बौद्ध धर्म

भारतीय धर्मों में बौद्ध धर्म का भी महत्वपूर्ण स्थान है | 2011 की जनसंख्या के अनुसार भारत की कुल आबादी का 0.7 %लोग बौद्ध धर्म को मानते है |

गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक माने जाते हैं | इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था परंतु ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्हें महात्मा बुद्ध कहा गया | महात्मा बुद्ध द्वारा प्रतिपादित धर्म को बौद्ध धर्म के नाम से जाना जाता है | ज्ञान प्राप्ति के पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिसे धर्म चक्र प्रवर्तन की संज्ञा दिया जाता है |

महात्मा बुद्ध का उपदेश दुख, दुखों के कारणों तथा उनके समाधान के उपायों से संबंधित था | इन्हें चार आर्य सत्य कहा जाता है | आवागमन के बंधन से मुक्ति या दुःख की समाप्ति के लिए मनुष्य को सदमार्ग से परिचित होना चाहिए, जिसे उन्होंने अष्टांगिक मार्ग कहा |

महावीर की भांति बुद्ध ने भी अहिंसा का उपदेश दिया किंतु उन्होंने इस पर उतना अधिक बल नहीं दिया जितना कि महावीर ने दिया था | बुद्ध ने वैदिक कर्मकांड तथा पशु बलि जैसी कुप्रथाओं का जमकर विरोध किया | उन्होंने जाति प्रथा पर आधारित सामाजिक विषमताओं को भी स्वीकार नहीं किया | उनके अनुसार कोई भी व्यक्ति संघ में शामिल हो सकता था |

बौद्ध धर्म ईश्वर और आत्मा दोनों में विश्वास नहीं करता है | बुध के अनुसार सृष्टि का कर्ता ईश्वर नहीं वरन इसकी उत्पत्ति कर्ता कारण सिद्धांत के अनुसार हुई है | आत्मा के अस्तित्व को अस्वीकार करने के बावजूद वे पुन जन्म तथा कर्म के सिद्धांत को स्वीकार करते हैं | बौद्ध धर्म में मध्यम मार्ग के महत्व पर बल दिया गया है उसके अनुसार पवित्र जीवन बिताने को दोनों प्रकार की अति से बचना चाहिए | न तो बहुत अधिक तप करना चाहिए और ना ही सांसारिक सुखों में लगे रहना चाहिए इस धर्म का मुख्य लक्ष्य निर्वाण प्राप्त करना है |

बौद्ध धर्म के सिद्धांत व शिक्षाएं इस प्रकार है

चार सत्य

  • दुख 
  • दुख समुदाय 
  • दुख निरोध
  • दुख निरोध मार्ग

अष्टांगिक मार्ग:  महात्मा बुद्ध ने दुखों से मुक्ति के लिए 8 बातों के पालन पर विशेष बल दिया इससे अष्टांगिक मार्ग या मध्य मार्ग कहा जाता है यह है:

  1. सम्यक दृष्टि 
  2. सम्यक संकल्प
  3.  सम्यक वाक्
  4. सम्यक कर्मान्त
  5. सम्यक आजीव
  6. सम्यक व्यायाम 
  7. सम्यक् स्मृति 
  8. म्यक समाधि

दस शील: शील का तात्पर्य सम्यक आचरण से है, ये हैं:

  1. अहिंसा 
  2. सत्य 
  3. अस्तेय 
  4. अपरिग्रह 
  5. ब्रह्मचारी 
  6. नृत्य-संगीत का त्याग 
  7. सुगंधित पदार्थों का त्याग 
  8. असमय भोजन का त्याग 
  9. कोमल शैय्या का त्याग 
  10. कामिनी कंचन का त्याग

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