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[सिलेबस] मानव विज्ञान (वैकल्पिक विषय) – बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम BPSC Mains Syllabus

खण्ड- 1, खण्ड- 2 एवम् खण्ड- 3 के लिए (प्रत्येक के लिए) 100-100 अंक निर्धारित है।

खण्ड 1 तथा 3 अनिवार्य है, उम्मीदवार खण्ड- 2 (क) और खण्ड- 2 (ख) में से किसी एक को चुन सकते हैं।

खण्ड- 1 (Section – 1) मानव विज्ञान का आधार

(i) मानव विज्ञान का अर्थ तथा क्षेत्र और उसकी मुख्य शाखाएं-

(1) सामाजिक- सांस्कृतिक मानव विज्ञान
(2) भौतिक मानव विज्ञान
(3) पुरातत्व मानव विज्ञान
(4) भाषिक मानव विज्ञान
(5) व्यावहारिक मानव विज्ञान।

(ii) समुदाय एवं सामाजिक संस्थाएँ, समूह और संघ सांस्कृतिक और सभ्यता टोली और जनजातियाँ।

(iii) विवाह- सामान्य परिभाषा की समस्याएँ; ‘‘कौटुंबिक व्यभिचार तथा निषिद्ध वर्ग’’ विवाह के अधिमान्य स्वरूप, वधु मूल्य परिवार, मानव समाज की आधारशिला के रूप में सार्वभौमिकता और परिवार, परिवार के कार्य, परिवार के विविध स्वरूप, मूल परिवार, विस्तृत परिवार, संयुक्त परिवार आदि परिवार में स्थायित्व और परिवर्तन।

(iv) नातेदारी- अनुवंशक्रम, आवास, वैवाहिक नातेदारी सम्बन्ध और नातेदारी व्यवहार और गोत्र।

(iv) आर्थिक मानव विज्ञान- अर्थ और उसका क्षेत्र, विनिमय के साधन, वस्तु विनिमय और उत्सवी विनिमय, परस्परता और पुनः वितरण बाजार और व्यापार।

(v) राजनीतिक मानव विज्ञान अर्थ और क्षेत्र; विभिन्न समाजों में वैध प्राधिकारी की स्थिति तथा शक्ति एवं उसके कार्य। राज्य एवं राज्य विहीन राजनीतिक प्रणालियों में अन्तर। नये राज्यों में राष्ट्र निर्माण क्रिया में सरल समाज में कानून एवं न्याय।

(vi) धर्म की उत्पत्ति- जीववाद, प्राणवाद, धर्म एवं जादू में अन्तर, टोटमवाद और टेबू।

(vii) मानव विज्ञान में क्षेत्रगत कार्य तथा क्षेत्रगत कार्य की परम्पराएँ।

(viii) जनजातीय सामाजिक संगठनों के अध्ययन- भारतीय जनजातियों के युवागृह संगठन तथा उनके सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं धार्मिक संगठनों का अध्ययन। भारत की जनजातियों का अध्ययन; जैसे- उरांव, मूंडा, हो, संथाल तथा बिरहोर एवं बिहार के अन्य प्रजातियों के विभिन्न संगठनों का अध्ययन।

खंड- 2

खंड- 2 क (Section – 2 A)

(1) जैव विकास के सिद्वांत के आधार- लैमार्कवाद, डार्विनवाद और संश्लेषणात्मक सिद्धांतः मानव विकास जैविक और सांस्कृतिक आयाम व्यष्टि विकास।

(2)(क) मानव की उत्पत्ति एवं उद्विकास, पशु जगत में मनुष्य का स्थान। स्पीसीज (जाति विशेष) तथा जलीय प्राणी; जैसे- मंडूक के जन्तु, रेंगने वाले जन्तु, स्तनपायी जन्तु एवं मनुष्य आकार के विशालकाय जन्तु (एप्स)।
(ख) एप एवं मनुष्य के शारीरिक समानता तथा असमानताओं का तुलनात्मक अध्ययन। वानर एवं मानव उद्देश्य, वानरों (एप्स) की बुद्धि एवं सामाजिक जीवन का अध्ययन।

(3) प्राचीन मानव के प्रस्तरित अस्थि-अवशेषों के आधार पर मानव के शारीरिक विकास का अध्ययन। प्रस्तरित वानर लेम्युराइड्स, टामरिओड्स, पोरागपिथिक्स, प्रोफिलोपिथिक्स, प्लायोपिथिक्स, लेमनोपिथिक्स, प्रोकांसुल, ड्रायोपिथिक्स, रामापिथेक्स, आॅस्ट्रालोपिथिसिनिज, आॅस्ट्रालोपिथिक्स अफ्रिकन्स, प्लेसियनथ्रोपस, ट्रांसियलेंसिस, आस्ट्रेलोपिथिक्स, प्रोमेथियस, पैरान्थ्रोपस, रोवसट्स, होमिर्ट्स एवं होमोसेपियन्स का अध्ययन के आधार पर मनुष्य के विकास का विश्लेषण।

