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कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बावजूद भारत में भुखमरी

कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बावजूद भारत में भूख का स्तर खतरनाक है. भूख ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर को आवश्यकतानुसार भोजन और पोषण प्राप्त नहीं होता. शरीर को लंबे समय तक संतुलित आहार न मिलने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण वह आसानी से किसी भी बीमारी का शिकार हो सकता है.

ज्ञात है कि हाल में ही जारी वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 107 देशों में 94वे स्थान पर आया है. भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल भारत से अच्छी स्थिति में है. यूएन और एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर दिन 194 मिलियन लोग भूखे रहते हैं जो विश्व की लगभग 23% कुपोषित जनसंख्या है. यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार, वर्ष 2017 में सबसे कम वजन वाले बच्चों की संख्या वाले देशों में भारत 10वें स्थान पर था. इसके अलावा भारत में लगभग 14% बच्चे अल्प पोषण का शिकार हैं. इन सब आंकड़ों से स्पष्ट है कि आजादी के 70 सालों के बाद भी भारत में भुखमरी की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है.

अनुच्छेद-21 और अनुच्छेद-47 भारत सरकार को सभी नागरिकों के लिये पर्याप्त भोजन के साथ एक सम्मानित जीवन सुनिश्चित करने हेतु उचित उपाय करने के लिये बाध्य करते हैं. किंतु भारतीय संविधान में भोजन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता नहीं प्रदान की गई है. संविधान के मूल अधिकारों से संबंधित प्रावधानों (अनुच्छेद 21) में अप्रत्यक्ष जबकि राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों से संबंधित प्रावधानों (अनुच्छेद 47) में प्रत्यक्ष रूप से कुपोषण को खत्म करने की बात की गई है.

भारत में खाद्यान्न उत्पादन की स्थिति

  • भारत गेहूं और चावल उत्पादन में द्वितीय स्थान रखता है.
  • भारत में 2018-19 में 283 मिलियन खाद्यान्न उत्पादन हुआ.
  • दूध उत्पादन में भी भारत संपन्न है
  • भारत फलों और सब्जियों के उत्पादन में अधिकता की स्थिति में है
  • भारत बाजरे के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है

आत्मनिर्भर होने के बावजूद भुखमरी की स्थिति के कारण

  • डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर के अनुसार भारत में हर साल लाखों टन खाद्यान्न बर्बाद हो जाता है. आधारभूत संरचना का अभाव भारतीय गोदामों में स्पष्ट रूप से दिखती है जिससे लाखों टन अनाज बारिश आदि में नष्ट हो जाता है
  • इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनामिक के अनुसार भारत में लाखों फर्जी राशन कार्ड बने हुए हैं जिनसे अपात्र लोगों को अनाज मिल जाता है लेकिन गरीब लाभ से वंचित रह जाते हैं.
  • गुणवत्ता युक्त खाद्यान्न नहीं वितरित किया जाता है
  • उचित मूल्य के दुकानदार सही खाद्यान्न बेच देता हैं तथा कम दाम पर खराब गुणवत्ता वाला अनाज बांटता हैं.
  • राशन दुकानदार अशिक्षित गरीबों को कम खाद्यान्न देते हैं. साथ ही कई बार अंगूठे का निशान लगवाने के बाद भी खाद्यान्न नहीं देते और अशिक्षित होने के कारण वे शिकायत नहीं कर पाते.

भुखमरी रोकने के उपाय

  • राशन का उचित तरीके से खरीद, रखरखाव तथा वितरण होना चाहिए.
  • अन्नपूर्णा योजना (10 किलो हर महीने 65 साल के वृद्ध को खाद्यान्न) का सही क्रियान्वयन होना चाहिए.
  • राशन गुणवत्ता युक्त होना चाहिए.
  • राशन में चावल और गेहूं के अलावा गुणवत्ता युक्त दालें आदि शामिल हो.
  • भ्रष्टाचार होने की स्थिति में शिकायत निवारण जल्द हो.
  • फर्जी राशन कार्ड होने पर ग्राम प्रधान पर कार्यवाही होनी चाहिए.

सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम

  • राष्ट्रीय पोषण नीति 1993
  • मिड-डे मील कार्यक्रम
  • भारतीय पोषण कृषि कोष
  • पोषण अभियान

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