Saturday, November 28, 2020
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[सिलेबस] कृषि (वैकल्पिक विषय)

बिहार लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम – कृषि (वैकल्पिक विषय)

खण्ड- I (Section – I)

परिस्थिति विज्ञान और मानव के लिये उसकी प्रासंगिकता, प्राकृतिक संसाधन, उनका प्रबंधन तथा संरक्षण। फसलों के उत्पादन और वितरण के कारक-तत्व, भौतिक और सामाजिक वातावरण, फसल वृद्धि में जलवायु तत्वों का प्रभाव, फसल क्रम पर वातावरण सूचक के रूप में परिवर्तनशील वातावरण का प्रभाव। फसल, पशु और मानव पर प्रदूषित वातावरण का प्रभाव और संबंधित खतरे।

बिहार के कृषि जलवायु क्षेत्र, देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फसल क्रम; उत्तरी बिहार, दक्षिणी बिहार और छोटानागपुर पहाड़ी के विशिष्ट सन्दर्भ में बिहार में फसल क्रम में परिवर्तन पर अधिक पैदावार वाली और अल्पकालीन किस्मों का प्रभाव। बहुफसलीय प्रणाली, मिश्रित फसल प्रणाली, अनुपद और अन्तर फसल प्रणाली की संकल्पना तथा खाद्य उत्पादन में उनका महत्व देश के विभिन्न क्षेत्रों में खरीफ और रबी मौसमों में मुख्य अनाज, दलहन, तेलहन, रेशा, शर्करा तथा व्यावसायिक फसलों के उत्पादन की सवेष्टन रीतियों। बिहार की मुख्य मसाला फसलें- मिर्चा, अदरख, हल्दी और धनियाँ।

वनों के प्रसार, सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी एवं प्राकृतिक वन; जैसे- वन रोपण की विभिन्न विधियों की मुख्य विशेषताएँ, सम्भावना और प्रचार।

खर-पतवार, उनकी विशेषताएँ, प्रसारण तथा विभिन्न फसलों के साथ सहवास, गुणन, समन्वित खर-पतवार नियंत्रण संवर्धनिक, जैविक तथा रासायनिक।

मृदा-निर्माण की प्रक्रिया तथा कारक, भारतीय मृदाओं का वर्गीकरण आधुनिक अवधारण सहित, बिहार की मृदा के प्रमुख प्रकार, मृदाओं के खनिज तथा कार्बनिक संरचनात्मक तत्व तथा मृदा की उत्पादकता बनाए रखने में उनकी भूमिका। समस्यात्मक मृदाएँ- भारत में उनका विस्तार तथा वितरण, मृदा लवणता, खारीयता और आम्लीयता की समस्या तथा उनका प्रबंधन। मृदा और पौधों के आवश्यक पोषक तथा अन्य लाभकारी तत्व, मिट्टी में उनके वितरण क्रिया और आवत्र्तन को प्रभावित करने वाले कारक। सहजीवी तथा असहजीवी नेत्रवन, स्थिरिकरण, मृदा उर्वरता के सिद्धांत तथा उचित उर्वरक प्रयोग के लिए उसका मूल्यांकन, जैविक उर्वरक, बिहार की टाल, दियारा और चैर भूमि की समस्या तथा ऐसी स्थिति में फसल प्रणाली।

जल विभाजन के आधार पर मृदा संरक्षण योजना, पहाड़ी, पद-पहाड़ी तथा घाटी जमीनों में अपरदन और अप्रवाह की सम्भावना, उनको प्रभावित करने वाली क्रियाएँ और कारक। वारानी कृषि और उससे संबंधित समस्याएँ, वर्षा प्रधान कृषि क्षेत्रों में उत्पादन में स्थिरता लाने की तकनीक।

शष्य उत्पादन से संबंधित जल उपयोग क्षमता, सिंचाई क्रम के आधारभूत, सिंचाई जल के अप्रवाह हानि को कम करने की विधियाँ। जलाक्रांत भूमि से जल निकास। बिहार के कृषि विकास में विभिन्न कमान्ड क्षेत्र विकास एजेंसी की भूमिका।

कृषि क्षेत्र प्रबंध विषय; क्षेत्र, महत्व तथा विशेषताएँ। कृषि क्षेत्र आयोजन और बजट, विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियों की अर्थव्यवस्था।

कृषि निविष्टों और उत्पादों का विपणन और मूल्य निर्धारण, मूल्य उतार-चढ़ाव, कृषि प्रणाली के प्रकार और प्रभावित करने वाले कारक। बिहार के कृषि विकास में सहकारी विपणन और ऋण की भूमिका।

बिहार में विगत दो दशकों में कृषि उत्पादन की रूपरेखा। बिहार में भूमि सुधार की गति और कृषि उत्पादकता पर उनका प्रभाव।

