Homeबिहार के अखबारों मेंएएसआई ने बिहार सरकार से 31 अक्टूबर तक नालंदा महाविहार के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान मांगा

एएसआई ने बिहार सरकार से 31 अक्टूबर तक नालंदा महाविहार के संरक्षण के लिए मास्टर प्लान मांगा

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने बिहार के नालंदा जिला स्थित विश्व धरोहर स्थल नालंदा महाविहार के संरक्षण के लिए राज्य सरकार से 31 अक्टूबर से पहले एकीकृत मास्टर प्लान मांगा है।

एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद गौतमी भट्टाचार्य ने बताया कि यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र को विश्व धरोहर स्थल नालंदा महाविहार के संरक्षण के लिए एकीकृत मास्टर प्लान भेजा जाना है।

उन्होंने नालंदा के जिलाधिकारी को इस संबंध में भेजे गए पत्र के बारे में भी बताया। गौतमी ने कहा कि जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि एएसआई के पटना कार्यालय को राजगीर और नालंदा महाविहार के लिए एकीकृत मास्टर प्लान जमा करने की स्थिति से अवगत कराएं।

दिसंबर 2021 में एएसआई के पटना कार्यालय को सूचना मिला थी कि मसौदा रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अपने पत्र में जिलाधिकारी से एएसआई के पटना कार्यालय ने वर्तमान स्थिति के बारे में प्राथमिकता के आधार पर सूचित करने का आग्रह किया है।

यही पत्र राज्य सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा मामले एवं शहरी विकास एवं आवास विभाग के प्रधानसचिव को भी भेजा गया है।

नालंदा महाविहार के उत्खनन से मिले अवशेषों के संबंध में ‘वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर’ के प्रति प्रतिबद्धताओं में से एक राज्य राजमार्ग 80 और 110 को जोड़ने वाली सड़क का मार्ग बदलना है, जो धरोहर स्थल और संग्रहालय के बीच से गुजरती है।

वाहनों के यातायात को विनियमित करने और प्रदूषण के कारण साइट पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की पहचान की जानी है।

इसी तरह फेरीवालों के कारण प्रवेश द्वार पर भीड़ एक बारहमासी समस्या है जिसका अब तक निदान नहीं निकाला गया है। यहां तक कि केंद्रीय संस्कृति और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने भी नवंबर 2021 में धरोहर स्थल के भ्रमण के दौरान उसके बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘मैंने संबंधित प्राधिकरण से आग्रह किया है कि नालंदा महाविहार के विश्व धरोहर स्थल के रूप में चिह्नित करने के वक्त की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि एएसआई को अनुपालन रिपोर्ट ‘वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर’, पेरिस को जल्द से जल्द भेजनी है।

नालंदा महाविहार स्थल में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से 13 वीं शताब्दी तक के एक मठवासी और शैक्षिक संस्थान के पुरातात्विक अवशेष शामिल हैं। इसमें स्तूप, मंदिर, विहार (आवासीय और शैक्षिक भवन), प्लास्टर, पत्थर और महत्वपूर्ण कला कार्य शामिल हैं।

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