Home बिहार के अखबारों में 30 साल की लड़ाई के बाद पूरी तरह नक्‍सल मुक्‍त हुआ बिहार-झारखंड, अब नक्‍सलियों ने नाम पर केवल रंगदारी गिरोह : सीआरपीएफ

30 साल की लड़ाई के बाद पूरी तरह नक्‍सल मुक्‍त हुआ बिहार-झारखंड, अब नक्‍सलियों ने नाम पर केवल रंगदारी गिरोह : सीआरपीएफ

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30 साल की लड़ाई के बाद पूरी तरह नक्‍सल मुक्‍त हुआ बिहार-झारखंड, अब नक्‍सलियों ने नाम पर केवल रंगदारी गिरोह : सीआरपीएफ

कभी बिहार और झारखंड नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था। बिहार के पहाड़ी क्षेत्रों में नक्‍सलियों की गोलियों की गूंज सुनाई देती थी। कभी रात के अंधेरे में उनकी अदालतों से चीख सुनाई देती थी तो कभी डर से इलाका सुनसान हुआ करता था। पंक्षियों की सरसराहट भी मौत का आमंत्रण लगता था। खेतों पर लाल झंडा लगाकर कब्‍जा कर लिया जाता था। झारखंड के पठार कभी इनके शरण स्‍थल हुआ करते थे। कभी जंगल की बात करने वाले नक्‍सलियों की आय का साधन इनकी बेशकीमती लकड़ि‍यां होती थीं। जंगली जानवर इनके निशाने पर थे। लेकिन अब तीन दशक से लाल आतंक से लड़ाई के बाद दोनों राज्‍यों अब पूरी तरह नक्‍सल मुक्‍त घोषित कर दिया गया है। इस बात की घोषणा बीते बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में देशभर में वामपंथी उग्रवाद के विरुद्ध चल रही निर्णायक लड़ाई में सुरक्षाबलों ने अभूतपूर्व सफलता मिली है। इसके लिए सीआरपीएफ, सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिसबलों को बधाई देता हूं।

उन्होंने कहा कि शीर्ष माओवादियों के गढ़ में महीनों तक चले इन अभियानों में सुरक्षा बलों को अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई है। जिसमें 14 माओवादियों को मार गिराया गया और 590 से अधिक की गिरफ्तारी/आत्मसमर्पण हुई। जिसमें लाखों-करोड़ों के ईनामी माओवादी जैसे मिथिलेश महतो जिसपर ₹1करोड़ का इनाम था पकड़े गए हैं।

उन्होंने कहा कि पहली बार बूढा पहाड़, चक्रबंधा और भीमबांध के दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकालकर सुरक्षाबलों के स्थायी कैंप स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद व LWE के विरुद्ध गृह मंत्रालय की जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी और ये लड़ाई आगे और तेज होगी। देश की आंतरिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार हुआ है।

इससे पहले सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह ने बुधवार को नक्सल प्रभावी इलाकों को लेकर बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झारखंड में बुद्ध पहाड़ जो नक्सल बहुल इलाका था। इसे मुक्त करा लिया गया है। हेलीकॉप्टर की मदद से वहां फोर्स भेजी गई है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2022 से अब तक छत्तीसगढ़ में सात नक्सली, झारखंड में चार और मध्य प्रदेश में तीन नक्सली ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म के तहत मारे गए। कुल 578 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है या फिर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।

अब नक्सलियों के नाम पर रंगदारी गिरोह ही सक्रिय
सीआरपीएफ डीजी ने कहा कि हम कह सकते हैं कि अब बिहार नक्सल मुक्त राज्‍य है। हालांकि रंगदारी गिरोह के रूप में इनकी मौजूदगी हो सकती है लेकिन बिहार में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां नक्सलियों का दबदबा हो। बिहार और झारखंड में ऐसी कोई जगह नहीं, जहां फोर्स नहीं पहुंच सकती है।

देश में अब सिर्फ 25 जिले प्रभावित
केंद्रीय बल (CRPF) ने यह भी बताया है कि देशभर में नक्सली हमलों (Naxal Attacks) की संख्या में 77 की कमी आई है। इसके अलावा, लोगों के मारे जाने की घटनाएं कम हो गई हैं और मरने वाले लोगों की संख्या में 85 फीसदी की कमी आ गई है। अब देश के सिर्फ 25 जिले ऐसे रह गए हैं। जो नक्सल प्रभावित हैं।

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