वित्त विधेयक

वित्तीय मामलों जैसे राजस्व व्यय से संबंधित विधेयक वित्त विधेयक कहलाता है. 

इस विधेयक में आने वाले वित्तीय वर्ष में किसी नए प्रकार के कर लगाने या कर में संशोधन आदि से संबंधित विषय शामिल होते हैं. इस प्रकार वित्त विधेयक तीन तरह के होते हैं, जो निम्नलिखित है:

  1. धन विधेयक अनुच्छेद 110
  2. वित्त विधेयक 1 अनुच्छेद 117 (1)
  3. वित्त विधेयक 2 अनुच्छेद 117 (3)

अगर आप वित्त विधेयक के पहले प्रकार पर गौर कर रहे होंगें तो आपको दिखाई देगा की यहाँ धन विधयक अनुच्छेद 110 लिखा गया है. जी हां सभी धन विधेयक वित्त विधेयक की श्रेणी में आते है.

एक चीज और गौर करें की, सभी धन विधेयक वित्त विधेयक होते हैं किंतु सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते हैं. केवल संविधान के अनुच्छेद 110 में वर्णित विधेयक ही धन विधेयक होते है. इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष द्वारा भी किसी विधेयक को धन विधेयक के रूप में प्रमाणित किया जाता है.

धन विधेयक

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक की परिभाषा मिलती है. इसके अनुसार किसी प्रकार के कर का अधिरोपण (Imposition), उत्सादन (Evacuation), परिहार (Avoidance) और परिवर्तन (Changes), केंद्रीय सरकार द्वारा उधार लिए गए धन का विनियमन (Regulation), भारत की संचित निधि या आकस्मिक निधि की अभिरक्षा (Custody). ऐसी किसी निधि में धन जमा करना या उसमें से धन निकालना, भारत की संचित निधि से धन का विनियोग (Investment), भारत की संचित निधि पर भारित किसी व्यय की उद्घोषणा या इस प्रकार के किसी व्यय की राशि में वृद्धि, भारत की संचित निधि में किसी प्रकार के धन की प्राप्ति या इनसे व्यय किया जाना आदि धन विधेयक कहलाता है.

वित्त विधेयक 1 अनुच्छेद 117 (1)

इसके अंतर्गत अनुच्छेद 110 में वर्णित सभी मामले के साथ अन्य आय के मामले आते है. यह दो रूपों में धन विधयक के समान है.

  • दोनों लोकसभा में ही पेश किए जाते हैं.
  • दोनों राष्ट्रपति की सहमति के बाद पेश किए जाते हैं.

इन दोनों के अतिरिक्त अन्य सभी मामलों में यह एक साधारण विधेयक की तरह व्यवहार किया जाता है जैसे की:

  • इसे राज्यसभा द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है
  • यदि इसे पारित करने को लेकर दोनों सदनों के बीच गतिरोध हो तो राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुला सकता है.
  • जब विधेयक राष्ट्रपति के पास जाता है तो राष्ट्रपति स्वीकृति और स्वीकृति या पुनर्विचार हेतु वापस भेज सकता है

वित्त विधेयक 2 अनुच्छेद 117 (3)

इसके अंतर्गत भारत की संचित निधि पर भारित व्यय से संबंधित उपबंध वाले विधेयक आते है लेकिन ये अनुच्छेद 110 में वर्णित मामलों से भिन्न होते है. इनकी निम्न विशेषताएँ होती है:

  • ये साधारण विधेयक की तरह व्यवहारित होती है.
  • इसकी प्रमुख विशेषता है की संसद के किसी भी सदन द्वारा इसे तब तक पारित नहीं किया जा सकता जब तक राष्ट्रपति सदन को ऐसा करने की अनुशंसा ना दे.
  • इसे संसद के किसी भी सदन अर्थात राज्यसभा अथवा लोकसभा में लाया जा सकता है. इसे सदन में लाये जाने हेतु राष्ट्रपति की पूर्वानुमति की शर्त नहीं होती है.
  • इस विधयेक के संबध में गतिरोध की स्थिति में संयुक्त बैठक का प्रावधान मिलता है.
  • राष्ट्रपति के पास स्वीकृति के लिए दिए जाने पर राष्ट्रपति इस पर साधारण विधेयक की तरह व्यवहार करता है. वह विधेयक को स्वीकृति और स्वीकृत या पुनर्विचार हेतु वापस भेज सकता है

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