Home बिहार के अखबारों में AK-47 in Bihar : अगस्त 2004… सेना की तरह पुलिस की घेराबंदी और जब बिहार में मिला पाकिस्तानी AK-47 के साथ हथियारों का जखीरा

AK-47 in Bihar : अगस्त 2004… सेना की तरह पुलिस की घेराबंदी और जब बिहार में मिला पाकिस्तानी AK-47 के साथ हथियारों का जखीरा

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AK-47 in Bihar : अगस्त 2004… सेना की तरह पुलिस की घेराबंदी और जब बिहार में मिला पाकिस्तानी AK-47 के साथ हथियारों का जखीरा

सिवान में एक समय था जब यहां शहाबुद्दीन की तूती बोलती थी। उस वक्त जब प्रतापपुर में भारी फोर्स के साथ डीएम और एसपी ने रेड की थी तो शहाबुद्दीन के घर से AK-47 रायफल मिली थी। यही नहीं इसके साथ कई ऐसे हथियार मिले थे जो पाकिस्तानी थे।

हाइलाइट्स

  • सिवान में फिर सुनाई दी AK 47 की गरज
  • गैंगवार में दनादन दागे गए AK 47 के कारतूस
  • शहाबुद्दीन के समय में भी थी AK 47 की धमक
  • तब दो अफसरों ने ‘डॉन के किले’ पर किया था सबसे बड़ा हमला

सिवान में एक बार फिर से AK 47 की धमक दिखाई दी है। MLC चुनाव में उम्मीदवार खान ब्रदर्स के रईस के मुताबिक AK-47 से हमला उसकी जान लेने की नीयत से किया गया था। सवाल ये है कि चुनाव के दौरान जिले में AK-47 जुटाने की और उससे हमला करने की जुर्रत करने वाला अपराधी कौन है। हालांकि ये कोई पहली दफा नहीं है जब सिवान में इस घातक हथियार की गरज सुनाई दी है। शहाबुद्दीन के दौर में भी AK47 की धमक थी, उस वक्त हालत ये थी कि पुलिस भी उस बाहुबली पर हाथ डालने से डरती थी। तब दो अफसरों ने पूरे महकमे को बताया कि पुलिस की पावर क्या और कितनी होती है।

शहाबुद्दीन पर इन दो जांबाज अफसरों ने कसा था शिकंजा
इसका श्रेय जाता है उस समय सिवान के तत्कालीन डीएम सीके अनिल और एसपी एस रत्‍न संजय कटियार को, जिन्होंने ठान लिया कि वह शहाबुद्दीन के खौफ को खत्म कर देंगे। दरअसल, 16 अगस्त 2004 को रंगदारी के लिए व्यवसायी चंद्रेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के दो बेटों राजीव और सतीश की तेजाब से नहालकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त बिहार में आरजेडी की सरकार थी और शहाबुद्दीन आरजेडी के बाहुबली नेता थे। ऐसे में उस पर कार्रवाई को लेकर दोनों अफसरों सीके अनिल और एस रत्‍न संजय कटियार ने मिलकर पूरी प्लानिंग की।

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सेना की तरह पुलिस ने की शहाबुद्दीन की घेराबंदी
बताया जा रहा कि इन्‍हीं दो जांबाज अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ शहाबुद्दीन के प्रतापपुर स्‍थित घर की घेराबंदी की थी। शहाबुद्दीन के समर्थक भी पहले से ही तैयार बैठे थे। उन्होंने पुलिस बल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि पुलिस टीम भी जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी के साथ गई थी और जबरदस्त तरीके से पलटवार किया। पुलिस का दावा है कि गोलीबारी थमने के बाद पुलिस जब शहाबुद्दीन के प्रतापपुर वाले घर के अंदर दाखिल हुई तो उसके होश उड़ गए। शहाबुद्दीन के घर में भारी मात्रा में पाकिस्तानी हथियार बरामद हुए थे।

शहाबुद्दीन के घर मिली पाकिस्तानी AK 47
शहाबुद्दीन के घर से पाकिस्तानी आर्डिनेंस कंपनी की मुहर लगी एके-47 राइफल भी बरामद हुई थी। कई ऐसे हथियार मिले जिसे केवल पाकिस्तानी सेना प्रयोग करती है। छापेमारी में इस बाहुबली नेता के घर से बहुमूल्य जेवरात और नकदी के अलावा जंगली जानवर जैसे शेर और हिरण की खाल भी बरामद हुई थी। इस कार्रवाई के बाद शहाबुद्दीन के किले में सेंध लगी थी।

शहाबुद्दीन के गुर्गों ने 3 पुलिस वालों की कर दी थी हत्या
इससे पहले साल 2001 में भी बिहार पुलिस शहाबुद्दीन को गिरफ्तार करने उनके प्रतापपुर वाले आवास पर छापेमारी करने पहुंची थी। इस दौरान शहाबुद्दीन के गुर्गों और पुलिस के बीच करीब 3 घंटे फायरिंग चली थी। इस दौरान 3 पुलिसकर्मी मारे गए थे। 2001 में ही पुलिस जब आरजेडी के स्थानीय अध्यक्ष मनोज कुमार पप्पू के खिलाफ एक वारंट लेकर पहुंची थी तो शहाबुद्दीन ने गिरफ्तारी करने आए पुलिस अधिकारी संजीव कुमार को थप्पड़ मार दिया था। शहाबुद्दीन के सहयोगियों ने पुलिस वालों की जमकर पिटाई कर दी थी। इसके बाद पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा था।

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