Home BPSC सिविल सेवा नोट्स बिहार की वित्तव्यवस्था

बिहार की वित्तव्यवस्था

परिचय

संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा प्राप्त समस्त राजस्व, इसके द्वारा प्राप्त सारे ऋण और ऋण अदायगी के रूप में प्राप्त सारी रकम को उसकी संचित निधि में रखा जाता है. बिहार सरकार का वित्त विभाग राज्य का वित्तीय प्रशासन देखता है. यह उन सभी वित्तीय मामलों में से सम्बंधित है जिनका प्रभाव पूरे राज्य पर पड़ता है. इसमें विकास और अन्य कार्यों के लिए संसाधन जुटाना भी शामिल है. यह राज्य सरकार के व्यय का नियमन करता है, जिसमें ग्रामस्तर तक को हस्तांतरित किए जाने वाले संसाधन भी शामिल हैं. संविधान के अनुच्छेद 202 के तहत प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए राज्य सरकार के अनुमानित आय अथवा प्राप्तियों एवं व्यय का विवरण विधानसभा के सामने प्रस्तुत करना होता है. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तथा संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बिहार की वित्त व्यवस्था संचालित है.


वित्तीय व्यवस्था संबंधी संवैधानिक प्रावधान


अनुच्छेद 202 : राज्य सरकारों द्वारा वित्तीय ब्यौरा प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है. इसे वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है. इसे सामान्य बजट भी कहा जाता है.

अनुच्छेद 267 : राज्य का विधान मंडल, विधि द्वारा, अग्रदाय के स्वरूप की एक आकस्मिकता निधि की स्थापना कर सकेगा. जो राज्य का आकस्मिकता निधि के नाम से ज्ञात होगी.

अनुच्छेद 269 : केंद्र द्वारा लेवी परंतु पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से राज्यों को वितरित.

अनुच्छेद 270 : संघ द्वारा राज्यों में आयकर का अनिवार्य बंटवारा

अनुच्छेद 275 : संघ से सहायता अनुदान प्राप्त करने का राज्यों को वैधानिक अधिकार, यदि संसद सहायता की अनुशंसा करें.

अनुच्छेद 282 : सार्वजनिक कार्य हेतु अनुदान.

अनुच्छेद 283(2) : राज्य की संचित निधि और आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा.

प्राप्तियाँ एवं उसका रखरखाव

  • राज्य सरकार अपने संसाधन अपने कर और गैर कर राजस्व, केंद्रीय करों को विभाज्य पूल में अपने हिस्से, योजना एवं गैर योजना प्रयोजनों के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदानों, बाजार से लिए गए ऋण और अन्य उधारियों से प्राप्त करती है ,जिसमें मुख्य रूप से राज्य सरकार के लेखे में रखे जाने वाले भविष्य निधि के संग्रहण रहने तथा अन्य जमा राशियों के बरअक्स की गई उधारियां शामिल होती हैं.
  • राज्य सरकार द्वारा प्राप्त समस्त राजस्व, इसके द्वारा प्राप्त सारे ऋण और ऋण अदायगी के रूप में प्राप्त सारी रकम उसकी संचित निधि में रखा जाता है.
  • संचित निधि के अलावा राज्य सरकार द्वारा प्रबंधित दो अन्य कोष भी होते हैं. पहली है आकस्मिक निधि, जो नियत कॉपर्स और अर्थदाय की प्रकृति की होती है.
  • राज्य सरकार द्वारा या उसके निमित्त प्राप्त अन्य सारी राशियों को संविधान के अनुच्छेद 266(2) के तहत गठित लोक लेखा में रखा जाता है.
  • भारतीय रिजर्व बैंक राज्य सरकार के बैंकर के बतौर काम करती है. रिजर्व बैंक के साथ एक समझौते के तहत राज्य सरकार को अपना कम से कम 1.73 करोड़ रुपए नकद शेष उसके पास बनाए रखना होता है.


 वित्त व्यवस्था का प्रबंधन

बिहार में वित्त व्यवस्था का प्रबंधन – 1.राजकोषीय प्रबंधन 2.घाटा प्रबंधन 3.ऋण प्रबंधन 4.संसाधन प्रबंधन 5.व्यय प्रबंधन 6.राज्य का बजट और 7.राजकीय सार्वजनिक उपक्रमों का प्रदर्शन के माध्यम से किया जाता है.
 

