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मैक्स वेबर का समाजशास्त्र में योगदान

Maximilian Carl Emil "Max" Weber एक जर्मन समाजशास्त्री और राजनीतिक अर्थशास्त्री थे। इनका समय काल 21 अप्रैल 1864 से 14 जून 1920 था। इन्हें आधुनिक समाजशास्त्र के जन्मदाताओं में से एक भी माना जाता है। मैक्स वेबर की प्रमुख रचनायें थी:-

ग्रामीण समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र (Subject area of ​​Rural Sociology)

लारी नेल्सन ने ग्रामीण समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र के संबंध में लिखा है कि "यह केवल सामुदायिक जीवन के क्षेत्रों में और क्षेत्रों के समझे गए समतल रूप को चित्र वर्णन मात्र नहीं समझता बल्कि संबंध के अनगिनत रूपों को आकाशीय ढांचे में सन्निहित कर लेता है।

सामाजिक समूह (Social Group)

हम में से प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी परिवार, पड़ोस, मोहल्ले, गांव अथवा नगर का सदस्य होता है। व्यवसायिक आधार पर हम में से कई व्यक्ति, डॉक्टर, इंजीनियर, कृषक, अध्यापक, मजदूर, कलाकार, क्लर्क या व्यापारी समूह के सदस्य होते हैं। उम्र के आधार पर व्यक्ति बच्चों, युवा,...

समाजशास्त्र में विवाह प्रथा (Marriage system in Sociology)

भारत में जितने भी सामाजिक संस्थाएं हैं उनमें हिंदू विवाह विशेष महत्व रखता है। विवाह की अनुपस्थिति में परिवार की कल्पना नहीं की जा सकती। विवाह की प्रकृति परिवार की संरचना को निर्धारित और निश्चित करती है। परिवारों की संरचना विवाह के विभिन्न प्रकार और उसके नियमों...

सामाजिक मानवशास्त्र का अर्थ एवं विषय वस्तु (Meaning and Subject Matter of Social Anthropology)

सामाजिक मानवशास्त्र समाज एवं सामाजिक संरचना के अध्ययन से संबंधित है। समाज का अर्थ है विभिन्न प्रकार के संस्थागत व्यवहारों के द्वारा बंधे हुए लोगों का जाल। मनुष्य का व्यवहार विभिन्न संस्थागत संबंधों से बंधा होता है। यह संस्थागत संबंध एवं व्यवस्था ही सामाजिक मानव शास्त्र की...

ग्रामीण समाजशास्त्र की अवधारणा (Concept of Rural Sociology)

मानव समाज के विकास में समाज के मुख्यतः तीन स्तर सामने आते हैं।1.जनजातीय स्तर2.ग्रामीण स्तर3.नगरीय स्तर यह तीनों स्तर समाज में रहकर तीन प्रकार के समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन सभी समाजों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। अपनी-अपनी कार्यपद्धती है। अपना विशिष्ट पर्यावरण...

समाजशास्त्र में सामाजिक व्यवस्था (Social Systems in Sociology)

पैरेट ने समाज के विभिन्न अंगों के बीच पाई जाने वाली अंतः क्रिया को सामाजिक व्यवस्था के नाम से संबोधित किया है। वेबर और पारसन्स ने सामाजिक व्यवस्था का तात्पर्य एक ऐसे संतुलन से किया है जिसका निर्माण विभिन्न सामाजिक इकाइयों की परस्पर संबंधित क्रियाओं से होता...

मैक्स वेबर द्वारा धर्म का सिद्धांत (Max Weber’s Doctrine of Religion)

मैक्स वेबर ने धर्म का सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया है। इनके अध्ययन के पश्चात ही समाजशास्त्र में धर्म का अध्ययन गहराई से किया जाने लगा और अंततः "धर्म के समाजशास्त्र (sociology of religion)" ने समाजशास्त्र के अंतर्गत एक स्वतंत्र शाखा के रूप में जन्म...

सामाजिक अनुसंधान में उपकल्पना (Hypothesis in Social Research)

गुड और स्केट्स ने अपनी पुस्तक "मेथड्स ऑफ रिसर्च" (1958) में कहते हैं, "उपकल्पना एक अनुमान है जिसे अंतिम अथवा अस्थाई रूप में किसी निरीक्षक तथ्य अथवा दशाओं की व्याख्या हेतु स्वीकार किया गया हो एवं जिससे अन्वेषण को आगे पथ प्रदर्शन प्राप्त होता हो।"

ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व

भारत गांवों का देश है। प्रोफेसर ब्लॉथ के अनुसार "भारत गांव का एक अति उत्कृष्ट देश है" भारतीय समाज में ग्रामीण संस्कृति, कृषि, पशुपालन आदि बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं इसीलिए ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व भारत में अत्यधिक है। ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व इसलिए भी अन्य शास्त्रों...

भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) | BPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा

इस लेख का उद्देश्य है कि परीक्षार्थियों को भारतीय राजव्यवस्था के सभी महत्वपूर्ण टॉपिक पढ़ा दिया जाए. अगर आप इस लेख को पूरा पढ़ लेते हैं तो आपको भारतीय राजव्यवस्था के तैयारी के लिए किसी भी अन्य किताब को पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. BPSC के परीक्षार्थियों...

