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सामाजिक समूह (Social Group)

हम में से प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी परिवार, पड़ोस, मोहल्ले, गांव अथवा नगर का सदस्य होता है। व्यवसायिक आधार पर हम में से कई व्यक्ति, डॉक्टर, इंजीनियर, कृषक, अध्यापक, मजदूर, कलाकार, क्लर्क या व्यापारी समूह के सदस्य होते हैं। उम्र के आधार पर व्यक्ति बच्चों, युवा, प्रौढ़, एवं वृद्ध समूह के सदस्य हो सकता है। हम महिला अथवा पुरुष समूह के सदस्य हो सकते हैं। इसी प्रकार किसी विशेष प्रकार की रुचि रखने वाले सभी व्यक्ति किसी समूह का निर्माण कर सकते हैं और उसके सदस्य हो सकते हैं। जैसे – अगर कोई व्यक्ति की रूचि पढ़ाई में है तो वह किसी लाइब्रेरी का सदस्य हो सकता है। अगर किसी को चित्रकारी का शौक है तो वह चित्रकारी समूह का सदस्य हो सकता है।

सामाजिक समूह की परिभाषा:

Maciver and Page के अनुसार “समूह से मेरा तात्पर्य मनुष्यों के उस संकलन से है जो एक दूसरे के साथ सामाजिक संबंध स्थापित करते हैं।”

Ogburn और Nimkoff के अनुसार “जब कभी दो या दो से अधिक व्यक्ति एक साथ मिलते हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते हैं तो वह एक सामाजिक समूह का निर्माण करते हैं।”

Bogardus के अनुसार “सामाजिक समूह का अर्थ हम ऐसे व्यक्तियों की संख्या से लगा सकते हैं जिनकी सामान्य रुचियां एवं स्वार्थ होते हैं जो एक दूसरे को प्रेरित करते हैं जो सामान्य रूप से एक दूसरे के प्रति वफादार होते हैं और सामान्य कार्यों में भाग लेते हैं।”

सामाजिक समूह के तत्व या विशेषताएं
1.यह दो या दो से अधिक व्यक्तियों का संग्रह है।
2.समूह के सदस्यों के बीच व्यक्तिक संपर्क आवश्यक नहीं है।
3.प्रत्येक समूह के निर्माण का निश्चित आधार होता है।
4.प्रत्येक सदस्यों के बीच अंतः क्रिया का एक निश्चित स्वरूप होता है।

  1. समूह की सदस्यता अधिक होती है और व्यक्ति के रुचि और आवश्यकता पर निर्भर करती है।

Sumner के अनुसार समूह का वर्गीकरण:

सर्वप्रथम समनर ने समूह का जिक्र अपनी पुस्तक फोकवेज (Folkways1907) में किया था।
इन्होंने समूह को दो भागों में बांटा हैl

पहला, अंत: समूह (In group’s):
इस समूह के सदस्य हमेशा या विश्वास करते हैं कि उनका व्यक्तिगत कल्याण समूह के सभी सदस्यों के कल्याण में ही निहित है तथा उनके हित और अन्य सदस्यों के हित समान है। यहां हम की भावना होती है। उदाहरण के लिए परिवार के सदस्य या एक देश के सदस्य।

दूसरा, बाह्य समूह (Out Group’s):
यह समूह दूसरों का समूह है उसके प्रति हम की भावना नहीं होती न सहयोग की भावना होती है और ना सहानुभूति की। मुश्किल सुख दुख के साथ व्यक्ति का कोई संबंध नहीं होता। बाह्य समूह के प्रति व्यक्ति का व्यवहार पक्षपातपूर्ण, विरोधी यहां तक की घृणात्मक भी हो सकता है। उदाहरण के लिए- जब हम यह कहते हैं कि वह अंग्रेज है या अंधविश्वासी है तब हमारा दृष्टिकोण अधिकतर सामाजिक दूरी का होता है ऐसे व्यक्तियों के लिए हम आदरपूर्ण शब्दों का प्रयोग ना करके विदेशी, असभ्य जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं।

Ananya Swaraj,
Assistant Professor, Sociology

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