1.राजकोषीय प्रबंधन


समग्र संसाधन अंतराल सकल राजकोषीय घाटे से व्यक्त होता है जिसकी भरपाई किसी ना किसी प्रकार के उधार से करनी होती है.
 

राज्य सरकार के राजकोषीय प्रदर्शन के 8 सूचक हैं :

  • सकल राजकोषीय घाटा के साथ राजस्व घाटा का अनुमान  
  • सकल राजकोषीय घाटा के साथ पूंजीगत परिव्यय का अनुपात
  • समूहित संवितरण के साथ गैर विकास व्यय का अनुपात.
  • राजस्व प्राप्ति के साथ गैर – विकास राजस्व व्यय का अनुपात
  • राजस्व व्यय के साथ ब्याज भुगतान का अनुपात तथा
  • राजस्व व्यय के साथ राज्य के अपने राजस्व का अनुपात
  • समूहित संवितरण के साथ केंद्र सरकार के सकल अंतरण का अनुपात
  • केंद्र सरकार से सकल अंतरण के साथ ऋण सेवा व्यय का अनुपात.

2.घाटा (हीनार्थ) प्रबंधन

जब सरकार का व्यय उसकी आय से अधिक हो जाता है अथवा उसकी आय उसकी व्यय से कम रह जाती है तो बजट में इस प्रकार के घाटे को पूरा करने के लिए व्यवस्था अपनाई जाती है उसे हीनार्थ बजट प्रबंधन अथवा घाटे की अर्थव्यवस्था कहते हैं.

किसी राज्य सरकार का सकल राजकोषीय घाटे उसकी वित्तीय प्रदर्शन का महत्वपूर्ण सूचक है क्योंकि यह कुल संसाधन अंतराल को अभिव्यक्त करता है.

बिहार का सकल राजकोषीय घाटा पूंजी निवेश के कारण गत वर्षो में तेजी से बढ़ा है

राज्य सरकार के सकल राजकोषीय घाटे में निवल ऋण प्रदान का हिस्सा हमेशा ही कम रहा है. बिहार में पूंजीगत परिव्यय विगत 6 वर्षों के दौरान 23.6% की दर से बढ़ा है.

निवल ऋण ग्रहण में मुख्यतः राज्य सरकार द्वारा लिए गए आतंरिक बाज़ार के ऋण और केंद्रीय ऋण शामिल थे. कुल ऋण ग्रहण में केंद्रीय ऋण का हिस्सा छोटा था. राज्य सरकार के सफल राजकोषीय घाटे का वित्त पोषण अब पूरी तरह आतंरिक बाज़ार के ऋण से होता है. 


3.ऋण प्रबंधन


राज्य सरकार की राज्य घरेलू उत्पाद के अनुपात में बकाया देनदारियों का प्रतिशत लगातार घटा है.

बिहार का राजस्व लेखा : प्राप्ति और व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ, राजस्व व्यय, राजस्व अधिशेष, राज्य का अपना कर + गैर कर राजस्व, राज्य का अपना राजस्व कुल राजस्व के प्रतिशत के बतौर और राज्य के केंद्रीय करों का हिस्सा कुल राजस्व के प्रतिशत के बतौर, केंद्रीय अनुदान कुल राजस्व के प्रतिशत के बतौर, राज्य का अपना राजस्व व्यय के प्रतिशत के बतौर.

राज्य सरकार के कर राजस्व में उसका अपना कर राजस्व और केंद्रीय करों के विभाज्य पूल से मिलने वाला उसका हिस्सा शामिल होता है.

बिहार सरकार का व्यय पैटर्न – गैर- विकास व्यय, विकास व्यय, कुल व्यय, योजना व्यय , गैर योजना व्यय, ब्याज भुगतान.

4.संसाधन प्रबंधन


राज्य सरकार की राजस्व प्राप्तियों में कर राजस्व और गैर- कर- राजस्व दोनों स्रोतों का योगदान रहता है. राज्य सरकार के कर राजस्व में उसका अपना कर राजस्व तथा केंद्र सरकार के करो एवं शुल्कको के विभाज्य पूल में उसका हिस्सा शामिल रहता है. इसी प्रकार गैर-कर राजस्व में राज्य सरकार के अपने गैर कर राजस्व के साथ-साथ योजना और गैर- योजना प्रयोजनों के लिए केंद्रीय अनुदान शामिल रहते हैं.

