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समाजशास्त्र में विवाह प्रथा (Marriage system in Sociology)

भारत में जितने भी सामाजिक संस्थाएं हैं उनमें हिंदू विवाह विशेष महत्व रखता है। विवाह की अनुपस्थिति में परिवार की कल्पना नहीं की जा सकती। विवाह की प्रकृति परिवार की संरचना को निर्धारित और निश्चित करती है। परिवारों की संरचना विवाह के विभिन्न प्रकार और उसके नियमों द्वारा निर्धारित की जाती है। विवाह मानव-समाज की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रथा या समाजशास्त्रीय संस्था है। यह समाज का निर्माण करने वाली सबसे छोटी इकाई- परिवार-का मूल है।

विवाह की परिभाषा:

Westermark के शब्दों में, “विवाह एक या अधिक पुरुषों का एक या अधिक स्त्रियों के साथ होने वाला वह संबंध है जो प्रथा या कानून द्वारा स्वीकृत होता है तथा इस संगठन में आने वाले दोनों पक्षों तथा उनसे उत्पन्न बच्चों के अधिकार और कर्तव्यों का समावेश होता है।”

Gillin and Gillin के अनुसार विवाह एक प्रजनन मूलक परिवार की स्थापना के लिए समाज स्वीकृत माध्यम है।

Lovie के अनुसार “विवाह उस स्पष्ट स्वीकृत संबंध को प्रकट करता है जो कि इंद्रिय संबंधी संतोष के पश्चात भी रहता है और पारिवारिक जीवन की आधारशिला है।”

विवाह के स्वरूप
Forms of marriage

भारतीय प्राचीन परंपरा के अनुसार भारत में हिंदू विवाह के 8 प्रकार हैं। इस प्रकार है-
ब्रह्मा विवाह
प्राजापत्य विवाह
देव विवाह
आर्ष विवाह
गंधर्व विवाह
असुर विवाह
राक्षस विवाह
पिचाश विवाह

पति पत्नियों की संख्या पर विवाह के 2 स्वरूप:
1.एक विवाह:
हिंदू विवाह का यह आदर्श विवाह है इस विवाह में एक समय पर एक पुरुष का एक स्त्री से विवाह होता है।

2.बहु विवाह:
इस विवाह में एक पुरुष कई स्त्रियों से विवाह कर सकता है अथवा एक स्त्री कई पुरुषों से विवाह कर सकती है।
बहु विवाह के दो प्रकार हैं – बहु पत्नी विवाह और बहुपति विवाह।

हिंदू विवाह के निषेध:
Prohibition of Hindu marriages

हिंदू विवाह एक निश्चित विधियों से बना हुआ है जिसके अपने अलग नियम और मान्यताएं हैं और इनका कठोरता से पालन किया जाता है। वे नियम हैं-

अंतर्विवाह (Endogamy):
इसके अंतर्गत एक विशिष्ट वर्ग के व्यक्तियों को उसी वर्ग के अंदर रहनेवाले व्यक्तियों में से ही वधू को चुनना पड़ता है। वे उस वर्ग से बाहर के किसी व्यक्ति के साथ विवाह नहीं कर सकते हैं।

बहिर्विवाह (Exogamy):
दूसरे प्रकार के विवाह बहिर्विवाही के नियमों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को एक विशिष्ट समूह से बाहर के व्यक्तियों के साथ ही विवाह करना पड़ता है।

अनुलोम (Anuloma):
अनुलोम विवाह तथाकथित उच्च वर्ण के पुरुष और तथाकथित निम्न वर्ण की स्त्री का विवाह है।

प्रतिलोम (Pratiloma):
प्रतिलोम विवाह तथाकथित निम्नजातीय वर्ण के पुरुष और तथाकथि उच्च वर्ण की स्त्री का विवाह है।

Ananya Swaraj,
Assistant Professor, Sociology

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