Home BPSC मुख्य परीक्षा GS पेपर 2 - भारतीय अर्थव्यवस्था बिहार की आर्थिक विकास की क्या संभावनाएं हैं?

बिहार की आर्थिक विकास की क्या संभावनाएं हैं?

बिहार के आर्थिक रूप से पिछड़े होने के बावजूद बिहार में विकास की असीम संभावनाएं हैं जिनको उचित प्रबंधन द्वारा दूर किया जा सकता है जिसके लिए सरकार प्रयासरत है.

कृषि तथा उर्जा क्षेत्र में विकास

इस प्रकार बिहार की अर्थव्यवस्था के पिछड़ेपन के मूलभूत कारणों पर विचार करने के बाद यह मानना तर्कसंगत नहीं है कि बिहार में विकास की संभावनाएं नहीं है. बिहार के पिछड़ेपन को दूर किया जा सकता है क्योंकि विकास की सभी संभावनाएं मौजूद हैं. इस पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सरकार के द्वारा समग्र विकास किया जा रहा है.

कृषि क्षेत्र में बदहाली को दूर करने के लिए इंद्रधनुष क्रांति एवं औद्योगिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति का इस्तेमाल किआ जा रहा है. आधारभूत संरचना पर विशेष बल दिया जा रहा है. ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए निजी एवं सरकारी क्षेत्र में विभिन्न बिजली परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है. सात निश्चय के माध्यम से बिहार राज्य में समावेशी विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग

खनिज एवं वन संसाधन के अभाव के बावजूद बिहार में जल संसाधन, मिट्टी संसाधन एवं मानव संसाधन की अकूत उपलब्धता बिहार को देश का सर्वाधिक संभावना वाला राज्य बनाता है. बिहार में विश्व की सबसे उर्वर समतल गंगा का जलोढ़ मैदान उपलब्ध है. जिस पर सदाबाही नदियों का जाल कृषि विकास के लिए सबसे अनुकूलतम भौगोलिक परिस्थिति उत्पन्न करता है. किसी भी संसाधन का अनुकूलतम उपयोग कर विकास की गति के तीव्र करने का कार्य मानव संसाधन द्वारा संभव होता है तथा बिहार इस दृष्टिकोण से भी धनी राज्य है.

प्रशासनिक सुधार, विधि व्यवस्था एवं प्रशासनिक तंत्र में सुधार

इसके तहत ई-प्रशासन भ्रष्टाचार एवं अपराध पर नियंत्रण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट, एसटीएफ एवं सैफ का गठन किया है. औद्योगिक विकास एवं निवेश  प्रोत्साहन हेतु वर्ष 2016 में नई नीति का निर्माण किया गया है, जिसके द्वारा बिहार में निवेशकों के अनुकूल वातावरण बनाने का प्रयास किया गया है.

संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करना

सूचना विज्ञान प्रौद्योगिकी आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है. इसके लिए सरकार ने 2007 में सूचना तकनीकी विभाग को एक नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया है. राज्य में संचार व्यवस्था को बढ़ावा देने के  लिए  लोक निजी भागीदारी के तहत बिहार स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क प्रोजेक्ट की स्थापना की गई है. जिससे सभी जिलों एवं प्रखंड कार्यालयों को जोड़ा गया है. प्रत्येक पंचायत एवं व्यक्ति तक ई-प्रशासन की पहुंच हो, इसके लिए वसुधा केंद्र की स्थापना की गई है. आम लोगों की प्रशासन तक पहुंच हो एवं आसानी से नियत समय सीमा पर सेवा उपलब्ध हो सके, इसके लिए सेवा का अधिकार अधिनियम 2011 को लागू किया गया है.

कृषि आधारित उद्योग की स्थापना द्वारा

कृषि विकास की असीम संभावना है. अतः राज्य के विकास की प्राथमिकताओं में कृषि को महत्व देते हुए नीति बनाने की जरूरत है. बिहार फल एवं सब्जी का प्रमुख उत्पादक राज्य है. फलों में आम, केला, लीची, मखाना, पपीता, अमरूद राज्य के प्रमुख उत्पाद है. फलों पर आधारित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना कर उनके मूल्यवर्धन में वृद्धि की जा सकती है. जिसे ना केवल प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होगी बल्कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

कुटीर उद्योग के सुदृढ़ीकरण द्वारा

बिहार में स्थानीय संसाधनों जैसे पत्थर तोड़ने एवं उससे संबंधित लघु एवं कुटीर उद्योग की स्थापना दक्षिण बिहार के रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई आदि जिलों में की जा सकती है. उत्तर बिहार में बड़ी-बड़ी जलमग्न भूमि (आद्रभूमि) स्थित है, जिसका विकास मत्स्यपालन के लिए किया जा सकता है, जिससे ना केवल श्रमिकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्राप्त होंगे.

कौशल विकास कार्यक्रम द्वारा

बिहार में मानव संसाधन की अधिकता है. इसका कौशल वर्धन कर रोजगारपरक बनाने की जरूरत है. इसके लिए बिहार को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने की जरूरत है. राज्य के अंदर ही गुणवत्तापूर्ण उच्च तकनीकी एवं व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ाकर न केवल इस भारी राशि के बाह्य प्रभाव को रोका जा सकता है, बल्कि दूसरे राज्यों के छात्रों को भी शिक्षण के लिए आकर्षित किया जा सकता है.

पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देकर

राज्य में पर्यटन उद्योग के विकास की असीम संभावना है. राज्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में धनी है. इन पर्यटक स्थलों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर और पर्यटक सर्किट विकसित कर राज्य में पर्यटन को एक उद्योग के रूप में स्थापित करने की जरूरत है. राज्य में बौद्ध सर्किट, जैन सर्किट आदि के विकास का कार्य किया जा रहा है

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