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BPSC मुख्य परीक्षा

भारत के राष्ट्रपति

भारत के राष्ट्रपति, भारत गणराज्य के कार्यपालक अध्यक्ष होते हैं। संघ के सभी कार्यपालक कार्य उनके नाम से किये जाते हैं। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति उनमें निहित हैं। वह देश के प्रथम नागरिक हैं। राष्ट्रपति अधिकतम कितनी भी बार पद पर रह सकते...

बिहार में बाढ़ की समस्या (Flood problem in Bihar)

बिहार भारत के प्रमुख आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में से एक है। इस प्रदेश में गंगा मैदान से सटे मैदानी भागों में प्रतिवर्ष बाढ़ आती है। गंगा के मैदान में स्थित बिहार एक बाढ़ प्रभावित राज्य है। जिसके 37 में से 24 जिले और कुल...

बिहार से मानसून का लौटना (Returning of Monsoon from Bihar)

बिहार राज्य के मध्यवर्ती भाग में वर्षा 120 से 150 सेंटीमीटर तक होती है। गंगा के दोनों और पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा की मात्रा घटती जाती है। मध्य सितंबर तक सूर्य की किरणें लंब रूप से विश्वत रेखा के निकट पड़ने लगती हैं परिणाम स्वरूप...

बिहार पर पूर्व मानसूनी वर्षा का आगमन (Arrival of Pre-monsoon rains in Bihar)

बिहार में वर्षा ऋतु मध्य जून से अक्टूबर तक पाई जाती है। बिहार में मई तक ग्रीष्म ऋतु ऊंचे तापमान वाली और वर्षा रहित होती है। तापमान अपनी चरम सीमा तक पहुंच जाता है। इस समय गंगा के डेल्टा तथा उत्तरी पूर्वी क्षेत्र...

बिहार की जलवायु (Climate of Bihar)

बिहार प्रदेश के भौगोलिक अध्ययन में जलवायु एक महत्वपूर्ण कारक है यह बिहार की प्राकृतिक वनस्पति जीव जंतु मिट्टी इत्यादि को प्रभावित करती है। भारत के पूर्वी भाग में स्थित बिहार की जलवायु उष्ण आद्र् मानसूनी है। बिहार पश्चिम बंगाल की उष्ण आर्द्र और...

बिहार में वर्षा का वितरण (Distribution of Rainfall in Bihar)

पूरे बिहार राज्य में वर्षा एक सामान वितरित नहीं होती है। यहां 100 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर तक वर्षा होती है। सबसे अधिक वर्षा राज्य के उत्तरी पूर्वी भाग जैसे किशनगंज तथा उत्तरी पश्चिमी भाग जैसे कि पश्चिमी चंपारण में होती है। तीन भागों...

उत्तर और दक्षिण बिहार में बाढ़ की स्थिति ( Flood situation in North and South Bihar)

उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति:दरभंगा सहरसा वैशाली कटिहार और भागलपुर ऐसे जिले हैं जहां 100000 से 300000 हेक्टेयर भू भाग बाढ़ प्रभावित है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, अररिया और बेगूसराय जिलों में से 50000 से 100000 हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित रहती है। सीतामढ़ी, मधुबनी,...

नगरीय समाजशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Urban Sociology)

नगरीय समाजशास्त्र नगर से संबंधित है। यह नगरों की विशिष्ट जीवन पद्धति का व्यवस्थित एवं प्रबंध अध्ययन है। यह नगरीय पर्यावरण के सामाजिक सांस्कृतिक प्रयासों, संबंधों और नगरीय सभ्यता आदि का अध्ययन है। प्रसिद्ध अमेरिकीशास्त्री 'रॉबर्ट पार्क' नगरीय समाजशास्त्र के जनक माने जाते...

अपराध के समाजशास्त्रीय सिद्धांत (Sociological Theory of Crime)

समाजशास्त्रीय अपराधिक प्रमाणवाद के अनुसार सामाजिक घटनाएं उतनी ही वास्तविक होती हैं जितना कि मनुष्य का व्यवहार और भौतिक तत्व जो मनुष्य के सामाजिक अस्तित्व को प्रभावित करते हैं। अर्थात भौतिक तत्व मनुष्य के मन पर प्रभाव डालते हैं और वे सामाजिक घटनाओं के घटने का कारण...

ग्रामीण समाजशास्त्र की उत्पत्ति

19वीं शताब्दी के अंत में और बीसवीं शताब्दी के आरंभ में अमेरिका में औद्योगिकीकरण और नगरीकरण की प्रक्रिया ने ग्रामीण समस्याओं को जन्म दिया इसमें अनेक समस्याओं को उत्पन्न किया जिसमें थे भूमि की कमी भूमि की उपजाऊ शक्ति की कमी, छिपी बेरोजगारी, गरीबी श्रमिकों की गतिशीलता...

मैक्स वेबर का समाजशास्त्र में योगदान

Maximilian Carl Emil "Max" Weber एक जर्मन समाजशास्त्री और राजनीतिक अर्थशास्त्री थे। इनका समय काल 21 अप्रैल 1864 से 14 जून 1920 था। इन्हें आधुनिक समाजशास्त्र के जन्मदाताओं में से एक भी माना जाता है। मैक्स वेबर की प्रमुख रचनायें थी:-

ग्रामीण समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र (Subject area of ​​Rural Sociology)

लारी नेल्सन ने ग्रामीण समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र के संबंध में लिखा है कि "यह केवल सामुदायिक जीवन के क्षेत्रों में और क्षेत्रों के समझे गए समतल रूप को चित्र वर्णन मात्र नहीं समझता बल्कि संबंध के अनगिनत रूपों को आकाशीय ढांचे में सन्निहित कर लेता है।

सामाजिक समूह (Social Group)

हम में से प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी परिवार, पड़ोस, मोहल्ले, गांव अथवा नगर का सदस्य होता है। व्यवसायिक आधार पर हम में से कई व्यक्ति, डॉक्टर, इंजीनियर, कृषक, अध्यापक, मजदूर, कलाकार, क्लर्क या व्यापारी समूह के सदस्य होते हैं। उम्र के आधार पर व्यक्ति बच्चों, युवा,...

