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[सिलेबस] सांख्यिकी (वैकल्पिक विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम – सांख्यिकी (वैकल्पिक विषय)

इसमें दो खण्ड हैं। उम्मीदवार प्रत्येक खण्ड से तीन से अधिक प्रश्नों के उत्तर नहीं देंगे।

खण्ड- I (Section – I)

1. प्रायिकता

प्रतिदर्श समष्टि और अनुवृत, प्रायिकता माप और प्रायिकता समष्टि, सांख्यिकीय स्वतंत्रता, समय फलन के रूप में यादृच्छिक चर, असंतत और असंसत यादृच्छिकचर, प्रायिकता धनत्व और बंटन फलन, उपांत और सप्रतिबंध वंटन, यादृच्छिक चरों के फलन और उनके बंटन, प्रत्याशी और आपूर्ण सप्रतिबंध प्रत्याशा सह-सम्बन्ध गुणांक प्रायिकता में तथा लगभग संयंत्र अभिसरण मार्कोब, शेबीशेव तथा कोलमोगोरोब असमिकाएँ, बोरल-कैंटेलिलेमा प्रमेयिका, वृहत् संख्याओं के दुर्बल एवं सबल नियम, प्राथमिकता जनक एवं अभिलाक्षणि फलन, अहितायता एवं सतत्य प्रमेय, आपूर्णांक के द्वारा बंटनों का निर्धारण, लिंडेवर्ग-लेवी केन्द्रीय सीमा प्रमेय, मनाक संतत प्रक्रिया बंटन और उनके पारस्परिक सम्बन्ध, जिसमें सीमक प्रकरण भी शामिल हो।

2. सांख्यिकीय अनुमिति

आकलनों के गुण धर्म, संगति, अनमिनति, क्षमता, पर्याप्तता और परिपूर्णता- क्रेमर-राव परिबंध, अल्पतम प्रसरण, अनमिनत आकलन, राव-ब्लैकवेल और लेहमन शेफ का प्रमेय। आष्युणों द्वारा आकलन की विधियाँ, आक्तिम सम्भाविता अल्पतम कोई वर्ग अधिकतम सम्भावित- प्राक्कलनों के गुण, धर्म, मानक बंटनों के प्राचलों के लिए विश्वस्यता अंतराल।

सरल और संकुल परिकल्पनाएँ, संाख्यिकीय परीक्षण और क्रांतिक क्षेत्र, दो प्रकाश की त्रुटियाँ, क्षमता फलन, अनमिनत परीक्षण, शक्ततम और समान रूप से शक्ततम परीक्षण, नेमन पियसेन प्रमयिका, एक प्रचाल से संबंधित सरल परिकल्पनाओं के लिए इष्टतम परीक्षण, एकविष्ट समायित अनुपात का गुणधर्म और यू॰एम॰पी॰ परीक्षण का यादृच्छिकता करने में उनका प्रयोग। सम्भावना अनुपात निकष उसका उपगामी बंटन समंजन सुष्ठुता के लिए कोई धर्म और कोलमोग रारोंव। परीक्षण का यादृच्छिकता के लिए परम्परा परीक्षण अवस्थापन के लिए चिह्न परीक्षण-द्विप्रतिदश समस्या के लिए विल्कांकल, विटनों, परीक्षणों एवं कोलगोरीव स्मनों व परीक्षण, मात्राओं का वंटन-मुक्त विश्वास्यता अंतरालों और बंटन फलनों के लिए विश्वास्यता-पट्टियाँ। अनुक्रमिक परीक्षण सम्बन्धी धारणाएँ वाल्टस का एस॰पी॰आर॰टी॰, उसका सी॰सी॰ और ए॰एम॰एन॰ फलन।

3. रैखिक अनुमिति और बहुचर विश्लेषण

न्यूनतम वर्ग सिद्धांत और प्रसारण विश्लेषण जाड्स- मार्कोफ सिद्धांत असामान्य समीकरण, न्यूनतम वर्ग आकलन और उनकी परिशुद्धता सार्थकता परीक्षण और अंतराल आकलन को एकत्र द्विधा और त्रिधा वर्गीकृत आंकड़ों में न्यूनतम वर्ग सिद्धांत पर आधारित सह-समाश्रयण विश्लेषण रैखिक समाश्रयण, सह-संबंध और समाश्रयण के बारे में आकलन और परीक्षण वक्र, रैखिक समाश्रयण तथा लम्बिक, बहुपद, समाश्रयण की रेखिकता के लिये परीक्षण। बहुचर प्रसामान्य बंटन, बहुल्य समाश्रयण, बहु सह-संबंध और आंशिक सह-संबंध महालनवीस डी- 2 और होटलिंग टी- 2 आंकड़े और उनके अनुप्रयोग (डी-2 और टी- 2 बंटनों व्युत्पत्तियों को छोड़कर) फिशर का विविक्तर विश्लेषण।

