Home BPSC सिविल सेवा नोट्स बिहार मधनिषेध और उत्पाद अधिनियम 2016

बिहार मधनिषेध और उत्पाद अधिनियम 2016

2 अक्टूबर 2016 को बिहार में शराब और मादक द्रव्य के पूर्ण मधनिषेध को लागू करने के लिए और इससे जुड़े अथवा इसके अनुषांगिक विषयों के लिए बिहार मधनिषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 बनाया गया है.


 इस अधिनियम के अनुसार राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा ऐसी वस्तुओं अथवा रासायनिक घटक, जो अल्कोहल के प्रतिस्थानी के तौर पर प्रयुक्त होते इनको मादक द्रव्य घोषित कर सकेगी. राज्य सरकार की अधिसूचना से उत्पाद आयुक्त की नियुक्ति हो सकेगी, जो इस अधिनियम के प्रबंध के लिए उत्तरदाई होगा.

 
जिले का कलेक्टर अपनी अधिकारिता वाले क्षेत्र में पूर्ण मधनिषेध लागू करने और इस अधिनियम के प्रबंध को सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होगा. जिले में पुलिस अधीक्षक पूर्ण मधनिषेध सुनिश्चित करने में कलेक्टर की सहायता करेगा.


 कोई व्यक्ति किसी मादक द्रव्य अथवा शराब का विनिर्माण, बोतल बंदी,वितरण, वहन, संग्रह,भण्डारण,कब्ज़ा, खरीद, बिक्री अथवा उपभोग नहीं करेगा परंतु राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन अधिसूचना द्वारा किसी शराब या मादक द्रव्यों के बनाने, समिश्रित करने, मिश्रण करने, बोतलबंदी करने, भंडारित करने, आयात करने और निर्यात करने की मौजूद अनुज्ञप्ति को नवीकृत करने की अनुमति दे सकेगी.

 
जो कोई इस अधिनियम के उल्लंघन में किसी स्थान में शराब अथवा मादक द्रव्य का उपयोग करता है या नशे में अथवा मदहोश की अवस्था में पाया जाता है, उसको कम से कम 5 वर्षों का कारावास, जिसे बढ़ाकर 7 वर्षों तक किया जा सकेगा और जुर्माना, जो कम से कम ₹1 लाख का होगा, जिसे बढ़ाकर ₹10 लाख किया जा सकता है. यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम का उल्लंघन करने में शराब पीकर और नशे की अवस्था में किसी स्थान पर उपद्रव करता है, जिसमें उसका अपना घर एवं परिसर शामिल है, या नशे की अनुमति देता है, या अपने स्वयं के घर में नशेड़ियो को जमा होने की अनुमति देता है, तो उसको कम से कम 10 वर्षों का कारावास, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकेगा और जुर्माना कम से कम ₹1 लाख का होगा जिसे बढ़ाकर ₹10 लाख किया जा सकता है. ऐसे दंड का भागी होगा.


 यदि कोई रासायनज्ञ, औषधि विक्रेता, औषधालय का रक्षक किसी व्यक्ति को अपने कारोबारी परिसर में राज्य सरकार द्वारा घोषित मादक द्रव्यों  को औषधीय प्रयोजनों के लिए,  प्रमाणिक रूप से औषधीय गुणों से युक्त नहीं है, के उपयोग की अनुमति देता है, तो वह कम से कम 8 वर्षों के कारावास जिसे बढ़ाकर 10 वर्षों तक किया जा सकता है और जुर्माना जो कम से कम ₹1 लाख तक होगा जिसे बढ़ाकर ₹10 लाख तक किया जा सकता है.

 
कोई मीडिया जिसमें फिल्म एवं टेलीविजन शामिल है अथवा किसी सामाजिक मंच से कोई प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्षतः किसी शराब अथवा मादक द्रव्य के प्रयोग की याचना करने वाली किसी चीज को प्रकाशित करता है, अथवा विज्ञापन देता है तो वह कम से कम 3 वर्षों के कारावास, जिसे बढ़ाकर 5 वर्षों तक किया जा सकता है अथवा जुर्माना दोनों के लिए दंडनीय होगा.

 
इस अधिनियम के अधीन स्वीकृत अथवा निर्गत अनुज्ञप्ति अथवा परमिट का धारक होने पर अगर किसी उत्पाद पदाधिकारी द्वारा परमिट के कागजात मांग लिए जाने पर परमिट प्रस्तुत करने में वह व्यक्ति असफल हो या परमिट की शर्तों का उल्लंघन करता हो तो उनको कम से कम ₹1 लाख के जुर्माने जिसे बढ़ाकर ₹10 लाख तक किया जा सकता है का प्रावधान है.

 
कोई व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु के किसी अवयस्क व्यक्ति अथवा महिला को शराब, मादक द्रव्य को छुपाने, बिक्री करने, तथा वितरण करने के प्रयोजन से नियोजित करता है तो वह कम से कम 10 वर्ष के कारावास से, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकेगा तथा जुर्माने से जो कम से कम ₹1 लाख होगा जिसे बढ़ाकर ₹10 लाख तक किया जा सकेगा अथवा दोनों से दंडनीय होगा.


 यदि कोई उत्पाद पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, या कोई अन्य व्यक्ति शक करने के समुचित आधार के बिना परेशान करने के उद्देश्य से इस अधिनियम द्वारा प्रदत किसी शक्ति के उपयोग का बहाना बनाकर किसी बंद स्थल में प्रवेश करता है या तलाशी लेता है या प्रवेश कराता है या तलाशी कराता है तो वह कारावास का भागी होगा. जिसकी अवधि 3 वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी या दोनों का भागी होगा.

यदि कलेक्टर को किसी उत्पाद पदाधिकारी या पुलिस पदाधिकारी या अन्यथा के प्रतिवेदन से समाधान हो जाता है कि कोई गांव या शहर विशेष या किसी गांव या शहर के भीतर का इलाका या उस गांव या शहर में रह रहा कोई समूह या समुदाय विशेष इस अधिनियम के उपबंधों का बार-बार उल्लंघन कर रहा है, तब कलेक्टर आदेश द्वारा ऐसे इलाके में रहने वाले ऐसे जनसमूह पर यथोचित सामूहिक जुर्माना लगा सकेगा.

इस अधिनियम के अधीन दंडनीय सभी अपराधों का विचारण सत्र न्यायालय द्वारा किया जाएगा. राज्य सरकार यदि लोकहित में आवश्यक समझती है तो इस अधिनियम के अधीन सभी अपराधों या उनमें से किसी अपराध पर विचारण के प्रयोजनार्थ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से राज्य के प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालय स्थापित कर सकेगी.

इस अधिनियम को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी, जिसे वह कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक समझे.

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