रविवार, फ़रवरी 25, 2024
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बिहार में यहां कश्मीर जैसा नजारा: 150 मीटर ऊंचाई से गिरता है पानी, तेज गर्मी में भी रहती है ठंड

बिहार की राजधानी पटना से 133 किमी की दूरी पर ककोलत जलप्रपात है। इसे लोग बिहार का कश्मीर भी बोलते हैं। इसकी अमेरिका के नियाग्रा जलप्रपात से तुलना की जाती है। ककोलत को ‘नियाग्रा ऑफ बिहार’ भी कहा जाता है। यह नवादा जिले में पहाड़ियों से घिरा हुआ है। गर्मी की शुरुआत होते ही यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगती है। करीब 150 मीटर की ऊंचाई से यहां पानी गिरता है, जो इसकी खूबसूरती को और भी बढ़ाता है।

ककोलत जलप्रपात को लेकर धार्मिक मान्यता है कि महाभारत काल में ककोलत के समीप एक ऋषि के श्राप की वजह से राजा निग्र गिरगिट के रूप में वास करते थे। अज्ञातवास के दौरान पांडवों के आने से वे श्राप से मुक्त हुए थे। ककोलत जल प्रपात पहुंचने के एक किलोमीटर पहले से ही ठंडी हवाएं आपका स्वागत करने लगती है। करीब 150 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाला पानी कई पहाड़ियों से गुजरते हुए यहां गिरता है। पानी के श्रोत के बारे में कई बार जानकारी लेने की कोशिश की गई। लेकिन, इसका पता नहीं चल सका।

रहने की व्यवस्था नहीं

ककोलत जल प्रपात कभी नक्सल प्रभावित इलाके में आता था। यहां आने से पहले लोगों को काफी कुछ सोचना पड़ता था। लेकिन, समय बदला तो व्यवस्थाएं भी बदली। सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल धीरे-धीरे खत्म होने लगे। बड़ी संख्या में लोग अब यहां पहुंचते हैं। यहीं ककोलत के पानी में ही पर्यटक भोजन भी बनाते हैं।

यहां के पानी में भोजन भी बहुत जल्दी पकता है। साथ ही स्वाद भी गजब का होता है। हालांकि, शाम के बाद पर्यटक ककोलत जल प्रपात से निकलने लगते हैं। क्योंकि, अब तक यहां रहने की व्यवस्था नहीं की गई है।

अभी भी विकास का इंतजार
प्रदेश में कई सरकारें आई और गई। लेकिन, लेकिन ककोलत का कायापलट नहीं हो पाया। ककोलत आज भी किसी तारणहार का इंतजार कर रहा है। यहां सौंदर्यीकरण की योजना वर्ष 2009 में भी बनी थी। लेकिन वन भूमि के चलते इसके निदान में छह साल लग गए।

2015 में 12.3 एकड़ भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया के बाद 11.65 करोड़ रुपए की योजना से वन विभाग के जरिए काम शुरू हुआ। 2018 तक 2.27 करोड़ से सीढ़ियां, तीन कल्वर्ट जैसे कुछ काम हुए। लेकिन, अभी तक रात में रूकने के लिए गेस्ट हाउस नहीं बन सका है।

बाढ़ और भूस्खलन के कारण बर्बाद हो चुके हैं कई काम
1994-95 में जलप्रपात तक पहुंचने के लिए चार फीट चैड़ी सीढ़ी, स्नान आदि की व्यवस्था की गई थी। इस राशि से पर्यटकों के लिए कुंड का निर्माण किया गया। लेकिन, ककोलत में आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण सब बेकार हो गए हैं।

फिलहाल ककोलत में बेरेकेडिंग और महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम भी नहीं है। जर्जर भवन में महिलाएं कपड़ा बदलती है। पुराना गेस्ट हाउस अब खंडहर में तब्दील हो गया है।

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