खण्ड- II (Section – II)

1. प्रतिचयन सिद्धांत और प्रयोगों की अभिकल्पना

प्रतिचयन का स्वरूप और विचार-क्षेत्र सरस यादृच्छिक प्रतिचयन प्रतिस्थापना के साथ उसके बिना परिमित समष्टि से प्रतिचयन मानक त्रुटियों का आकलन, समान प्राधिवक्ताओं के साथ प्रतिचयन और पी॰पी॰एस॰ प्रतिचयन। स्तरीकृत यादुच्छिक तथा क्रमबद्ध प्रतिचयन द्विचरण और बहुचरण प्रतिचयन, बहुचरण और गुच्छ प्रतिचयन प्रणालियाँ।

समष्टि का आकलन योग और अनियमिनत और अनमिनत आकलनों का प्रयोग सहायक चर, दुहरा प्रतिचयन, आकलन लागत और प्रसारण फलनों की मानक त्रुटियों, अनुपात और समाश्रयण आकलन और उनकी सापेक्ष क्षमता, भारत में हाल ही में आयोजित वृहदाकार सर्वेक्षणों के विशेष संदर्भ में प्रतिदर्श सर्वेक्षण का आयोजन और संगठन। प्रयोगात्मक अभिकल्पनाओं के नियम, सी॰आर॰डी॰, आर॰बी॰डी॰, एल॰एस॰डी॰ अप्राप्त क्षेमक प्रविधि, बहुउपादानी प्रयोग 2द और 3द अभिकल्प सम्पूर्ण और आंशिक संकरण तथा आंशिक पुनरावृत्ति का व्यापक सिद्वांत विभक्त क्षेत्र का विश्लेषण बी॰आई॰बी॰ और सरल जालक अभिकल्पनाएँ।

2. इंजीनियरिंग सांख्यिकी

गुण की धारणा और नियंत्रण का आशय विभिन्न प्रकार का नियंत्रण तालिकाएँ- जैसे- एक्स-आर, संचित्र पी-संचित्र, एन पी-संचित्र, डी-संचित्र तथा संचयी योग नियंत्रों संचित्र।

प्रतिदर्शी निरीक्षण बनाम शत-प्रतिशत निरीक्षण गुण परीक्षण हेतु एक्स, द्विश बहुल और अनुक्रमिक, प्रतिचयन आयोजनाएँ ओ॰सी॰, ए॰एस॰एन॰ और ए॰टी॰आई॰ वक्र उत्पादक जोखिम और उपभोक्ता जोखिम की कल्पना ए॰क्रयू॰एल॰, ए॰जी॰क्यू॰एल॰, एल॰टी॰पी॰डी॰ आदि पर प्रतिचयन आयोजनाएँ।

विश्वसनीयता अनुरक्षणोर्यता और उपलब्धता की परिभाषा- जीवन निदर्श बंटन विफलता दर और उप नली विफलता दर सेक्र चरणातंकी और वीयुल निदर्श दिनर्थ श्रेणियों और समांतर श्रृखलाओं और अन्य सरल विन्यासों की विश्वसनीयता- विभिन्न प्रकार की अतिरिक्ता; जैसे- गरम और ठंढा और विश्वसनीयता- सुधार अतिरिक्ता का उपयोग- आयु परीक्षण सम्बन्धी समस्याएँ- चर घातांकी माॅडल के लिए संडित रूटीन प्रयोग।

3. संक्रिया विज्ञान

संक्रिया विज्ञान का क्षेत्र और उसकी परिभाषा, विभिन्न प्रकार के निर्देश- उनको बनाना और हल निकालना- सामांगी असंतत काल, मार्काेव, विश्रृखलाएँ संक्रमण प्राधिकता आव्यूह, अवस्थाओं का वर्गीकरण और अयतिप्राय प्रमेय, समांगी संतत काल मार्कोव श्रृंखलाएँ पंक्ति सिद्धांत के प्राथमिक तत्व एम॰एम॰आई॰ और एम॰एम॰के॰ की पंक्तियाँ, मशीनों व्यतिकरण की समस्या और जी॰आई॰/एम॰/आई॰ और बी॰/जी॰आई॰ पंक्तियाँ।