राजनीति का अपराधीकरण

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 में, सिद्धदोष नेताओं को चुनाव लड़ने के अयोग्य माना है। लेकिन मुकदमे का सामना करने वाले, चाहे कितने भी गंभीर आरोप हों, चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। देश भर में 1765 एमपी और एमएलए के खिलाफ 3800 से अधिक आपराधिक...

पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली भारतीय नदियाँ

पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली प्रायद्वीपीय भारत की नदियां, पूर्व में प्रवाहित नदियों की अपेक्षा छोटी है तथा यह रिफ्ट घाटी से होकर प्रवाहित होती है. जिसका प्रमुख कारण हिमालय निर्माण के समय उतरी प्रायद्वीपीय भाग झुक जाना है. पश्चिम की ओर प्रवाहित मुख्य नदियां नर्मदा,...

किसानों के पास विरोध का संवैधानिक अधिकार

हाल ही में तीन कृषि बिलों के मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि किसानों के पास इस मामले पर विरोध का संवैधानिक अधिकार है, जब तक कि वे किसी प्रकार की जानमाल को क्षति ना पहुंचाएं. भारतीय संविधान में...

आधुनिक दासता क्या है? इसका उन्मूलन किस प्रकार किया जा सकता है?

आधुनिक दासता शोषण की उन स्थितियों को संदर्भित करती है जिसमें कोई व्यक्ति धमकी, हिंसा, उत्पीड़न, छल या प्राधिकार के दुरुपयोग के कारण बाहर नहीं निकल पाता है. ग्रेस फॉरेस्ट ने कहा कि जहां एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का आर्थिक या स्वंय के लाभ के लिए शोषण...

RBI की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) क्या होता है?

यह बैंकिंग सिस्टम में सुधार के उद्देश्य से आरबीआई द्वारा किया गया एक पहल है. इसके अंतर्गत आरबीआई भारत में कार्यरत सभी बैंक पर कड़ी निगरानी रखती है. आरबीआई इस उद्देश्य से बैंक की जमा राशि, परिसंपत्ति, राजस्व आय, लाभांश इत्यादि का मूल्यांकन करती है एवं इसे...

बिहार में राइट टू सर्विस एक्ट

आम जनता का यह अधिकार कि वह कुछ सार्वजनिक सेवाओ को तय समयावधि में पाने का हक रखती है - 'सेवा का अधिकार' कहलाता है। इसके तहत तय समयसीमा में काम का निबटारा करना सम्बंधित अधिकारियों की बाध्यता होती है। समयसीमा के अंदर सेवा नहीं उपलब्ध करानेवाले...

बिहार की आर्थिक विकास की क्या संभावनाएं हैं?

बिहार के आर्थिक रूप से पिछड़े होने के बावजूद बिहार में विकास की असीम संभावनाएं हैं जिनको उचित प्रबंधन द्वारा दूर किया जा सकता है जिसके लिए सरकार प्रयासरत है. कृषि तथा उर्जा क्षेत्र में विकास इस प्रकार बिहार...

बिहार का आर्थिक पिछड़ापन के क्या कारण हैं?

प्राचीन काल से ही बिहार ने लोकतंत्र, शिक्षा, राजनीति, धर्म एवं ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में देश को ही नहीं बल्कि दुनिया को मार्गदर्शन देने का कार्य किया है. लोकतंत्र के क्षेत्र में प्रसिद्ध लिच्छवी गणतंत्र और शिक्षा जगत में नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष आज...

नेहरू के सामाजिक राजनैतिक और आर्थिक चिंतन का विवरण दें.

स्वाधीन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में आधुनिक भारत के स्वतंत्र विकास की दिशा में जवाहरलाल नेहरू ने काफी कार्य किया जो कि सराहनीय है । शोषण से मुक्त एक नए भारत के निर्माण के लिए और साम्राज्यवाद के उत्पीड़न से मुक्त एक नए विश्व के...

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[सिलेबस] भूगोल (वैकल्पिक विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - भूगोल (वैकल्पिक विषय) खण्ड- I (Section - I) भूगोल का सिद्धान्त (Theory of Geography) भाग ‘‘क’’ (Part - A) भौतिक भूगोल (Physical Geography) 1. भू-आकृति...

[सिलेबस] मैथिली भाषा और साहित्य (वैकल्पिक विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - मैथिली भाषा और साहित्य (वैकल्पिक विषय) खण्ड- I (Section - I)भाग- 01. मैथिली भाषाक इतिहासः-(1) मैथिली भाषाक उद्गम।(2) भारोपीय भाषा परिवार में मैथिलीक स्थान।(3) मैथिली भाषाक ऐतिहासिक विकासक्रम।(4) हिन्दी, बंगला, भोजपुरी, मगही एवम् संथाली भाषाक संग...

[सिलेबस] सामान्य हिन्दी (अनिवार्य विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - सामान्य हिन्दी (अनिवार्य विषय) इस पत्र में प्रश्न बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यमिक (सेकेण्डरी) स्तर के होंगे। इस परीक्षा में सरल हिन्दी में अपने भावों को स्पष्टतः एवं शुद्ध-शुद्ध रूप में व्यक्त करने की क्षमता...