(4) आनुवंशिकी- परिभाषा, मेन्डेलियन सिद्धांत तथा उसके जनसंख्या से संबंधित प्रयोग।

(5)(क) मानव का प्रजातिगत भेद तथा प्रजातिगत वर्गीकरण के आधार रूप प्रक्रिया सम्बन्धी एवम् सीरम सम्बन्धी तथा आनुवंशिकी। प्रजातियों की रचना में अनुवंशिकता तथा वातावरण की भूमिका।
(ख) प्रजाति की परिभाषा, विशुद्ध प्रजाति की अवधारणा। प्रजाति राष्ट्र तथा बहुभाषी प्रजातिक समूह, प्रजाति एवं सांस्कृतिक विशेषताएँ तथा प्रजातिवाद का अध्ययन।
(ग) प्रजातिक वर्गीकरण के आधार एवं विशेषताएँ- चर्म के रंग, केश, ढांचा, खोपड़ी की बनावट, चेहरे की बनावट, नाक, आँख एवम् रक्त समूह के प्रकार का अध्ययन।

(6) मानव के आधुनिक प्रजातियों के विभिन्न प्रकार, विश्व के तीन प्रमुख प्रजाति एवं उनके अन्य उप प्रजातियों; जैसे- कांकोस्वायड्स एवम् इसकी उप प्रजातियाँ, आर्केइक कांकोस्वायड, मंगोल्वायड्स तथा इनके उप
प्रजातियाँ, निग्रो प्रजाति एवं उनके उप-प्रजाति, अमेरिका के निग्रो प्रजाति इत्यादि का उनके शारीरिक, वंश-परम्परागत गुणों एवं बुद्धि समानता तथा विषमताओं का अध्ययन।

(7) भारत की प्रजातियों के संबंध में रिजले, हेल्डन, इकटौड, गुहा तथा सरकार द्वारा प्रतिपादित वर्गीकरण एवं उनकी आलोचना। भारत में निग्रिटो प्रजाति के प्रजातिक गुणों की उपस्थिति।

खण्ड- 2 ख (Section – 2 B)

(1) तकनीक, पद्धति तथा प्रणाली विज्ञान में अन्तर।

(2) विकास का अर्थ जैविक तथा सामाजिक सांस्कृतिक- 19वीं शताब्दी के विकासवाद की आधारभूत मान्यताएँ। तुलनात्मक पद्धति विकासवादी अध्ययन की समकालीन प्रवृत्ति।

(3) विसरण और विसरणवाद- अमरीकी वितरण तथा जर्मन भाषी नृजाति वैज्ञानिकों की ऐतिहासिक नर-जाति मीमांसा विसरणवादी तथा फ्रेंच बोस द्वारा तुलनात्मक पद्धति पर आक्षेप। सामाजिक संस्कृति मानव विज्ञान की तुलना की प्रकृति उद्देश्य तथा पद्धतियाँ रेडक्लिप-ब्राउन, इगन-ओस्कर लेबिस तथा सरना।

(4) प्रतिमान आधारभूत व्यक्तित्व रचना तथा आदर्श व्यक्तित्व। राष्ट्रीय चरित्र अध्ययन के मानव विज्ञान दृष्टिकोण की प्रासंगिकता। मनोवैज्ञानिक मानव विज्ञान की नूतन प्रवृत्तियाँ।

(5) कार्य तथा कारण- सामाजिक मानव विज्ञान में प्रकीर्णवाद में मौलिनोस्की का योगदान, कार्य और संरचना, रेडक्लिप ब्राउन, फर्थ फोर्टेस तथा नेडल।

(6) भाषिक तथा सामाजिक मानव विज्ञान में सरं चनावाद लेवस्टेªस तथा लीच के विचार से आदर्श के रूप में सामाजिक संरचना मिथिक के अध्ययन में संरचनावादी पद्धति। नवीन नृजाति विज्ञान तथा तात्विक अर्थपरक विश्लेषण।

(7) मानदण्ड तथा मूल्य। मूल्यों के रूप में मानव वैज्ञानिक वर्णन का कोटि के रूप में मूल्य। मूल्यों के स्रोत के रूप में मानव विज्ञानी तथा मानव विज्ञान के मूल्य। सांस्कृतिक सापेक्षवाद तथा सार्वभौमिक मूल्यों के विषय।

(8) सामाजिक मानव विज्ञान तथा इतिहास। वैज्ञानिक तथा मानवतावादी अध्ययन में अन्तर प्राकृतिक तथा सामाजिक विज्ञान की पद्वतियों में एकता लाने के तर्क का आलोचनात्मक परीक्षण। मानव विज्ञानी की क्षेत्रगत कार्य पद्धति की युक्तियुक्त तथा इसकी स्वायतता।

