Home BPSC सिविल सेवा नोट्स प्राचीन बिहार में शासन व्यवस्था

प्राचीन बिहार में शासन व्यवस्था

उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई०पू०) में आर्यों का प्रसार पूर्वी भारत में आरंभ हुआ। इसमें लौह प्रायोगिकी की देन निणयिक थी। लोहे की कुल्हाड़ियों से जंगलों की कटाई आसान हो गयी और गांगेय घाटी के घने जंगलों वाले क्षेत्रों में आ बसना सुगम हआ। लोहे का उपयोग भारत में 1000 से 800 ई०पू० के मध्य में आरम्भ हुआ। लगभग इसी समय आर्यों का बिहार में विस्तार भी आरंभ हुआ। 800 ई०पू० के रची गयी शतपथ ब्राह्मण में गांगेय घाटी के क्षेत्र में आर्यों द्वारा जंगलों को जला कर और काट कर साफ करने की चर्चा मिलती है। बिहार का क्षेत्र भी इसमें शामिल था।

छठी शताब्दी ई०पू० में उत्तर भारत में विशाल, संगठित राज्यों का अभ्युदय हुआ। बौद्ध रचनाओं में सोलह महाजनपदों और लगभग दस गणराज्यों की इस काल में चर्चा मिलती है। इनमें तीन महाजनपद, अंग, मगध और लिच्छविवों गणराज्य था, जो विभिन्न गणराज्यों का महासंघ था। इसकी सीमाएँ वर्तमान वैशाली और मुजफ्फरपुर जिलों तक फैली हुई थी और इसकी राजधानी वैशाली थी। अंग का राज्य वर्तमान मुंगेर और भागलपुर जिलों के क्षेत्र में फैला था। इसकी राजधानी चम्पा (वर्तमान चम्पानगर) भागलपुर के समीप थी। मगध के अधीन वर्तमान पटना, नालंदा और गया जिलों के क्षेत्र थे। इसकी राजधानी गृवराज अथवा राजगृह (वर्तमान राजगीर) में थी। आने वाली शताब्दी में मगध इस क्षेत्र का सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य बन गया और शेष राज्यों पर उसका अधिकार हो गया।

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