Home करेंट अफेयर्स अखबारों के सम्पादकीय हाथरस से सबक (हिन्दुस्तान)

हाथरस से सबक (हिन्दुस्तान)

हाथरस का इस तरह देश-दुनिया में चर्चा में आना न केवल दुखद, बल्कि शर्मनाक भी है। जो ज्यादती 14 सितंबर को हुई थी, उससे जुड़े जितने सच लोगों को नहीं पता, उससे कहीं ज्यादा अफवाह और सवाल हवा में हैं। बताने की कोशिश में इतने संशय पैदा हो गए हैं या छिपाने की कोशिश में? यह विडंबना ही है या समझ से जुड़ी कोई त्रासदी कि आज के सक्षम दौर में भी सूचनाओं पर खुले पहरे बिठाने की कवायद दिल्ली की सड़कों से हाथरस में बूलगढ़ी की गलियों तक नुमाया हुई है। क्या इस मामले को बूलगढ़ी या हाथरस के स्तर पर ही न्याय की दहलीज तक नहीं पहुंचाया जा सकता था? यदि अनेक कानूनी प्रावधानों के बावजूद हम महिलाओं और उसमें भी दलित महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो फिर हमें क्या किसी आईने में अपना चेहरा नहीं देखना चाहिए? बलात्कार की शिकार युवती की हालत यदि ज्यादा खराब थी, तो उसे पहले ही इलाज के लिए दिल्ली क्यों नहीं लाया गया? कौन लोग थे, जो हाथरस में उस युवती को न्याय दिलाने का कर्तव्य निभा रहे थे?
इस मामले में कदम-कदम पर न केवल व्यावहारिक, बल्कि इतनी विधिगत गलतियां हुई हैं कि यह मामला प्रशासन के लिए एक मिसाल बन गया है। देश के लिए भी अति महत्वपूर्ण हो चुके इस प्रकरण के जरिए प्रशासन के विद्यार्थियों को पढ़ाया-सिखाया जा सकता है कि किस चरण में क्या नहीं करना चाहिए और क्या करना चाहिए। पिछले वर्ष के आंकडे़ बताते हैं कि देश भर में हर दिन बलात्कार के 88 मामले सामने आते थे। इस साल भी स्थिति बहुत अलहदा नहीं होगी। लेकिन बेशक यह कुशल प्रशासन का ही नतीजा है कि चंद मामले ही चर्चा में आते हैं, ज्यादातर मामलों में स्थानीय स्तर पर ही यथोचित कार्रवाई कर दी जाती है। ऐसे में, यह समझना कठिन नहीं कि हाथरस का मामला विरल मामलों में कैसे शामिल हो गया? आखिर क्या जरूरत थी कि पीड़ित परिवार तक पहुंचने की तमाम कोशिशों पर पहरे बिठा दिए गए? कानूनी प्रावधानों को ताक पर रखकर कितने पत्रकारों की फोन टैपिंग हुई है? जब प्रशासन जरूरत से ज्यादा सवाल पैदा करने लगता है और जरूरत से कम जवाब देने लगता है, तो हालात ऐसे ही बिगड़ने लगते हैं। नेताओं को बलपूर्वक हाथरस जाने से रोका गया, लेकिन जब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को पीड़ित परिवार से मिलने दिया गया, तो क्या कोई भूचाल आ गया? हर राजनीतिक पार्टी और मीडिया को अपना दायरा पता है, सब सच जानना चाहते हैं। ज्यादा से ज्यादा सच और जवाब ही सबसे अच्छा समाधान है। हो सकता है, प्रशासन सही हो, पर आज सच जानने वालों पर पहरे बिठाने की कोशिश उसका सबसे बड़ा दोष है। न्याय कोई एकपक्षीय मामला नहीं होता, न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए। 
प्रशासन ही नहीं, पूरे समाज के लिए यह सोचने का समय है। बलात्कार जैसे अक्षम्य अपराध के विरुद्ध सामाजिक बाड़ेबंदियां पलक झपकते टूट जानी चाहिए। धार्मिक, सामाजिक, इंसानी या सांविधानिक, ऐसा कोई आधार नहीं है, जो हमें जाति के आधार पर पक्षपात के लिए प्रेरित करता हो। खेमेबाजी राजनीति के लिए मुफीद भले हो, लेकिन वह हमें सार्वभौमिक सुरक्षा का एहसास कतई नहीं करा सकती और सुरक्षा करना तो दूर की कौड़ी है। हाथरस से हमें सबक लेने की जरूरत है, ताकि फिर ऐसे छिपने-छिपाने की जरूरत न पडे़।

Source link


Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by DEFINITE BPSC.

हमारा सोशल मीडिया

29,751FansLike
25,786SubscribersSubscribe

Must Read

कैसी हो पुलिस, समाज तय करे (हिन्दुस्तान)

टेलीविजन रेटिंग प्वॉइंट्स (टीआरपी) घोटाले की आंच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। राज्य सरकार की सिफारिश पर हजरतगंज (लखनऊ) पुलिस स्टेशन...

हास्यास्पद कार्रवाई (हिन्दुस्तान)

यह घटना जितनी दर्दनाक है, उसके बाद के घटनाक्रम उतने ही हास्यास्पद हैं। असम के लमडिंग रिजर्व फॉरेस्ट में 27 सितंबर को मालगाड़ी...

मदद और सम्मान मांगती ईमानदारी  (हिन्दुस्तान)

ऋण चुकाने में ईमानदारी को प्रोत्साहन देने की ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि कोविड-19 के...

विसंगतियों का चुनाव (हिन्दुस्तान)

विधानसभा चुनाव राज्यों के सिर्फ राजनीतिक रुझान का पता नहीं देते, वे उनके सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने, नागरिकों की राजनीतिक जागरूकता और आर्थिक हालात से...

Related News

कैसी हो पुलिस, समाज तय करे (हिन्दुस्तान)

टेलीविजन रेटिंग प्वॉइंट्स (टीआरपी) घोटाले की आंच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। राज्य सरकार की सिफारिश पर हजरतगंज (लखनऊ) पुलिस स्टेशन...

हास्यास्पद कार्रवाई (हिन्दुस्तान)

यह घटना जितनी दर्दनाक है, उसके बाद के घटनाक्रम उतने ही हास्यास्पद हैं। असम के लमडिंग रिजर्व फॉरेस्ट में 27 सितंबर को मालगाड़ी...

मदद और सम्मान मांगती ईमानदारी  (हिन्दुस्तान)

ऋण चुकाने में ईमानदारी को प्रोत्साहन देने की ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि कोविड-19 के...

विसंगतियों का चुनाव (हिन्दुस्तान)

विधानसभा चुनाव राज्यों के सिर्फ राजनीतिक रुझान का पता नहीं देते, वे उनके सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने, नागरिकों की राजनीतिक जागरूकता और आर्थिक हालात से...

बिहार समाचार (संध्या): 20 अक्टूबर 2020 AIR (Bihar News + Bihar Samachar + Bihar Current Affairs)

घर बैठे BPSC परीक्षा की तैयारी: https://definitebpsc.com/ Industrial Dispute in Hindi: https://www.youtube.com/watch?v=y3W56i3zkds हमारा Telegram चैनल - https://t.me/DefiniteBPSC हमारा फेसबुक पेज लाइक करिये -...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here