वैज्ञानिक तालिका प्रबन्ध की परिकल्पना और तालिका समस्याओं को विश्लेषणात्मक संरचना, अग्रता काल के साथ और इसके बिना निर्धारणात्मक और प्रसामाव्य मांगे के सामान्य नमूने बांध प्रकार के विशेष सन्दर्भ में भण्डारण के नमूने।

रैखिक प्रोग्रामन समस्या का स्वरूप और रूपान्वयन एक्धाप्रक्रिया द्विवरण पद्वति और कार्मस, कृलिमचरों के साथ रद्द- पद्धति रैखिक कार्यक्रम का द्वत सिद्धांत और उसका आर्थिक निबंधन, सुग्राहित विश्लेषण परिवहन और नियोजन समस्याएँ।

बेकार और खराब चीजों का प्रतिस्थापन सामूहिक और वैयक्तिक प्रतिस्थापन नीतियाँ।

संगणकों का परिचय और फोट्रोन प्रक्रमण के आधारभूत तत्व निर्विष्ट और निर्गत के विवरणों के लिए प्ररूप, विनिर्देशन और तार्किक कथन एवं उपनेमकाएँ। कुछ सामान्य संाख्यिकीय। समस्याओं के सन्दर्भ में अनुप्रयोग।

4. मात्रात्मक अर्थशास्त्र

कल श्रेणी की परिकल्पना संकल्पनात्मक और गुणात्मक, निदर्शधार पटकों में विभेदन, मुक्तहस्त आरेखण से प्रकृति का निर्धारण, गतिग मान माध्य और गणितीय वकसंमंजन त्रुडनिप्ड सूचकांक और यादृच्छिक घटकों के प्रसारण का आकलन। सूचकांकों की परिभाषा, रचना निर्वाचन और परिसीमाएँ, लेस्मेरे पाश्र्व इडवर्थ-मार्शल और फिशर सूचकांक, उनकी तुलना, सूचकांक परीक्षण, जीवन निर्वाह सूचकांक के मूल्य की रचना।

उपभोक्ता माँग का सिद्धांत और विश्लेषण माँग फलनों का विनिर्देशन और आकलन-माँग की लोच, उत्पपंदन सिद्वांत, पूर्ति फलन और लोर्चे निद्रिष्ट माँग फलन, एक समीकरण निर्देश में प्राचल का आक्लनचिर, प्रतिष्ठित न्यूनतम वर्ग, साधारणीकृत न्यूनतम वर्ग, विषय विचाति श्रेणीगत सह-संबंध बहुसंरंखता, द्विध और त्रिधा त्रुटियाँ- युगपत समीकरण निदर्श-प्रतिनिर्धारण, कोटो और क्रय प्रतिबंध अप्रत्यक्ष न्यूनतम वर्ग और द्विचरण न्यूनतम वर्ग अल्पकालीन आर्थिक पूर्वानूमान।

5. जन सांख्यिकीय और मनोमिति

जन सांख्यिकीय तत्वों के स्रोत- जनगणना पंजीकरण राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण और अन्य जन सांख्यिकीय सर्वेक्षण- जन सांख्यिकीय आंकड़ों की सीमाएँ और उपयोग।

जीवन सम्बन्धी दर और अनुपातः परिभाषा निर्माण और उपयोग।

जीवन सारणियाँ- सम्पूर्ण और संक्षिप्त जन्म-मरण के आंकड़ों और जनगणना के विवरणियों के आधार पर जीव सारणियों का निर्माण, जीवन सारणियों के उपयोग।

वृद्धिघात और जनवृद्धि वक्र प्रजणन शक्ति का मापन- सकल और निबल जनन दरें।

स्थायी जनसंख्या सिद्धांत- जन सांख्यिकीय प्रावलों के आकलन में स्थायी और स्थायीकल्प जनसंख्या प्रतिधियाँ।

अस्वस्थता और उसका मापन- मृत्यु के कारण के आधार पर मानक वर्गीकरण- स्वास्थ्य सर्वेक्षण और अस्पताल के आंकड़ों का उपयोग।

शिक्षा और मनोविज्ञान से संबंधित प्रतिदर्शन- पैमानों और परीक्षणों का मानकीकरण वृद्धि लब्धि के परीक्षण-परीक्षणों की विश्वसनीयता और टी एवं जेड समक।

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