Home BPSC साक्षात्कार साक्षात्कार प्रश्नोत्तर बंदूक की गोली में यदि माचिस से आग लगाएं तो क्या होगा?

बंदूक की गोली में यदि माचिस से आग लगाएं तो क्या होगा?

यह तो हम सभी जानते हैं कि बंदूक की गोली में बारूद भरा होता है और बंदूक का ट्रिगर दबाते ही गोली के पिछले हिस्से पर चिंगारी पैदा होती है। इसी के साथ गोली हवा की स्पीड से छूटती है और अपने टारगेट को खत्म कर देती है। सवाल यह है कि यदि बंदूक ना हो तो क्या केवल कारतूस को माचिस से आग लगाकर चलाया जा सकता है। आइए इस मजेदार प्रश्न का उत्तर जानने की कोशिश करते हैं।

बंदूक की गोली और कारतूस में बहुत अंतर होता है। कारतूस चलाने पर कारतूस का खोल धमाके से अलग हो जाता है और निशाने पर लगनेवाली चीज़ धातु की नुकीली गोली होती है जो बहुत तेज गति से जाकर निशाने को भेद देती है। धातु की यह गोली बहुत तेज आग में गल जाती है। इसका गलना इस बात पर भी निर्भर करता है कि यह किस धातु या एलॉय से बनी है या आग कितनी तेज धधक रही है।

कारतूस इन चीजों से मिलकर बनता हैः धातु की गोली (1), खोल या आवरण (2), मसाला या बारूद (3), रिम (4), और प्राइमर (5)।
यदि हम कारतूस को आग में जलाएं तो उसके बहुत रोचक परिणाम होंगे। गोली अपने आप नहीं चल पड़ेगी, ऐसा केवल फिल्मों मे ही होता है।। आग के संपर्क में आने पर प्राइमर और मसाला आग पकड़ लेंगे। प्राइमर विस्फोटक सामग्री से बनता है लेकिन कारतूस में इसकी मात्रा बहुत कम होती है। यह केवल एक छोटा धमाका और चिंगारी उत्पन्न करके मसाले को जलाने का काम करता है।

मसाला जलने पर विस्फोट नहीं करता। यह एक सुनिश्चित दर या गति से जलता है। इसके जलने पर बहुत गरम गैसें निकलती हैं जो बंदूक की नली (बैरल) के अंदर गोली को गति प्रदान करती हैं। गोली के तेज धमाके से नली से बाहर निकलते ही कारतूस का खोल वहीं कुछ दूरी पर गिर जाता है। कारतूस में मसाले का काम वही है जो स्पेस रॉकेट में बूस्टर में भरे ईंधन का होता है।

कारतूस को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि प्राइमर के जलने पर गैसें तेजी से निकलें। प्राइमर हल्की सी चोट या धमक पहुंचने ऐक्टिव हो सकता है, इसीलिए कारतूसों को हमेशा गत्ते के डिब्बों में बेचा और स्टोर किया जाता है। कारतूसों को आग में फेंक देने पर छोटे-मोटे धमाके होते हैं। कुछ प्राइमर फूटते हैं और गोलियां थोड़ा-बहुत उछलती हैं लेकिन यह वास्तविक गोली चलने जितना खतरनाक नहीं होता। 

निष्कर्ष क्या निकला सरल शब्दों में बात यह है कि गोली की स्पीड कारतूस के मसाले और बंदूक की नाल पर निर्भर करती है। सिर्फ चिंगारी लगने से गोली में स्पीड नहीं आती। यदि आप किसी भी प्रकार से बिना बंदूक की गोली जलाने की कोशिश करेंगे तो वह दीपावली की आतिशबाजी की तरह छोटा सा धमाका करके फट जाएगी। बंदूक से निकली गोली की तरह टारगेट की तरफ दौड़ नहीं लगाएगी।

हमारा सोशल मीडिया

29,588FansLike
25,786SubscribersSubscribe

Must Read

सितारों से आगे जहां और भी हैं (हिन्दुस्तान)

आज से सौ साल बाद यदि कोई शोध छात्र 21वीं शताब्दी के कोरोनाग्रस्त भारत पर शोध करना चाहेगा, तो उसे अद्भुत आश्चर्य का...

ताकि और गर्व से कहें, हम बिहारी हैं (हिन्दुस्तान)

पिछले दो सप्ताह से अभिनेता मनोज वाजपेयी द्वारा गाया गया एक रैप गीत बम्बई में का बा  दिलो-दिमाग में गूंज रहा है। यू...

बिहार में चुनाव  (हिन्दुस्तान)

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही हमारा लोकतंत्र एक नए दौर में प्रवेश कर गया। राजनीतिक रूप से बहुत महत्व रखने...

नदियों को बांधने की कीमत (हिन्दुस्तान)

बिहार की बागमती नदी से बाढ़-सुरक्षा दिलाने की बात एक बार फिर चर्चा में है। यह नदी काठमांडू से करीब 16 किलोमीटर उत्तर-पूर्व...

Related News

सितारों से आगे जहां और भी हैं (हिन्दुस्तान)

आज से सौ साल बाद यदि कोई शोध छात्र 21वीं शताब्दी के कोरोनाग्रस्त भारत पर शोध करना चाहेगा, तो उसे अद्भुत आश्चर्य का...

ताकि और गर्व से कहें, हम बिहारी हैं (हिन्दुस्तान)

पिछले दो सप्ताह से अभिनेता मनोज वाजपेयी द्वारा गाया गया एक रैप गीत बम्बई में का बा  दिलो-दिमाग में गूंज रहा है। यू...

बिहार में चुनाव  (हिन्दुस्तान)

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही हमारा लोकतंत्र एक नए दौर में प्रवेश कर गया। राजनीतिक रूप से बहुत महत्व रखने...

नदियों को बांधने की कीमत (हिन्दुस्तान)

बिहार की बागमती नदी से बाढ़-सुरक्षा दिलाने की बात एक बार फिर चर्चा में है। यह नदी काठमांडू से करीब 16 किलोमीटर उत्तर-पूर्व...

फिर आंदोलित किसान (हिन्दुस्तान)

संसद से पारित कृषि विधेयकों के खिलाफ आंदोलित पंजाब के किसानों के निशाने पर कल से ही रेल सेवाएं आ गई हैं, इसके...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here