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[सिलेबस] समाजशास्त्र (वैकल्पिक विषय) – बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम BPSC Mains Syllabus

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खण्ड- I (Section – I) सामान्य समाजशास्त्र (General Sociology)

1. सामाजिक घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन

समाजशास्त्र का आविर्भाव, अन्य शिक्षा शाखाओं से इनका सम्बन्ध, उनका क्षेत्र विस्तार एवं संबंधित धारणाएँ, विज्ञान एवं सामाजिक व्यवहार का अध्ययन, यथार्थता, विश्वसनीयता एवं वैधिकता की समस्याएँ, वैज्ञानिक विधि एवं वैज्ञानिक भाषा, उनका अर्थ उद्देश्य, प्रकार तत्व एवं विशेषताएँ, सामाजिक अनुसंधान संरचना, तथ्य संकलन एवं तथ्य विश्लेषण की विधियाँ, अभिवृत्ति मापन समस्याएँ एवं तकनीकी शैली (स्केल्स), आर॰एम॰ मैकाइवर की कार्य कारण अवधारणा।

2. समाजशास्त्र के क्षेत्र में पथ-प्रदर्शक

योगदान, सैद्धान्तिक प्रारम्भ एवं विकासवाद के सिद्धान्त, काम्ट, स्पेन्सर तथा मार्गन, ऐतिहासिक समाजशास्त्र कार्ल माक्र्स, मैक्स बेबर एवं पीव्म्एव्म् सरोकिन, प्रकार्यवाद ई॰ दुर्खाइम, परेटो, पार्सन्स एवं मर्टन, संघर्षवादी सिद्धान्त, गुमप्लोविज, डहरेन डार्फ एवं कोजर, समाज-शास्त्र के आधुनिक विचारधाराएँ, सम्पूर्णालक एवं अल्पार्थक समाजशास्त्र, मध्यम स्तरीय सिद्धान्त, विनियम सिद्धान्त।

3. सामाजिक संरचना एवम् सामाजिक संगठन

अवधारणा एवं प्रकार, सामाजिक संरचना सम्बन्धित विचारधाराएँ, संरचना प्रकार्यवादी, माक्र्सवादी सिद्धान्त, सामाजिक संरचना के तत्व, व्यक्ति एवं समाज, सामाजिक अन्तक्र्रिया, सामाजिक समूह अवधारणाएँ एवं प्रकार, सामाजिक स्तर एवं भूमिका, उनके निर्धारक एवं प्रकार, सरल एवं संकूल समाजों में भूमिका के विभिन्न परिमाण, भूमिका संघर्ष, सामाजिक जाल, अवधारणा एवं प्रकार, संस्कृति एवं व्यक्तित्व अनुरूपता एवं सामाजिक नियंत्रण की अवधारणा, सामाजिक नियंत्रण के साधन, अल्पसंख्यक समूह, बहुसंख्यक एवं अल्पसंख्यक सम्बन्ध।

4. सामाजिक स्तरीकरण एवं गतिशीलता

 सामाजिक स्तरीकरण के अवधारणा, प्रभाव एवं प्रकार, असमानता एवं स्तरीकरण, स्तरीकरण के आधार एवं परिमाण, स्तरीकरण सम्बन्धी विचारधाराएँ, प्रकार्यवाद एवं संघर्षवाद विचारधाराएँ, सामाजिक स्तरीकरण एवं सामाजिक गतिशीलता, संस्कृतिकरण एवं पश्चिमीकरण, गतिशीलता के प्रकार, अन्र्तपीढ़ी गतिशीलता, उदग्र गतिशीलता बनाम क्षैतिज गतिशीलता, गतिशीलता के प्रतिरूप।

5. परिवार, विवाह एवं नातेदारी

संरचना, प्रकार्य एवं प्रकार, सामाजिक परिवर्तन एवं आयु तथा स्त्री-पुरूष भूमिकाओं में परिवर्तन, विवाह, परिवार एवं नातेदारी में परिवर्तन, प्राद्योगिक समाज में परिवार का महत्व।