राज्य सरकार के अपने कर राजस्व – 1.आयजनित कर जिसमें कृषि आयकर और व्यापार कर शामिल है. 2.संपत्ति तथा पूंजीगत अंतरण पर कर जिसमें भूमि राजस्व, स्टांप एवं निबंधन शुल्क तथा शहरी अंचल संपदा कर 3.वस्तु एवं सेवा कर

केंद्रीय करों के हिस्से में मुख्यतः केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, सेवा कर और संपदा कर के हिस्से शामिल होते हैं जिनका संग्रह केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है लेकिन उनकी प्राप्तियों में प्रति 5 वर्ष पर गठित होने वाले वित्त आयोगों की अनुशंसाओं के तहत राज्यों को भी हिस्सा दिया जाता है.


राजस्व प्राप्ति : राजस्व प्राप्ति के स्रोत – 1.राज्य का अपना राजस्व (क). कर राजस्व (ख). गैर कर राजस्व 2.केंद्र से प्राप्तियां (क). विभाज्य करों का हिस्सा (ख). सहायता अनुदान 3.कुल राजस्व प्राप्तियाँ

कर राजस्व की संरचना : राजस्व के स्रोत – बिक्री कर, व्यापार कर आदी, माल एवं यात्री कर, राज्य उत्पाद शुल्क, स्टांप एवं निबंधन शुल्क, वाहन कर, भूमि राजस्व, विद्युत कर एवं शुल्क, अन्य कर


5.व्यय प्रबंधन


बिहार सरकार के व्ययों को मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है – 1. सामान्य सेवाएं 2. सामाजिक सेवाएं 3.आर्थिक सेवाएं 4.सहायता अनुदान 5.पूंजीगत परिव्यय 6.लोकऋण की अदायगी 7.राज्य द्वारा ऋण एवं अग्रिम.

बिहार सरकार के ऋणों के मूलधन की अदायगी पूंजी लेखे से होती है, वहीं ब्याज भुगतान सामान्य सेवाओं के तहत व्यय के राजस्व लेखे से होता है. उपरोक्त सेवाओं पर राजस्व व्यय और पूंजीगत परिव्यय के अलावा व्यय के अन्य क्षेत्र पूंजीगत लेखे में ऋण एवं अग्रिम की अदायगी तथा स्थानीय निकायों और राज्य सरकार के अधीन स्वायत्त संस्थाओं के अनुदान है.

राज्य सरकारी सार्वजनिक उधमों, शहरी स्थानीय निकायों तथा पंचायती राज संस्थाओं के साथ साथ अपने कर्मचारियों को भी विभिन्न प्रयोजनों के लिए ऋण देती है.

संचित निधि से व्यय – सामान्य सेवाएं, सामाजिक सेवाएं, आर्थिक सेवाएं, सहायता अनुदान, पूंजीगत परिव्यय, लोक ऋणों की अदायगी, राज्य द्वारा प्रदत ऋण एवं अग्रिम, योग संचित निधि

6.राज्य का बजट

बजट अभिप्राय – बजट एक विस्तृत आर्थिक विवरण है जिसमें सरकार की एक वित्तीय वर्ष की आय और व्यय का ब्यौरा होता है. बजट एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसमे सरकार के वित्तीय वर्ष (भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च) तक की अवधि का आय एवं व्यय अनुमानों का विवरण होता है.

बजट के उद्देश्य – सरकारी बजट सरकार के वार्षिक आय एवं व्यय का ब्यौरा तो प्रस्तुत करता ही है, साथ ही बजट सरकार की विकास नीतियों के मुद्दे को इंगित करता है जिसे सरकार बजट के माध्यम से प्राप्त करना चाहती  है.

बजट की संरचना – बजट के दो प्रमुख संरचना है : (क). बजट प्राप्तियाँ (ख). बजट व्यय

बजट के प्रकार

पारंपरिक अथवा आम बजट – इस बजट में सरकार के आय और व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा होता है. इस बजट में सरकार किस क्षेत्र में कितना धन व्यय करेगी उसका उल्लेख किया जाता है.

