इफ्तार पार्टी रखते हैं और सभी को इसमें आमंत्रित करते हैं.

बहरहाल, बिहार की राजनीति में अटकलों और सियासी कयासबाजियों के बीच जिस अंदाज में गृह मंत्री अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात हुई है, इससे तो साफ है कि भाजपा और जदयू की राहें अलग होने की खबरों में कोई दम नहीं है. इसके साथ ही भाजपा व जदयू के नेताओं के बयानों को भी समझें तो यह स्पष्ट है कि बिहार में अभी एनडीए की सरकार स्थिर है और आने वाले समय में इसमें कोई खतरा नहीं दिख रहा है. वहीं, जगदानंद सिंह के बयान से भी तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है.

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