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भारतीय संविधान की विशेषतायें

भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषतायें इस प्रकार है :

सबसे लंबा लिखित संविधान

भारतीय संविधान की मूलभूत विशेषता है की यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है | कुछ देशों के सविधान लिखित होते थे जबकि कुछ देशों के अलिखित या मौखिक होते है | अमेरिकी संविधान लिखित संविधान का एक उदाहरण है जबकि ब्रिटेन का संविधान मौखिक संविधान का उदाहरण है |

मूल रूप से भारतीय संविधान में एक प्रस्तावना, 22 भागों में विभाजित 395 अनुच्छेद और आठ अनुसूचियां थी | संविधान लागू होने के बाद से इसमें कई संसोधन किये गए वर्तमान में इसमें एक प्रस्तवना, 25 भागों में विभाजित 465 से अधिक अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां है | विश्व के किसी भी संविधान में इतने अनुच्छेद और अनुसूचियां नहीं है |

भारतीय संविधान में आधुनिक लोकतंत्र के छोटे से छोटे बुनियादी मूल्यों को भी डालने का प्रयास किया गया है | इसमें शासन के मौलिक सिद्धांत के अतिरिक्त प्रशासनिक प्रावधानों को भी सम्मिलित किया गया है | अन्य देशो में जिस मामले को राजनैतिक परिपाटी पर छोड़ दिया जाता है उन मूल्यों को यहां संविधान में सम्मिलित किया गया है | इस तरह यह विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है |

विभिन्न स्त्रोतों से विहित संविधान

भारतीय संविधान की दूसरी मूलभूत विशेषता है की यह विभिन्न देशों के उच्च नैतिक मूल्यों का संगम है | भारतीय संविधान विभिन्न स्त्रोतों से ग्रहण किया गया है | इसके अधिकतर उपबंधो को विश्व के कई देशों के संविधानों, भारत शासन अधिनियम 1935 के उपबंधो से है | इसके कारण यह आधुनिक मूल्यों और लोकतान्त्रिक मूल्यों की महत्वपूर्ण विशेषताओं से युक्त है |

अन्य देशो के संविधान से उपबंधो को ग्रहण करने के कारण कुछ आलोचकों का कहना है की यह उधार का संविधान है अथवा नकल वाली संविधान है | लेकिन यह आलोचना तर्कहीन है | भारतीय संविधान निर्माताओं ने किसी देश के संविधान का हुबहू नकल नहीं किया है अपितु उसके अच्छाइयों को भारतीय संदर्भ में ढालते हुए अपनाया है | इसके कारण Hamara Bhartiya Samvidhan उच्चतम मूल्यों और प्रावधानों वाला दुनिया का सबसे बेहतर और सफल संविधान में से एक है |

कठोरता और लचीलेपन का समन्वय

भारतीय संविधान की तीसरी मुलभुत विशेषता है की यह नम्यता और अनम्यता का मिला जुला रूप है | यह न तो बहुत अधिक कठोर है और न ही बहुत अधिक लचीला | लचीला और कठोरता का संबंध इसमें किये जाने वाले संसोधन से है | लचीला से तात्पर्य है की उपबंधो में आसानी से परिवर्तन किया जा सके और कठोरता से तात्पर्य है की उपबंधो में आसानी से परिवर्तन न किया जा सके |

भारतीय संविधान में कुछ उपबन्ध ऐसे है जिसे संसद में विशेष बहुमत से संसोधित किया जा सकता है जबकि कुछ प्रवधानो को विशेष बहुमत के अलावा आधे से अधिक राज्यों के अनुमोदन के द्वारा ही संसोधित किया जा सकता है | इसके साथ ही कुछ उपबंधो को आम विधायी प्रक्रिया के तहत ही संसोधित किये जा सकते है |

कुछ देशों के संविधान कठोर होते है यानी उनमें संसोधन किया जाना काफी कठिन होता है जैसे की अमेरिकी संविधान, जबकि कुछ देशों के संविधान काफी लचीली होती है अर्थात उनमें संसोधन किया जाना आम कानून की तरह सरल होती है जैसे की ब्रिटेन का संविधान | इसके विपरीत भारतीय संविधान नम्यता और अनम्यता का मिला जुला रूप है और यह इसकी प्रमुख और मुलभुत विशेषता है |

एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था

भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है की यह एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ ही संघीय व्यवस्था का प्रावधान करती है | संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत का उल्लेख राज्यों के संघ के रूप में किया गया है लेकिन कहीं भी संघीय शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है इसका अर्थ है की किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है |

जहां एक ओर भारत में संघीय व्यवस्था के आम लक्षण विद्यमान है जैसे की दो सरकार, शक्तियों का विभाजन, संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका वही दूसरी ओर बड़ी संख्या में एकात्मकता और गैर संघीय लक्षण भी विद्यमान है जैसे की एक सशक्त केंद्र, एकल नागरिकता, एकल संविधान, एकीकृत न्यायपलिका, केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति, अखिल भारतीय सेवाएं आदि | इस तरह एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था भारतीय संविधान की मुख्य विशेषता को बताती है |