6. औपचारिक संगठन

औपचारिक तथा अनौपचारिक संगठनों के तत्व, नौकरशाही प्रकार्य, अकार्य एवं विशेषताएँ, नौकरशाही एवं राजनैतिक विकास, राजनैतिक, सामाजिक एवं राजनैतिक सहभागिता, सहभागिता के विभिन्न रूप, सहभागिता के लोकतांत्रिक तथा सत्तात्मक स्वरूप, स्वैच्छित मण्डली।

7. आर्थिक प्रणाली

सम्पत्ति की अवधारणाएँ, श्रम विभाजन के सामाजिक प्रतिमाण, विनियम के विभिन्न प्रकार, पूर्व औद्योगिक एवं औद्योगिक अर्थ व्यवस्था का सामाजिक पक्ष, औद्योगिकीकरण तथा राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक, पारिवारिक स्गरविन्यासी क्षेत्रों में परिवर्तन, आर्थिक विकास के निर्धारक तत्व एवं उनके परिणाम।

8. राजनीतिक व्यवस्था

राजनीतिक व्यवस्था की अवधारणा, तत्व एवं प्रकार, राजनीतिक व्यवस्था के प्रकार्य, राजनीतिक व्यवस्था के अन्तर्गत समस्याएँ, व्यक्ति समूह, राजनीतिक संगठनों, राजनीतिक दल एवं अन्य साधनों के संदर्भ में राजनीतिक प्रक्रियाएँ, शक्ति प्राधिकार एवं वैधता की अवधारणाएँ, आधार एवं प्रकार, राज्यविहीन समाज की परिकल्पना, राजनीतिक समाजीकरण बनाम राजनीतिक भागीदारी, राज्य की विशेषताएँ, प्रजातंत्रात्मक एवं सत्तात्मक राजनीतिक व्यवस्था के अन्तर्गत संभ्रान्त वर्ग एवं जनसमूह की शक्ति, राजनीतिक दल एवं मतदान, नायकत्व, प्रजातांत्रिक व्यवस्था एवं प्रजातांत्रिक स्थिरता।

9. शैक्षिक प्रणाली

शिक्षा की अवधारणा एवं उद्देश्य, शिक्षा पर प्रवृतिवाद, आदर्शवाद एवं पाण्डित्यवाद के प्रभाव, समाज, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध, प्रजातंत्र व्यवस्था एवं राष्ट्रवाद के सन्दर्भ में शिक्षा का महत्व, शिक्षा के नये झुकाव, शिक्षा एवं समाजीकरण में विभिन्न साधन, परिवार, विद्यालय, समाज, राज्य एवं धर्म की भूमिका, जनसंख्या शिक्षा अवधारणा एवं तत्व, सांस्कृतिक पुनर्जन्म, सैद्धान्तिक मतारोपन, सामाजिक स्तरीकरण, गतिशीलता एवं आधुनिकीकरण के साधन के रूप में शिक्षा की भूमिका।

10. धर्म

धार्मिक तथ्य, पावन एवं अपावन की अवधारणाएँ, धर्म का सामाजिक प्रकार्य एवं अकार्य, जादू-टोना, धर्म एवं विज्ञान, धर्मनिरपेक्षीकरण एवं सामाजिक परिवर्तन।

11. सामाजिक परिवर्तन एवं विकास

सामाजिक परिवर्तन के आर्थिक, जैविक एवं प्रौद्योगिक कारक, सामाजिक परिवर्तन के विकासवादी प्रकार्यवाद एवं संघर्षवाद सिद्धान्त, सामाजिक परिवर्तन, आधुनिकीकरण एवं उन्नति, प्रजातांत्रीकरण, समानता एवं सामाजिक न्याय, सामाजिक पुनर्निर्माण।

खण्ड- II (Section – II) भारतीय समाज (Indian Society)

(1) भारतीय समाज

पारम्परिक हिन्दू सामाजिक संगठन की विशेषताएँ, विभिन्न समय के सामाजिक सांस्कृतिक परिवर्तन, भारतीय समाज पर बौद्ध, इस्लाम तथा आधुनिक पश्चिम का प्रभाव, निरन्तरता और परिवर्तन के कारक तत्व।

