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भारत में नागरिकता

नागरिकता आधुनिक राज्य की विशेषता है. किसी भी देश के स्थायी निवासी, जो उस राज्य के पूर्ण सदस्य होते हैं और जिन्हें वहां का संविधान, संसद अथवा सरकार कुछ मुलभुत सामाजिक राजनितिक अधिकार प्रदान करता है, नागरिक कहलाते है. भारत के मूल संविधान के भाग 2 में 5 से 11 तक में नागरिकता से संबंधित प्रावधान किये गए है.

भारत में अमेरिका की तरह दोहरी नागरिकता के बदले इकहरी नागरिकता की प्रणाली अपनाई है. इकहरी नागरिकता से तात्पर्य है की भारत के किसी राज्य में जाने और बसने के लिए अलग-अलग नागरिकता की सिर्फ एक नागरिकता की आवश्यकता होगी. अमेरिका में अमेरिकी संघ के नागरिकता अलावा उसके अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग नागरिकता की आवश्यकता होती है.

भारत में नागरिकता से जुड़े मूल संवैधानिक प्रावधान

किसी भी देश का संविधान, संसद अथवा सर्वोच्च संस्था नागरिकता से संबंधित नियमों को बनाता है और उस आधार पर अपने नागरिकों की पहचान करता है. भारतीय संविधान के मूल में भी नागरिकता से संबंधित प्रावधान किये गए है.

भारतीय संविधान के भाग 2 में अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9, 10 और 11 में नागरिकता के बारे में चर्चा की गई है. इसके मूल प्रावधान को सरल रूप में निम्न तरह से समझा का सकता है.

अनुच्छेद 5: वह व्यक्ति जिसका जन्म भारत में हुआ हो या उसके माता-पिता में से किसी एक का जन्म भारत में हुआ हो या संविधान लागू होने के 5 वर्ष पूर्व से वह भारत में रह रहा हो भारत के नागरिक के रूप में माना जाएगा.

अनुच्छेद 6: 1947 के विभाजन के समय पाकिस्तान से स्थानांतरित हुए व्यक्ति को भारत की नागरिकता दी गई.

अनुच्छेद 7: विभाजन के समय पाकिस्तान गया हुआ व्यक्ति जो 1948 से पूर्व भारत लौट आया हो उसे भी भारत का नागरिक माना गया.

अनुच्छेद 8 : एक व्यक्ति जो भारत के बाहर रह रहा हो लेकिन जिसके माता-पिता या दादा दादी अविभाजित भारत में पैदा हुए हो वह भारत का नागरिक बन सकता है, यदि उसने भारत के नागरिक के रूप में पंजीकरण कूटनीतिज्ञ तरीके या पार्षदीय प्रतिनिधि के रूप में आवेदन किया हो.

अनुच्छेद 9: वह व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं होगा या भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा जो स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेगा.

अनुच्छेद 10: संसद द्वारा बनाए गए नागरिकता संबंधी विधान के द्वारा कोई व्यक्ति भारत का नागरिक बन सकता है.

अनुच्छेद 11: संसद को यह अधिकार है कि वह नागरिकता के अर्जन तथा समाप्ति के तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषय के संबंध में विधि बना सकती है.

इस तरह भारतीय संविधान संसद को भी नागरिकता से संबंधित कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है. इसके आधार पर संसद ने नागरिकता अधिनियम 1955 को लागू किया और समय-समय पर इसमें संसोधन भी किया. इसमें 1986, 1993, 2003, 2005, 2016 और वर्तमान में 2019 में संशोधन किया गया.

भारतीय संविधान संसद को यह अधिकार देता है कि वह नागरिकता के संबंध में कानून बना सकता है. संविधान लागू होने के बाद इसी आधार पर नागरिकता अधिनियम 1955 लाया गया जो नागरिकता के अर्जन एवं समाप्ति के बारे में उपबंध करता है, जिसमें 1986, 1993, 2003, 2005, 2016 और 2019 में संशोधन किया गया. इसके बाद नागरिकता के अर्जन एवं समाप्ति से जुड़े ओवरआल नियम एवं प्रावधान इस प्रकार है.

नागरिकता के अर्जन से संबंधित उपबंध

नागरिकता अधिनियम 1955 नागरिकता प्राप्त करने की 5 शर्ते बताता है.

1. जन्म के आधार पर:

यदि व्यक्ति के माता-पिता भारत के नागरिक हो तो वह व्यक्ति भारत का नागरिक होगा.

2. वंश के आधार पर:

भारत से बाहर रहने वाला व्यक्ति जिसके माता-पिता भारत के नागरिक हो भारत का नागरिक बन सकता है.

3. पंजीकरण द्वारा

कोई भी व्यक्ति जो भारत में अवैध रूप से न रह रहा हो भारत के नागरिक के रूप में जुड़ने के लिए आवेदन कर सकता है. निश्चित शर्तों को पूरा करने पर उसे नागरिकता प्रदान की जा सकती है. ये शर्ते निम्नलिखित है:

  • भारतीय मूल का व्यक्ति हो जो नागरिकता प्राप्ति के आवेदन देने से पूर्व 7 वर्षों से भारत में रह रहा हो.
  • भारतीय मूल का वह व्यक्ति जो अन्य देश में अन्यत्र रह रहा हो.
  • कोई व्यक्ति जिसने भारतीय नागरिक से विवाह किया हो और नागरिक बनने के आवेदन करने से पूर्व 7 वर्षों से भारत में रह रहा हो.
  • भारत की नागरिक के नाबालिक बच्चे
  • कोई व्यक्ति जो पूरी आयु तथा क्षमता का हो तथा उसके माता-पिता भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत हो.
  • कोई व्यक्ति जो पूरी आयु तथा क्षमता का हो तथा किसी देश के नागरिक के रूप में 5 वर्ष से पंजीकृत हो तथा वह पंजीकरण का आवेदन देने से 1 वर्ष पूर्व से भारत में रह रहा हो.

भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत होने के बाद निष्ठा की शपथ लेनी होगी यह शपथ निम्न प्रकार की होती है.

मैं अमुक ….. यह प्रतिज्ञा करता या करती हूं कि मैं भारत के संविधान का पालन करूंगा/ करूंगी तथा उसके प्रति निष्ठा रखूंगा/रखूंगी मैं भारत की विधि का पालन करूंगा/करूंगी तथा भारत के नागरिक के दायित्वों का निर्वहन करुंगा/करूंगी.

POIs: एक व्यक्ति जन्म से भारतीय मूल (POIs) का माना जाएगा यदि वह या उसके माता-पिता में से कोई अविभाजित भारत में पैदा हुए हो या 15 अगस्त 1947 के बाद भारत का अंग बनने वाले किसी भी क्षेत्र के निवासी हो.

4. प्राकृतिक रूप से/देसी करण द्वारा

केंद्र सरकार आवेदन प्राप्त होने पर किसी भी व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान कर सकती है यदि वह व्यक्ति निम्नलिखित योग्यताएं रखता है

  • ऐसे देश से संबंधित ना हो जहां भारतीय नागरिक प्राकृतिक रूप से नागरिक नहीं बन सकते.
  • यदि वह किसी अन्य देश का नागरिक हो तो वह भारतीय नागरिकता के लिए अपने आवेदन की स्वीकृति पर उस देश के नागरिक का त्याग देगा.
  • वह भारत में पिछले 7 वर्षों से रह रहा हो. नागरिकता संविधान संशोधन अधिनियम 2019 द्वारा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बंगलादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, इसाई धर्म के लोगो के लिए निवास के शर्त को घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया.
  • अच्छे चरित्र वाला हो
  • संविधान में उल्लिखित किसी भारतीय भाषा का ज्ञाता हो

यदि व्यक्ति किसी विशेष सेवा, विज्ञान, दर्शन, कला, साहित्य, विश्व शांति या मानव उन्नति से संबंध हो तब भारत सरकार उपरोक्त प्राकृतिक शर्तों के मामलों पर एक या सभी पर दावा हटा सकती है. इस प्रकार से नागरिक बने हर व्यक्ति को भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेने होती है.

5. क्षेत्र समाविष्ट द्वारा

किसी विदेशी क्षेत्र के भारत का हिस्सा बनने पर भारत सरकार उस क्षेत्र से संबंधित नागरिकों को भारत का नागरिक घोषित करती है. ऐसे व्यक्ति उल्लिखित तारीख से भारत के नागरिक माने जाते हैं. उदाहरण के लिए जब पांडिचेरी भारत का हिस्सा बना तो भारत सरकार ने नागरिकता पांडिचेरी आदेश 1962 जारी किया. यह आदेश नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जारी किया गया.

नागरिकता की समाप्ति से संबंधित उपबंध

नागरिकता अधिनियम 1955 में अधिनियम या संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार प्राप्त नागरिकता के समाप्त होने के तीन कारण बताए गए हैं. इनमें स्वैच्छिक त्याग, बर्खास्तगी और वंचित किया जाना शामिल है.

स्वैच्छिक त्याग

एक भारतीय नागरिक जो पूर्ण आयु और क्षमता का हो घोषणा के उपरांत अपनी नागरिकता त्याग सकता है. यदि इस तरह की घोषणा तब हो जब भारत युद्ध में व्यस्त हो तो केंद्र सरकार इस के पंजीकरण को स्वीकार नहीं भी कर सकती है. जब कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता का परित्याग करता है तो उस व्यक्ति का प्रत्येक नाबालिक बच्चा भारतीय नागरिक नहीं रहता यद्यपि इस तरह के बच्चे की उम्र 18 वर्ष होने पर वह भारतीय नागरिक बन सकता है.

बर्खास्तगी के द्वारा

यदि कोई भारतीय नागरिक सुरक्षा से किसी अन्य देश का नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी नागरिकता स्वयं बर्खास्त हो जाएगी. यह व्यवस्था तब लागू नहीं होगी जब भारत युद्ध में व्यस्त हो.

वंचित किया जाना

केंद्र सरकार द्वारा किसी नागरिक को भारतीय नागरिकता से वंचित कर दिया जाएगा यदि वह निम्न तरह कि गतिविधि में संलिप्त हो:

  • यदि नागरिकता फर्जी तरीके से प्राप्त की गई हो
  • यदि उसने संविधान के प्रति अनादर जताया हो
  • यदि उसने युद्ध के दौरान शत्रु के साथ गैरकानूनी रूप से संबंध स्थापित किया हो या उसे कोई राष्ट्र विरोधी सूचना दी हो.
  • पंजीकरण या प्राकृतिक नागरिकता के 5 वर्ष के दौरान नागरिक को किसी देश में 2 वर्ष की कैद हुई हो
  • नागरिक समान रूप से भारत के बाहर 7 वर्षों से रह रहा हो

उपरोक्त स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को अनिवार्य रूप से नागरिकता से बर्खास्त करनी होती है.

स्पष्ट है की संविधान के मूल भाग में नागिरकता से जुड़े प्रावधान मिलते है और इसी में संसद को इससे जुड़े कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है इसी के तहत नागरिकता अधिनियम 1955 में नागरिकता के अर्जन एवं समाप्त किये जाने से संबंधित व्यापक प्रावधान बनाये गए है, जिनमें समय-समय पर संसोधन भी होता रहा है.

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