सरकार का संसदीय रूप

भारतीय सविधान केंद्र एवं राज्यों में संसदीय प्रणाली की स्थापना करता है, जो बहुत हद तक विधायिका और कार्यपालिका के समन्वय पर आधारित है | इसमें बहुमत वाले दल की सत्ता होती है और प्रधानमंत्री या मुख्यमत्री के नेतृत्व वाली कार्यपालिका विधायिका के समक्ष उत्तरदायी होती है | संसदीय व्यवस्था में लोकसभा अथवा विधानसभा का निश्चित समय और परिस्थिति में विघटन होता है और पुनः चुनाव द्वारा नए सदस्य चुने जाते है | भारतीय संविधान में अमेरिका की अध्यक्षीय प्रणाली की जगह ब्रिटेन के संसदीय तंत्र को अपनाया गया है |

संसदीय संप्रभुता एवं न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय

भारतीय संविधान निर्माताओं ने ब्रिटेन की संसदीय संप्रभुता और अमेरिका की न्यायपालिका की सर्वोच्चता के बीच उचित संतुलन बनाने को प्राथमिकता दी | एक ओर जहां सर्वोच्च न्यायालय अपनी न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत संसदीय कानूनों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है वहीँ दूसरी ओर संसद अपनी संवैधानिक शक्तियों के बल पर संविधान के बड़े भाग को संसोधित कर सकती है | यह Bhartiya Samvidhan ki Mukhya Visheshta है |

एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका

संविधान में एक एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गयी है जो भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है | न्यायपालिका विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया का अभिभावक है | आवश्यकता पड़ने पर यह संविधान का व्याख्याकार है | यह संविधान के मूल ढांचे में परिवर्तन किये जाने पर रोक लगाती है इस अर्थ में यह संविधान की संरक्षक भूमिका निभाती है | यह Bhartiya Samvidhan ki Mukhya Visheshta है |

मौलिक अधिकार

संविधान में सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से कुछ बुनियादी स्वतंत्रता की व्यवस्था की गई है | मोटे तौर पर इसमें 6 प्रकार की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है जिनकी सुरक्षा के लिए न्यायालय की शरण भी ली जा सकती है | संविधान के तीसरे भाग में अनुच्छेद 12 से 35 तक में मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है | मौलिक अधिकार Bhartiya Samvidhan ki Mukhya Visheshta है |

राज्य के नीति निर्देशक तत्व

संविधान में निहित राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत यद्यपि न्यायालयों द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते तथापि वे देश के प्रशासन का मूल आधार हैं और सरकार का यह कर्तव्य है कि वह कानून बनाते समय इन सिद्धांतों का पालन करें | यह सिद्धांत संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 36 से 51 में दिए गए हैं | निति निर्देशक तत्व भारतीय संविधान की विशेषता है |

मौलिक कर्तव्य

1976 में संविधान में हुए 42 में संशोधन के अंतर्गत नागरिकों के मौलिक कर्तव्य का भी उल्लेख किया गया | मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग 4 ‘क’ के अनुच्छेद 51 (क) में दिए गए हैं | इसमें अन्य बातों के अलावा यह भी कहा गया है कि नागरिकों का कर्तव्य है कि वह संविधान का पालन करें, स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले आदर्शों का अनुसरण करें, देश की रक्षा करें और कहे जाने पर राष्ट्रीय सेवा में जुट जाए | धर्म भाषा क्षेत्रीय तथा वर्ग संबंधी इन नेताओं को बुलाकर सद्भाव और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दे | मौलिक कर्तव्य भी Bhartiya Samvidhan ki Mukhya Visheshta है |

धर्मनिरपेक्ष राज्य

धर्मनिरपेक्षता की पश्चिमी अवधारणा धर्म और राज्य के बीच पूर्ण अलगाव रखती है | धर्मनिरपेक्षता की यह नकारात्मक अवधारणा भारतीय परिवेश में लागू नहीं हो सकती क्योंकि यहां का समाज बहुत धर्म वादी है इसीलिए भारतीय संविधान में सभी धर्मों का सम्मान आदर और सभी धर्मों को समान रूप से रक्षा करते हुए धर्मनिरपेक्षता के सकारात्मक पहलू को शामिल किया गया है |

संविधान की प्रस्तावना हर भारतीय नागरिक की आस्था पूजा-अर्चना व विश्वास की स्वतंत्रता की रक्षा करती है | 42 वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को जोड़ा गया | इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 15 16 25 27 28 29 30 और 44 में सभी नागरिकों को आस्था पूजा-अर्चना व विश्वास की सुंदरता की रक्षा की व्यवस्था की गई है |