निष्पादन बजट – कार्यों के परिणाम को आधार बनाकर निर्मित किया जाने वाला बजट निष्पादन बजट कहलाता है. यह मूलतः लक्ष्योंमुखी तथा उद्देश्यपरक प्रणाली पर आधारित होता है.

शून्य आधारित बजट – शून्य आधारित बजट का अर्थ है – हर बार बिल्कुल नए सिरे से बजट तैयार करना. आउटकम बजट – इस बजट के तहत किसी मंत्रालय या सरकारी विभाग के आवंटित बजट राशि में मूल्यांकन किए जा सकने वाले उद्देश्यों के निर्धारण और कार्य संपादन के लिए किसी भी स्तर पर होने वाली देरी के बजाय सही समय पर धनराशि पहुंचा कर उनका सही उपयोग किया जा सके, इसकी व्यवस्था रहती है.

लैंगिक बजट – वार्षिक बजट में महिलाओं और बालिकाओं के विकास के लिए आवंटित बजट के प्रावधान और खर्च पर समीक्षा करना लैंगिक बजटिंग कहलाता है.

अंतरिम बजट – जब सरकार किसी विशेष परिस्थिति में पूरे वर्ष के लिए आय – व्यय अनुमान तैयार करने में असमर्थ रहती है तो वर्ष के कुछ महीनों के लिए आवश्यक आर्थिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से आय – व्यय का प्रावधान करती है. इसे अंतरिम बजट कहा जाता है.

अधिशेष बजट – ऐसे बजट में कुल राजस्व प्राप्तियाँ , प्रस्तावित सकल सार्वजनिक व्यय की तुलना में अधिक होती हैं .

संतुलित बजट – ऐसा बजट जिसमें सार्वजनिक व्यय और कुल राजस्व प्राप्तियाँ बराबर हो.

बजट से संबंधित शब्दावली

योजना परिव्यय – यह बजटीय योजना का वह हिस्सा होता है जिसके तहत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए संसाधनों का बंटवारा किया जाता है.

राजस्व प्राप्तियाँ – इसमें सरकार के शुल्क और करों का उल्लेख होता है.

प्रत्यक्ष कर – व्यक्तियों और संगठनों की आमदनी पर लगाया जाता है चाहे वह आमदनी किसी भी स्रोत से हुई हो.

अप्रत्यक्ष कर – ऐसे करो को अप्रत्यक्ष कर कहा जाता है जिनका मौद्रिक भार दूसरों पर डाला जाता है अर्थात करापात किसी और व्यक्ति पर होता है और कराघात किसी और व्यक्ति पर. ग्राहकों द्वारा सामान खरीदने और सेवाओं का इस्तेमाल करने के दौरान उन पर लगाए जाने वाला कर अप्रत्यक्ष कर है .


सब्सिडी  – सरकार द्वारा व्यक्तियों या समूहों को नगदी या  कर से छूट के रूप में दिया जाने वाला लाभ सब्सिडी कहलाता है.


वित्तीय घाटा – वित्तीय घाटा बताता है कि किसी वित्त वर्ष के दौरान सरकार की कुल आमदनी (उधार को छोड़कर) और कुल खर्च का अंतर कितना है.
राजकोषीय घाटा – यह राजस्व प्राप्तियों के साथ-साथ कुल निश्चित गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के साथ-साथ कुल खर्च का अंतर होता है.


विनियोग विधेयक –

  • राज्य की संचित निधि में से कोई भी राशि तब तक नहीं निकाली जा सकती, जब तक कि उसके संबंध में विनियोग विधेयक पारित नहीं कर लिया जाता.
  • विधान सभा द्वारा अनुदान की मांगों को पारित करने के बाद संविधान राशियों को राज्य की संचित निधि से विनियोग किए जाने की व्यवस्था के लिए विनियोग विधेयक पुनः स्थापित किया जाता है.
  • विधानसभा में विनियोग विधेयक के पुनर्स्थापना होने के पश्चात विधानसभा अध्यक्ष विधेयक के प्रक्रम को पूरा करने के लिए विनिश्चय करता है.
  • विनियोग विधेयक पर वाद-विवाद उन अनुदानो में निहित लोक महत्व के विषयों या प्रशासकिय नीति तक सीमित रहता है. जो उस समय ना उठाए गए हो और जो अनुदान की मांगों पर विचार करते समय पहले उठाये ना जा चुके हो.
  • वाद विवाद की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विधानसभा अध्यक्ष विनियोग विधेयक पर चर्चा में भाग लेने के इच्छुक विधायकों से कह सकता है कि वे पहले उन विशिष्ट विषयों की सूचना दें जिन्हें वे उठाना चाहते हैं.
  • विधानसभा अध्यक्ष वैसे विषयों को जो अनुदानों की मांग पर चर्चा के दौरान उठाई जा चुकी हो या जो लोकहित महत्व की ना हो, अनुमति देने से इंकार कर सकता है