समाजशास्त्र में विवाह प्रथा (Marriage system in Sociology)

भारत में जितने भी सामाजिक संस्थाएं हैं उनमें हिंदू विवाह विशेष महत्व रखता है। विवाह की अनुपस्थिति में परिवार की कल्पना नहीं की जा सकती। विवाह की प्रकृति परिवार की संरचना को निर्धारित और निश्चित करती है। परिवारों की संरचना विवाह के विभिन्न प्रकार और उसके नियमों...

सामाजिक मानवशास्त्र का अर्थ एवं विषय वस्तु (Meaning and Subject Matter of Social Anthropology)

सामाजिक मानवशास्त्र समाज एवं सामाजिक संरचना के अध्ययन से संबंधित है। समाज का अर्थ है विभिन्न प्रकार के संस्थागत व्यवहारों के द्वारा बंधे हुए लोगों का जाल। मनुष्य का व्यवहार विभिन्न संस्थागत संबंधों से बंधा होता है। यह संस्थागत संबंध एवं व्यवस्था ही सामाजिक मानव शास्त्र की...

ग्रामीण समाजशास्त्र की अवधारणा (Concept of Rural Sociology)

मानव समाज के विकास में समाज के मुख्यतः तीन स्तर सामने आते हैं।1.जनजातीय स्तर2.ग्रामीण स्तर3.नगरीय स्तर यह तीनों स्तर समाज में रहकर तीन प्रकार के समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन सभी समाजों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। अपनी-अपनी कार्यपद्धती है। अपना विशिष्ट पर्यावरण...

समाजशास्त्र में सामाजिक व्यवस्था (Social Systems in Sociology)

पैरेट ने समाज के विभिन्न अंगों के बीच पाई जाने वाली अंतः क्रिया को सामाजिक व्यवस्था के नाम से संबोधित किया है। वेबर और पारसन्स ने सामाजिक व्यवस्था का तात्पर्य एक ऐसे संतुलन से किया है जिसका निर्माण विभिन्न सामाजिक इकाइयों की परस्पर संबंधित क्रियाओं से होता...

मैक्स वेबर द्वारा धर्म का सिद्धांत (Max Weber’s Doctrine of Religion)

मैक्स वेबर ने धर्म का सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया है। इनके अध्ययन के पश्चात ही समाजशास्त्र में धर्म का अध्ययन गहराई से किया जाने लगा और अंततः "धर्म के समाजशास्त्र (sociology of religion)" ने समाजशास्त्र के अंतर्गत एक स्वतंत्र शाखा के रूप में जन्म...

सामाजिक अनुसंधान में उपकल्पना (Hypothesis in Social Research)

गुड और स्केट्स ने अपनी पुस्तक "मेथड्स ऑफ रिसर्च" (1958) में कहते हैं, "उपकल्पना एक अनुमान है जिसे अंतिम अथवा अस्थाई रूप में किसी निरीक्षक तथ्य अथवा दशाओं की व्याख्या हेतु स्वीकार किया गया हो एवं जिससे अन्वेषण को आगे पथ प्रदर्शन प्राप्त होता हो।"

ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व

भारत गांवों का देश है। प्रोफेसर ब्लॉथ के अनुसार "भारत गांव का एक अति उत्कृष्ट देश है" भारतीय समाज में ग्रामीण संस्कृति, कृषि, पशुपालन आदि बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं इसीलिए ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व भारत में अत्यधिक है। ग्रामीण समाजशास्त्र का महत्व इसलिए भी अन्य शास्त्रों...

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बिहार का आर्थिक पिछड़ापन के क्या कारण हैं?

प्राचीन काल से ही बिहार ने लोकतंत्र, शिक्षा, राजनीति, धर्म एवं ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में देश को ही नहीं बल्कि दुनिया को मार्गदर्शन देने का कार्य किया है. लोकतंत्र के क्षेत्र में प्रसिद्ध लिच्छवी गणतंत्र और शिक्षा जगत में नालंदा एवं विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेष आज...

[सिलेबस] भूगोल (वैकल्पिक विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - भूगोल (वैकल्पिक विषय) खण्ड- I (Section - I) भूगोल का सिद्धान्त (Theory of Geography) भाग ‘‘क’’ (Part - A) भौतिक भूगोल (Physical Geography) 1. भू-आकृति...

[सिलेबस] मैथिली भाषा और साहित्य (वैकल्पिक विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम - मैथिली भाषा और साहित्य (वैकल्पिक विषय) खण्ड- I (Section - I)भाग- 01. मैथिली भाषाक इतिहासः-(1) मैथिली भाषाक उद्गम।(2) भारोपीय भाषा परिवार में मैथिलीक स्थान।(3) मैथिली भाषाक ऐतिहासिक विकासक्रम।(4) हिन्दी, बंगला, भोजपुरी, मगही एवम् संथाली भाषाक संग...

RBI की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) क्या होता है?

यह बैंकिंग सिस्टम में सुधार के उद्देश्य से आरबीआई द्वारा किया गया एक पहल है. इसके अंतर्गत आरबीआई भारत में कार्यरत सभी बैंक पर कड़ी निगरानी रखती है. आरबीआई इस उद्देश्य से बैंक की जमा राशि, परिसंपत्ति, राजस्व आय, लाभांश इत्यादि का मूल्यांकन करती है एवं इसे...