  • अनुच्छेद 14: किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समान समझा जाएगा और उसे कानून की समान सुरक्षा प्रदान की जाएगी |
  • अनुच्छेद 15: धर्म के नाम पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा |
  • अनुच्छेद 16: सार्वजनिक सेवाओं में सभी नागरिकों को समान अवसर दिए जाएंगे |
  • अनुच्छेद 25: हर व्यक्ति को किसी भी धर्म को अपनाने व उसके अनुसार पूजा अर्चना करने का सामान अधिकार है |
  • अनुच्छेद 26: हर धार्मिक समूह अथवा इसके किसी हिस्से को अपने धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार है |
  • अनुच्छेद 27: किसी भी व्यक्ति को किसी भी धर्म विशेष के प्रचार के लिए किसी प्रकार का कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा |
  • अनुच्छेद 28: किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्थान में किसी प्रकार के धार्मिक निर्देश नहीं दिए जाएंगे |
  • अनुच्छेद 29: नागरिकों की किसी भी वर्ग को अपनी भाषा लिपि अथवा संस्कृति को संरक्षित रखने का अधिकार है |
  • अनुच्छेद 30: अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थानों की स्थापना करने और उन्हें संचालित करने का अधिकार है |
  • अनुच्छेद 44: सरकार सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता बनाने के लिए प्रयास करेगा |

संविधान ने विधायिका में धर्म आधारित प्रतिनिधित्व को भी समाप्त कर दिया है | हालांकि संविधान अनुसूचित जाति और जनजाति को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए अस्थाई आरक्षण प्रदान करता है | इस तरह धर्मनिरपेक्षता Bhartiya Samvidhan ki Mukhya Visheshta है |

सार्वभौम व्यस्क मताधिकार

देश के बृहद आकार, जनसंख्या, उच्च गरीबी, सामाजिक असमानता, अशिक्षा आदि को देखते हुए संविधान निर्माताओं द्वारा सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार को संविधान में शामिल करना एक साहसिक व सराहनीय प्रयोग था |

वयस्क मताधिकार लोकतंत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ आम जनता के स्वाभिमान में वृद्धि करता है, समानता के सिद्धांत को लागू करता है, अल्पसंख्यकों को अपने हितों की रक्षा का अवसर देता है तथा कमजोर वर्गों के लिए नई आशाएं और प्रत्याशा जगाता है | सार्वभौम व्यस्क मताधिकार भारतीय संविधान की मूलभूत विशेषता है |

एकल नागरिकता

संविधान में संपूर्ण भारत के लिए एक समान नागरिकता की व्यवस्था की गई है | ऐसा प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक बनाया गया जो संविधान लागू होने के दिन तक भारत में स्थाई रूप से रहता हो और जो भारत में पैदा हुआ हो अथवा जिसके माता-पिता में से एक भारत में पैदा हुए हैं अथवा जो सामान्यतया कम से कम 5 वर्ष से भारतीय क्षेत्र में रह रहा हो | नागरिकता अधिनियम 1955 लागू होने के बाद नागरिकता ग्रहण करने निर्धारित करने तथा समाप्त करने के संबंध में प्रावधान किए गएम समय-समय पर नागरिकता अधिनियम 1955 में संसोधन भी किया गया है |

स्वतंत्र निकाय

भारतीय संविधान विधायिका कार्यपालिका व न्यायिक अंगो के साथ कुछ स्वतंत्र निकायों की स्थापना भी करता है | इन्हें संविधान में भारत सरकार के लोकतांत्रिक तंत्र के महत्वपूर्ण स्तम्भों के रूप में माना जाता है | ऐसे कुछ स्वतंत्र निकाय निम्नलिखित है |

  • निर्वाचन आयोग
  • भारत का नियंत्रक और महालेखाकार
  • संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग

आपतकालीन प्रावधान

संविधान में विशेष परिस्थितियों के लिए आपातकालीन प्रावधान की भी व्यवस्था मिलती है | ये निम्नलिखित है :

  • राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352
  • राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356
  • वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद 360

इनके बारे में विस्तार से पढने के लिए यहां क्लिक करें |

त्रिस्तरीय सरकार

वर्ष 1993 में 73वें एवं 74 वे संविधान संशोधन ने तीन स्तरीय सरकार का प्रावधान किया गया | ऐसी व्यवस्था विश्व के किसी और संविधान में नहीं मिलती है | यह भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण विशेषता है |

संविधान में एक नया भाग (9 वां) और एक नई अनुसूची (11 वी) जोड़कर वर्ष 1992 के 73वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों को संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई | इसमें एक नया भाग 9 जोड़ा गया | इसी प्रकार से 74 वे संविधान संशोधन विधेयक 1992 ने एक भाग 9 क तथा नई अनुसूची 12वीं को जोड़कर नगर पालिकाओं (शहरी स्थानीय सरकार) को संवैधानिक मान्यता प्रदान की

स्पष्ट है की भारतीय संविधान तत्वों और मूल भावना के संदर्भ में अद्वितीय है और यह श्रेष्ठ विशेषताओं को धारण करता है |

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