(2) सामाजिक स्तरीकरण

जाति व्यवस्था एवं इसके रूपान्तरण, जाति के संदर्भ में आर्थिक संरचनात्मक एवं सांस्कृतिक मत, जाति प्रथा की उत्पत्ति, हिन्दू एवं गैर-हिन्दू जातियों में असमानता एवं सामाजिक न्याय की समस्यायें, जाति गतिशीलता, जातिवाद, पिछड़ी जाति बनाम पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अस्पृश्यता, अनुसूचित जातियों में परिवर्तन, अस्पृश्यता का उन्मूलन, औद्योगिक एवं कृषि प्रधान समाज की वर्ग संरचना, मन्डल कमीशन एवं सुरक्षा नीति के अन्तर्गत बिहार के अन्तर्जातीय सम्बन्धों के बदलते झुकाव।

(3) परिवार, विवाह एवं सगोत्रता

सगोत्रता व्यवस्था में क्षेत्रीय विविधता एवं उनके सामाजिक सांस्कृतिक सह सम्बन्ध, सगोत्रता के बदलते पहलू, संयुक्त परिवार प्रणाली, इसका संरचनात्मक एवं व्यावहारिक पक्ष, इसके बदलते रूप एवं विघटन, विभिन्न नृजातिक समूहों, आर्थिक एवं जाति वर्गों में विवाह, भविष्य में उनके बदलते प्रकृति, परिवार एवं विवाह पर कानून तथा सामाजिक-आर्थिक, परिवर्तनों का पड़ते प्रभाव, पीढ़ी, अन्तराल एवं युवा असन्तोष, महिलाओं की बदलती स्थिति, महिला एवं सामाजिक विकास, बिहार में अन्र्तजातीय विवाह, कारण एवं परिणाम।

(4) आर्थिक प्रणाली

यजमानी व्यवस्था एवं पारम्परिक समाज पर उसका प्रभाव, बाजार अर्थ व्यवस्था और उसके सामाजिक परिणाम, व्यवसायिक विविधिकरण एवं सामाजिक संरचना, व्यवसायिक मजदूर संघ, आर्थिक विकास के सामाजिक निर्धारक तथा उनके परिणाम, आर्थिक असमानताएँ, शोषण और भ्रष्टाचार, बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के कारण, बिहार के आर्थिक विकास की सम्भाव्यता, बिहार के सन्दर्भ में आर्थिक वृद्धि एवं सामाजिक विकास के सह-सम्बन्ध।

(5) राजनीतिक व्यवस्था

पारम्परिक समाज में प्रजातांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था के प्रकार्य, राजनीतिक दल एवं उनकी सामाजिक संरचना, राजनीतिक संभ्रान्त वर्ग की उत्पत्ति एवं उनका सामाजिक लगाव, शक्ति का विकेन्द्रीकरण, राजनीतिक भागीदारी, बिहार में मतदान का स्वरूप, बिहार के मतदान प्रणाली में जाति समुदाय एवं आर्थिक कारकों की अनुरूपता, इसके बदलते आयाम, भारतीय नौकरशाही का प्रकार्य, अकार्य एवं विशेषता, भारत में नौकरशाही एवं राजनीतिक विकास, जनप्रभुसत्ता समाज, भारत में जन-आन्दोलन के सामाजिक एवं राजनीतिक श्रोत।

(6) शिक्षा व्यवस्था

पारम्परिक एवं आधुनिक के सन्दर्भ में समाज एवं शिक्षा, शैक्षणिक असमानताएँ एवं परिवर्तन, शिक्षा एवं सामाजिक गतिशीलता, महिलाओं की शिक्षा की समस्याएँ, पिछडे़ वर्ग एवं अनुसूचित जातियों, बिहार में शैक्षणिक पिछड़ेपन के कारण, बिहार में अनियोजित रूप से पनपते संस्थाओं के प्रकार्य एवं अकार्य पक्ष। बिहार में उच्च शिक्षा की समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ, नई शिक्षा नीतियाँ, जन शिक्षा।

(7) धर्म

जनसंख्यात्मक परिमाण, भौगोलिक वितरण एवं पड़ोस, प्रमुख धार्मिक समुदायों के जीवन शैली, अन्तर्धार्मिक अन्तःक्रियाएँ एवं धर्म परिवर्तन के रूप में इनका प्रकाशन, अल्पसंख्यक के स्तर, संचार एवं
धर्मनिरपेक्षता, भारत के जाति व्यवस्था पर विभिन्न धार्मिक आंदोलनों का बौद्ध-जैन-ईसाई-इस्लाम वृहत् समाज एवं आर्य समाज के आन्दोलनों के प्रभाव, बिहार में पश्चिमीकरण एवं आधुनिकीकरण, संयुक्तक एवं अलगाव सम्बन्धी कारक, भारतीय सामाजिक संगठन पर धर्म एवं राजनीति के बढ़ते अन्र्तसम्बन्ध का प्रभाव।