कृषि प्रसार, महत्व तथा भूमिका, कृषि प्रसार कार्यक्रमों के मूल्यांकन की विधि, महत्वपूर्ण प्रसार, विधियाँ और प्रसार साधन, ग्रामीण नेतृत्व, सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण और बड़े, छोटे, सीमांत कृषकों, भूमिहीनों एवं श्रमिकों की स्थिति। कृषि यंत्रीकरण तथा ग्रामीण रोजगार और कृषि उत्पादन में इसकी भूमिका। कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कृषि विज्ञान केन्द्र, प्रसार में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका।

खण्ड- II (Section – II)

बिहार में कृषि अनुसंधान और शिक्षा प्रणाली की उत्पत्ति और विकास।

मुख्य फसलों के सुधार में पौधा प्रजनन के सिद्धांतों का उपयोग, स्व और पर-परागित फसलों की प्रजनन विधियाँ। भूमिका, चयन, संकरीकरण, हेट रोसिस तथा उसका दोहन, नर-नपुसं कता आरै स्व असंगिता, उत्परिवर्तन और बहुगुणित का प्रजनन में भूमिका, जैव तकनीकी और ऊतक कल्चर का कृषि में उपयोग।

आनुवंशिकता और विभिन्नता, मेंडेल का आनुवंशिकता नियम, गुणसूत्री आनुवंशिकता के सिद्धांत, कोशिका द्रव्यी वंशागति, लिंग सहलगन, लिंग प्रभावित तथा लिंग सीमित गुण। स्वायत्त और प्रेरित उत्परिवर्तन, मात्रात्मक गुण।

बिहार की मुख्य फसलों की प्रमुख अनुशंसित किस्में। फसलों का उद्गम और भंगीकरण, खेतों में लगने वाले मुख्य प्रभेदों तथा उनसे संबंधित प्रजातियों की आकारगत विभिन्नता के स्वरूप, सस्य सुधार के कारक और इनमें विभिन्नता का उपयोग।

बीज प्रौद्योगिकी तथा इसका महत्व, फसली बीजों का उत्पादन, संसाधन और परीक्षण, उन्नत बीजों के उत्पादन, संसाधन और विपणन में राष्ट्रीय और बीज निगमों की भूमिका। पादप और कृषि विज्ञान में इसका महत्व, जीव द्रव का गुण, भौतिक और रासायनिक संगठन अंतःशोषण, पृष्ठतनाव, विसरण और परासरण। जल का अवशोषण और स्थानान्तरण, वाष्पोत्सर्जन और जल की मितव्ययिता।

प्रक्दिव और पादप रंजक, प्रकाश संश्लेषण- आधुनिक संकल्पनाएँ और इन क्रियाआंे को प्रभावित करने वाले कारक, आक्सी और अनाक्सी श्वसन।

वृद्धि और विकास दीप्तकालिता और वसन्तीकरण, आॅक्सिन हारमोन और अन्य पादप नियामक, इनकी कार्य विधि और कृषि में महत्व।

बिहार के प्रमुख फलों, पौधों और सब्जियों की फसलों के लिए अपेक्षित जलवायु और इनकी खेती संवेष्टिता प्रथा समूह और इसका वैज्ञानिक आधार, फलों और सब्जियों को संभालने और बेचने की समस्याएँ, परिरक्षण की मुख्य विधियाँ, फलों और सब्जियों के मुख्य उत्पाद। प्रकमिक तकनीक तथा इनके यंत्र, मानव पोषण में फलों और सब्जियों की भूमिका, द्रव्य और पुष्पवर्द्धन अलंकृत पौधों के वर्धन को मिलाकर। बाग-बगीचों का अभिकल्पन और रचना विन्यास।

बिहार के फसलों, सब्जी, फल का टिकावों और रोपी पौधों की बीमारियों और नाशक कीट, उनके कारक और नियंत्रण की विधियाँ। पादप रोगों के कारक और उनका वर्गीकरण, रोग नियंत्रण के सिद्धांत; जिसमें वहिष्करण, निर्मूलन, प्रतिरक्षीकरण और संरक्षण शामिल है। कीट और बीमारियों का जैविक नियंत्रण।

कीट एवं बीमारियों का समन्वित प्रबंध, कीटकनाशी और उनके सूत्र। पादप संरक्षण यंत्र, उनकी सावधानी और अनुरक्षण।

अनाज और दलहन के भण्डार में नाशक कीट, भण्डार गोदामों की स्वच्छता, परिरक्षण और सुधार उपाय।

कीटनाशी उपयोग के खतरे और सुरक्षा उपाय।

बिहार में लाभदायक कीट के पालन की स्थिति और क्षेत्र, मधुमक्खी, रेशम कीट और लाह कीट। बिहार में धान एवम् मछली की खेती।

बिहार में लगातार बाढ़ और सूखे की आपदा और आकस्मिक फसल योजना, भारत में सामान्यतया खाद्यान्न उत्पादन और उपभोग की प्रवृत्तियाँ, बिहार में विशेष रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य, भण्डारण, वितरण
नीतियाँ, संसाधन और उत्पादन में अवरोध, राष्ट्रीय आहार पद्धति से कैलोरी खाद्य उत्पादन का संबंध, कैलोरी और प्रोटीन की कमी।

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