राज्यों के राजस्व श्रोत :

1. प्रति व्यक्ति कर 2.कृषि भूमि, उत्तराधिकारी संबंधी शुल्क 3.राज्यों में उत्पादित या निर्मित शराब, अफीम आदि मादक द्रव्यों पर उत्पाद कर 4.कृषि भूमि पर संपदा शुल्क 5.न्यायालयों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क को छोड़कर राज्य सूची में सम्मिलित विषयों पर शुल्क 6.भू राजस्व 7.संघ सूची में वर्णित लेखों को छोड़कर अन्य लेखों पर मुद्रांक शुल्क 8.कृषि आय पर कर 9.भूमि और भवनों पर कर 10.खनिज पदार्थों के विकास के लिए निश्चित सीमा के अधीन खनन अधिकारों पर कर 11.बिजली के उपभोग तथा विक्रय पर कर 12.स्थानीय क्षेत्र में उपयोग, प्रयोग तथा विक्रय के लिए लाई गई वस्तुओं पर कर 13.समाचार पत्रों को छोड़कर अन्य वस्तुओं के क्रय तथा विक्रय पर कर 14.समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों को छोड़कर अन्य विज्ञापनों पर कर 15.सड़कों तथा अंतर्देशीय जलमार्ग ओ से ले जाए जाने वाला माल तथा यात्रियों पर कर 16.वाहनों पर कर 17. पशुओं तथा नौकाओं पर कर 18.व्यवसाय, नौकरियों पर कर 19. विलासिता की वस्तुओं पर कर (इन में मनोरंजन तथा युवा भी शामिल है) 20. चुंगी कर आदि.
 

7.राज्य की सार्वजनिक उपक्रम और निगम

बिहार के सार्वजनिक क्षेत्र में 68 सरकारी कंपनियां और 3 वैधानिक निगम मौजूद है. हालांकि इन 68 सरकारी कंपनियों में से सिर्फ 28 ही कार्यशील है.

(क) कार्यशील कंपनियाँकृषि : बिहार राज्य बीज निगम लिमिटेड ,बिहार राज्य मतस्य विकास निगम लि., स्काडा कृषि व्यापार कंपनी लि.

वित्त : बिहार राज्य ऋण एवं निवेश निगम लिमिटेड, बिहार राज्य पिछड़ा वर्ग विकास एवं वित्त निगम, बिहार राज्य अल्पसंख्यक वित्त निगम लिमिटेड, बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड.

अधिसंरचना : बिहार आरक्षी भवन निर्माण निगम लिमिटेड, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड, बिहार शैक्षिक अधिसंरचना विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड, बिहार शहरी अधिसंरचना विकास निगम लिमिटेड.

विनिर्माण : बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य पेय निगम लिमिटेड.

विधुत : बिहार राज्य जलविद्युत निगम लिमिटेड,बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, बिहार राज्य विद्युत संचरण कंपनी लिमिटेड आदि.  

सेवा : बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड, बिहार चिकित्सा सेवा एवं अधिसंरचना निगम लिमिटेड, बिहार राज्य वन विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन लिमिटेड.


(ख). वैधानिक निगम

बिहार राज्य वित्त निगम, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम लिमिटेड, बिहार राज्य भंडारण निगम.

(ग). अकार्यशील कंपनियां

कृषि एवं सहवर्ती : बिहार राज्य जल विकास निगम लिमिटेड, बिहार राज्य दुग्ध विकास निगम लिमिटेड, बिहार पर्वतीय क्षेत्र उदव्ह सिचाई निगम लिमिटेड, बिहार राज्य कृषि उद्योग विकास निगम लिमिटेड, बिहार फल एवं सब्जी विकास निगम लिमिटेड, बिहार इंसेक्टिसाइड लिमिटेड, स्काडा कृषि व्यापार खगोल लिमिटेड, स्काडा कृषि व्यापार लिमिटेड आरा, स्काडा कृषि व्यापार लिमिटेड औरंगाबाद, स्काडा कृषि व्यापार लिमिटेड मोहनिया, स्काडा एग्रो फॉरेस्ट्री कंपनी लिमिटेड खगोल.

