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बिहार पर पूर्व मानसूनी वर्षा का आगमन (Arrival of Pre-monsoon rains in Bihar)

बिहार में वर्षा ऋतु मध्य जून से अक्टूबर तक पाई जाती है। बिहार में मई तक ग्रीष्म ऋतु ऊंचे तापमान वाली और वर्षा रहित होती है। तापमान अपनी चरम सीमा तक पहुंच जाता है। इस समय गंगा के डेल्टा तथा उत्तरी पूर्वी क्षेत्र में एक चक्रवात की उत्पत्ति होती है जिससे नॉर्वेस्टर कहते हैं। इसके कारण मानसून के पूर्व वर्षा होती है।

सामान्यतः बिहार में मानसून का आगमन 15 जून के बाद होता है। यहां दक्षिण पश्चिमी मानसून के बंगाल की खाड़ी शाखाओं की पवने हिमालय के समांतर अग्रसर होती हैं। इसके आने से आकाश में काले बादल मंडराने लगते हैं। आद्रता युक्त इन पवनों से गरज और तड़क के साथ मूसलाधार वर्षा होती है। इसे मानसून का फटना (breaking of monsoon) कहते हैं। इससे तापमान में गिरावट आती है तापमान घटकर 30 डिग्री के नीचे आ जाता है।

जून में सामान्यता दो से तीन बार वर्षा होती है इस माह में वर्षा की प्राप्ति पांच से 25 सेंटीमीटर तक होती है।
जुलाई के प्रथम सप्ताह तक मानसून पूर्णत विकसित हो जाता है जुलाई तथा अगस्त महीनों में औसत सापेक्षिक आद्रता 80% से 90% तक रहती है। इसकी मात्रा पूरब से पश्चिम की ओर कम होती जाती है। कभी-कभी दो से 5 दिनों तक भी वर्षा होती रहती है।

Ananya Swaraj
Assistant Professor

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