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ग्रामीण समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र (Subject area of ​​Rural Sociology)

लारी नेल्सन ने ग्रामीण समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र के संबंध में लिखा है कि “यह केवल सामुदायिक जीवन के क्षेत्रों में और क्षेत्रों के समझे गए समतल रूप को चित्र वर्णन मात्र नहीं समझता बल्कि संबंध के अनगिनत रूपों को आकाशीय ढांचे में सन्निहित कर लेता है।

दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि यह उन समस्त क्रियाकलापों की व्याख्या करता है जो ग्रामीण व्यक्ति के सामूहिक जीवन को बनाते हैं। इस तरह या एक विस्तृत शास्त्र है उतना ही विस्तृत जितना कि सामूहिक जीवन के विभिन्न रूप विस्तृत है।”

नेल्सन ने ग्रामीण समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र को त्रिआयामी (Three Dimensional) कहां है इनके अनुसार इसमें लंबाई, चौड़ाई और गहराई तीनों होती है। पहला, लंबाई या विस्तार इस प्रकार की यह शास्त्र ग्रामीण व्यक्तियों के सभी प्रकार के संबंधों का अध्ययन करता है यह सामूहिक जीवन का अध्ययन करता है इस अध्ययन का क्षेत्र इतना व्यापक है जितना कि सामूहिक जीवन के विभिन्न स्वरूप इसे नेल्सन ने विस्तार कहा है।

दूसरा गुण व्यापकता का है नेल्सन मानते हैं कि ग्रामीण शास्त्र भूतकाल, भविष्य काल और वर्तमान काल का अध्ययन करता है। उदाहरण के लिए यह संस्कृति के इतिहास, वर्तमान और भविष्य तीनों चित्रों को दर्शाता है। नेल्सन कहते हैं कि समाजशास्त्र के विद्यार्थी को अपने विषय सामग्री से संबंधित एक कालचित्र (Time Perspective) रखना चाहिए। नेल्सन इससे ग्रामीण समाजशास्त्र की व्यापकता कहते हैं।

तीसरा ग्रामीण समाजशास्त्र एक गहन शास्त्र है। यह शास्त्र व्यक्तियों के परिवर्तित होते हुए स्वरूप, अभिरुचियों और मूल्य आदि का अध्ययन करता है। इस प्रकार नेल्सन के अनुसार ग्रामीण शास्त्र का विषय क्षेत्र बहुत ही व्यापक और विशाल है।

अतः हम कह सकते हैं कि ग्रामीण समाजशास्त्र का क्षेत्र ग्रामीण सामाजिक संगठन, ग्रामीण सामाजिक संरचना, ग्रामीण सामाजिक संस्थाएं, ग्रामीण सामाजिक समूह, ग्रामीण सामाजिक प्रक्रियाएं, ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन, ग्रामीण सामाजिक समस्याओं आदि का अध्ययन करना है।

Ananya Swaraj,
Assistant Professor, Sociology

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