वित्त : बिहार राज्य पंचायती राज्य वित्त निगम लिमिटेड, बिहार राज्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम लिमिटेड, बिहार राज्य लघु उद्योग निगम लिमिटेड, बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड.

अधिसंरचना : बिहार राज्य निर्माण निगम लिमिटेड विनिर्माण, बिहार सॉल्वेंट एंड केमिकल्स लिमिटेड, मगध मिनरल्स लिमिटेड, कुमारधुबी मेटल कॉस्टिंग एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड, बेल्ट्रॉन वीडियो सिस्टम लिमिटेड, बेल्ट्रॉन माइनिंग सिस्टम लिमिटेड, बेल्ट्रॉन इल फॉर्मेटिक्स लिमिटेड, बिहार राज्य चीनी निगम लिमिटेड, बिहार राज्य सीमेंट निगम लिमिटेड, बिहार राज्य औषधि एवं रसायन विकास निगम लिमिटेड, बिहार मेज़ प्रोडक्शन लि. बिहार ड्रग्स एंड केमिकल लि., बिहार राज्य वस्त्र निगम लि.

सेवा : बिहार राज्य निर्यात निगम लि.

विविध : बिहार पेपर मिल्स लि., बिहार स्टेट फिनिश्ड लेदर कारपोरेशन लि. आदि .

हमारा सोशल मीडिया

29,606FansLike
25,786SubscribersSubscribe

Must Read

तमिलनाडु : सजने लगा चुनावी चौसर (हिन्दुस्तान)

तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति में यदि किसी व्यक्ति की कामयाबी देखने लायक है, तो वह मुख्यमंत्री ई के पलानीसामी ही हैं। वह न...

एक सेवा अनेक शुल्क  (हिन्दुस्तान)

भारतीय रेल सेवा के लिए यात्रियों को पहले की तुलना में न केवल ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, बल्कि कुछ सेवाओं में कटौती भी...

[BPSC आधिकारिक घोषणा] Important Notice: Regarding postponement of 31st Bihar Judicial Services (Preliminary) Competitive Examination (Advt. No. 04/2020) scheduled to be held on 7th...

Important Notice: Regarding postponement of 31st Bihar Judicial Services (Preliminary) Competitive Examination (Advt. No. 04/2020) scheduled to be held on 7th Oct, 2020 and...

BPSC 66th Prelims 2020: 66वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा के लिए आज से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन, ऐसे कर सकेंगे अप्लाई

BPSC 66th Prelims 2020: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 66वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आज से रजिस्ट्रेशन शुरू...

Related News

तमिलनाडु : सजने लगा चुनावी चौसर (हिन्दुस्तान)

तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति में यदि किसी व्यक्ति की कामयाबी देखने लायक है, तो वह मुख्यमंत्री ई के पलानीसामी ही हैं। वह न...

एक सेवा अनेक शुल्क  (हिन्दुस्तान)

भारतीय रेल सेवा के लिए यात्रियों को पहले की तुलना में न केवल ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, बल्कि कुछ सेवाओं में कटौती भी...

[BPSC आधिकारिक घोषणा] Important Notice: Regarding postponement of 31st Bihar Judicial Services (Preliminary) Competitive Examination (Advt. No. 04/2020) scheduled to be held on 7th...

Important Notice: Regarding postponement of 31st Bihar Judicial Services (Preliminary) Competitive Examination (Advt. No. 04/2020) scheduled to be held on 7th Oct, 2020 and...

BPSC 66th Prelims 2020: 66वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा के लिए आज से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन, ऐसे कर सकेंगे अप्लाई

BPSC 66th Prelims 2020: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 66वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आज से रजिस्ट्रेशन शुरू...

BPSC 66th notification 2020 : बीपीएससी 66वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती परीक्षा के लिए आज से आवेदन शुरू

BPSC 66th notification 2020 : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 66वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती परीक्षा के लिए आज से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here