(9)(क) मानवशास्त्र के सिद्धांत एवं विधियाँ- विकासवाद तथा तुलनात्मक विधियाँ, हर्वर्ट सपेन्सर, एल॰एच॰ मार्गन, एडवर्ड बर्नेट टायलर द्वारा प्रतिपादित सिद्वांत एवं उनकी सीमायें।
(ख) विशिष्टतावाद- फ्रेन्ज वोयस, ए॰एल॰ क्रोवर, रूथ बेनेडिक्ट, राल्फ लिन्टन एवं ऐव्राम कार्डिनर, विशिष्टतावाद सिद्धांत की सीमाएँ।
(ग) संरचनावाद- प्रकार्यवाद सिद्धांत, इमायल दुर्खेम, ब्राउनिस्लों मैलिनोअस्की, ए॰आर॰ रेडक्लिफ ब्राउन, लेसली ए॰ वाइट, इभान्स प्रीचर्ड एवं लेभी स्ट्रोस।

(10) योजना तथा विकास के क्षेत्र में मानवशास्त्र तथा विकास से संबंधित अध्ययनों का योगदान। नियोजित उन्नति के सामाजिक सांस्कृतिक पहलू, निर्धारित परिवर्तन के सामाजिक, सांस्कृतिक मापक राशि, भारतीय जन-जातियों के औद्योगिक विकास की सांस्कृतिक बाधाएँ। जन-जातीय समस्याएँ- कारण, परिणाम एवं समाधान।

(11) जन-जातीय आन्दोलन तथा सामाजिक आन्दोलन परिभाषा एवं विशेषताएँ। बिहार में जन-जातीय आंदोलन- ताना भगत आन्दोलन एवं विरसा आंदोलन, बिहार में जन-जातीय आन्दोलन के बदलते स्वरूप। बिहार में जन-जातीय नायकत्व।

खण्ड- 3 (Section – 3) भारतीय मानव विज्ञान

पुरापाषाण, मध्य पाषाण, नवपाषाण आद्य ऐतिहासिक (सिंधु घाटी सभ्यता) भारतीय सांस्कृतिक आयाम। भारत की जनसंख्या में जातीय तथा भाषायी तत्वों का वितरण।

भारतीय सामाजिक व्यवस्था के आधार, वर्ण, आश्रम, पुरूषार्थ, जाति, संयुक्त परिवार।

भारतीय मानव विज्ञान का विकास। भारतीय जनजाति तथा कृषक समुदाय के अध्ययन में मानव वैज्ञानिक योगदान की विशिष्टता आधारभूत अवधारणाएँ, महान परम्पराएँ तथा लघु परम्पराएँ, पवित्र संकुल, सार्वभौमिकरण तथा अनुदारवाद संस्कृतिकरण तथा पश्चिमीकरण, प्रभावी जाति, जन-जाति-जाति सातत्यक, प्रकृति पुरूष आत्मसम्मिश्र।

भारतीय जन-जातियों के नृजाति का वर्णन रूप रेखा जातीय, भाषायी तथा सामाजिक, आर्थिक विशिष्टताएँ।

जन-जातीय लोगों की समस्याएँ- भूमि स्वतः अंतरण ऋणग्रस्तता, शैक्षिक सुविधाओं का अभाव, अस्थिर कृषि प्रवसन, धन तथा जन-जातियों की बेरोजगारी, खेतिहर मजदूर शिकार तथा आधार संग्रह की विशेष समस्याएँ एवं अन्य गौण जन-जातियाँ।

संस्कृति-सम्पर्क की समस्याएं- शहरीकरण तथा औद्योगिकीकरण का प्रभाव, जनसंख्या ह्रास, क्षेत्रीयता, आर्थिक तथा मनोवैज्ञानिक कुंठा।

जन-जातीय प्रशासन का इतिहासः अनुसूचित जन-जातियों के लिए संवैधानिक सुरक्षा नीतियों, योजनाएँ जन-जातीय विकास के लिए नीतियाँ, योजनाएँ और कार्यक्रम तथा उनका कार्यान्वयन। जन-जातीय लोगों के लिए किये जा रहे सरकारी कार्य की उन पर प्रतिक्रिया। जन-जातीय समस्याओं के प्रति विभिन्न दृष्टिकोण, जन-जातीय विकास में मानव विज्ञान की भूमिका।

अनुसूचित जातियों से संबंधित संवैधानिक व्यवस्थाएँ। अनुसूचित जातियों द्वारा भोगी गई सामाजिक अशक्तता तथा उनकी सामाजिक आर्थिक समस्याएँ।

राष्ट्रीय अखंडता से सम्बद्ध विषय।

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