(8) जन-जाति समाज

भारत के प्रमुख जनजाति समुदाय, उनकी विशिष्ट विशेषताएँ, जन-जाति एवं जाति, इनका सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं एकीकरण, बिहार की जन-जातियों की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समस्याएँ, जन-जाति कल्याण के विभिन्न विचारधाराएँ, उनके संवैधानिक एवं राजकीय सुरक्षा, भारत में जन-जाति आन्दोलन, ताना भगत आन्दोलन, बिरसा आन्दोलन एवं झारखंड आन्दोलन, जन-जाति के विकास में उनका महत्वपूर्ण स्थान।

(9) ग्रामीण समाज व्यवस्था एवं सामुदायिक विकास

ग्रामीण समुदाय के सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयाम, पारम्परिक शक्ति संरचना, प्रजातंत्रीकरण एवं नेतृत्व, गरीबी, ऋणग्रस्तता एवं बंधुआ मजदूरी, भूमि सुधार के परिणाम, सामुदायिक विकास योजना कार्यक्रम तथा अन्य नियोजित विकास कार्यक्रम तथा हरित क्रांति, ग्रामीण विकास की नई नीतियाँ।

(10) शहरी सामाजिक संगठन

सामाजिक संगठन के पारम्परिक कारकों; जैसे- संगोत्रता जाति और धर्म की निरन्तरता एवं उनके परिवर्तन शहर के सन्दर्भ में, शहरी समुदायों में सामाजिक स्तरीकरण एवं गतिशीलता, नृजातिक अनेकता एवं सामुदायिक एकीकरण, शहरी पड़ोसदारी, जनसांख्यिकी एवं सामाजिक-सांस्कृतिक लक्षणों में शहर तथा गाँव में अन्तर तथा उनके सामाजिक परिणाम।

(11) जनसंख्या गतिकी

जनसंख्या वृद्धि सम्बन्धी सिद्धान्त- माल्थस, जैविकीय जनसांख्यिकीय परिवर्तन, सर्वाधिक जनसंख्या, जनसंख्या संरचना के सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष (लिंग, उम्र, वैवाहिक स्तर), जन्म दर, मृत्यु दर एवं स्थानान्तरण के कारक, भारत में जनसंख्या नीति की आवश्यकता, जनाधिक्य एवं अन्य निर्धारक तथ्य, जनाधिक्य के सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक निर्धारक एवं भारत में परिवार नियोजन प्रक्रिया की अस्वीकृति में इनकी भूमिका, प्रथम से अष्टम पंचवर्षीय योजनाओं में परिवार नियोजन कार्यक्रम का स्थान, जनसंख्या शिक्षा, अवधारणा, उद्देश्य, पक्ष, साधन एवं जनसंख्या शिक्षा की यत्रं कला।

(12) सामाजिक परिवर्तन एवं आधुनिकीकरण

भूमिका, संघर्ष की समस्या, युवा असतं ोष, पीढ़ियों का अन्तर, महिलाओं की बदलती स्थिति, सामाजिक परिवर्तन के प्रमुख स्रोत एवं परिवर्तन के प्रतिरोधी तत्वों के प्रमुख स्रोत, पश्चिम का प्रभाव, सुधारवादी आंदोलन, सामाजिक आंदोलन, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण, दबाव समूह, नियोजित परिवर्तन के तत्व, पंचवर्षीय योजनाएँ, विधायी एवं प्रशासकीय उपाय-परिवर्तन की प्रक्रिया- संस्कृतिकरण, पश्चिमीकरण और आधुनिकीकरण, आधुनिकीकरण के साधन, जनसम्पर्क साधन एवं शिक्षा, परिवर्तन एवं आधुनिकीकरण की समस्या, संरचनात्मक विसंगतियाँ और व्यवधान, वर्तमान सामाजिक दुर्गुण- भ्रष्टाचार और पक्षपात, तस्करी-कालाधन।

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