रविवार, फ़रवरी 25, 2024
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पटना-मुजफ्फरपुर दुनिया के टॉप 30 शहरों में जहां सांस लेना भी मुश्किल

स्विस संगठन आईक्यूएयर की ओर से मंगलवार को जारी 2021 की वर्ल्‍ड एयर क्‍वालिटी रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में पटना और मुजफ्फरपुर दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। ये दोनों शहर 21वें और 27 वें स्थान पर हैं। पिछली रिपोर्ट में दोनों शहरों की रैंकिंग 28वीं और 32वीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, न केवल रैंकिंग में गिरावट आई है, बल्कि PM2.5 (2.5 माइक्रोन से कम आर्टिक्यूलेट मैटर) में भी बढ़ोतरी हुई है।

तेजी से बढ़ रहा पीएम 2.5
PM2.5 का घनत्व 2021 में 78.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी, जो पिछले साल के 68.4 प्रति घन मीटर की तुलना में 14.3 फीसद बढ़ी है। इसी तरह, 2021 में मुजफ्फरपुर की PM2.5 का घनत्व 82.9 प्रति घन मीटर थी, जो 2020 में 74.3 प्रति घन मीटर थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 में पटना में वायु प्रदूषण से अनुमानित 1,600 मौतें हुई हैं। सबसे प्रदूषित शहरों का डेटा बिहार राज्य के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। यह एक साफ संकेत है कि वायु प्रदूषण बिहार के लिए एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य की चिंता का विषय बन गया है। जिसपर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।

लॉकडाउन के वक्त हवा की गुणवत्ता में हुआ था सुधार
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) के अध्यक्ष अशोक घोष ने कहा कि 2020 में कोविड -19 के दौरान, सरकार की ओर से लॉकडाउन के कारण लोगों की गतिविधियों पर अंकुश लगा था, जिसका नतीजा ये था कि पूरे देश और दुनिया भर की एयर क्‍वालिटी इंडेक्स में सुधार हुआ। हवा शुद्ध हुई, आसमान साफ हुआ। उन्होंने कहा ‘हमें 2019 के साथ 2021 में शहरों के PM2.5 के घनत्व की तुलना करने की आवश्यकता है। पटना की वायु गुणवत्ता अभी भी 2019 के आंकड़े से बेहतर थी। जब PM2.5 का स्तर 82.1 था। मुजफ्फरपुर के मामले में, पीएम2.5 का स्तर 81.2 से थोड़ा बढ़कर 82.9 हो गया है,’ उन्होंने बताया कि बुधवार को यहां जलवायु कार्य योजना और बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर को लेकर सभी स्‍टेक होल्‍डर्स के साथ बैठक की गई। ‘बैठक में, बताया गया कि कि मुजफ्फरपुर ने लैंडफिल साइट से कचरे का निपटान किया है, जबकि गया ने लगभग 40 फीसद पुराने कचरे को हटाया है।

अंकुश की जरूरत
रिमोट सेंसिंग तस्वीरों से पता चलता है कि कृषि विभाग ने राज्य में पराली और बायोमास जलने पर अंकुश लगाने के लिए सक्रिय रूप से काम किया है। उन्होंने बताया कि ‘हमने देखा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच एक अलग अंतर है। लाल धब्बे जो पराली के जलने का संकेत देते हैं, पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से फैले हुए थे, लेकिन बिहार में, हमारे पास कम और बिखरे हुए लाल धब्बे हैं’।

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