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सद्भाव का मंदिर (हिन्दुस्तान)

आज अयोध्या की ओर सबकी दृष्टि है, तो यह न केवल स्वाभाविक, बल्कि स्वागत के योग्य भी है। हमारे संसार में जाति, पंथ, धर्म व पार्टी की सीमाओं से परे एक विशाल जन-समुदाय है, जो दशकों से इस अवसर की प्रतीक्षा में था कि मान्यता-आस्था अनुसार, अयोध्या में एक भव्य राममंदिर का निर्माण हो। आज वह समय आ चुका है। भूमि पूजन का अनुष्ठान सोमवार से ही चल रहा है और बुधवार को प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी भूमि पूजन परंपरा को पूरा करेंगे। परंपरा के अनुसार, एक से एक साधु, विद्वान, आचार्य धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करने में लगे हैं। इस खास अवसर के लिए अयोध्या को खूब सजाया गया है। कोरोना  के कारण भीड़ कम होने से अयोध्या की भव्यता बहुत बढ़ गई है। अनावश्यक भीड़ या ट्रैफिक को रोकने के प्रबंध किए गए हैं, तो कोई आश्चर्य नहीं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के सामने यह बड़ी चुनौती है कि इस आयोजन को शांत और धार्मिक परिवेश में सहजता से पूरा किया जाए। मंदिर स्थल और पूरी अयोध्या में भारी सुरक्षा व्यवस्था है। एनएसजी कमांडो सहित लगभग 4,000 सुरक्षाकर्मी मंदिर स्थल के पास तैनात किए गए हैं और 75 चेक पोस्ट बनाए गए हैं। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन को महामारी की रोकथाम पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और राज्य सरकार पर भी सबकी निगाहें हैं। यह बात छिपी नहीं है कि अनेक लोगों और नेताओं ने कोरोना के हवाले से इस आयोजन को अभी न करने की मांग की है। बेशक, आयोजन में किसी भी तरह की लापरवाही आलोचकों को मौका दे सकती है। अत: आयोजकों को पूरी तैयारी और सहृदयता का परिचय देना होगा। 
मंगलवार को मंदिर का प्रस्तावित मॉडल भी जारी कर दिया गया, जो पहले वाले मॉडल से ज्यादा भव्य दिख रहा है। ट्रस्ट का यह प्रयास सराहनीय है कि राम जन्मभूमि मंदिर विश्व में भारतीय स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण बने। दुनिया में तमाम धर्मों के एक से एक धर्मस्थल हैं, यह मंदिर भी उनमें शुमार होगा, यह भारत के लिए भी गौरव की बात होगी। भारत में मंदिर निर्माण की बागडोर संभाल रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सदैव सजग रहना होगा कि लोगों के धन से बन रहा यह मंदिर उनका है, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। राम ने अपने जीवन में एक-एक मर्यादा की पालना की थी और विश्व के सामने एक आदर्श रखा था। पुत्र, भाई, पिता, पति, राजा, मित्र आदि तमाम स्वरूपों में राम सिर्फ भारत में आदर्श रूप में नहीं देखे जाते हैं। यह भी ध्यान रहे कि मंदिर निर्माण के प्रति जो उत्साह है, वह केवल हिंदुओं में ही नहीं है। सभी धर्मों में ऐसे लोगों की अच्छी संख्या है, जो चाहते हैं कि रामजी की भावना के अनुरूप उनका एक मंदिर उनके जन्मस्थान पर निर्मित हो। 
यह मंदिर निर्माण भारत के लिए एक अवसर है। हम जिन अनिवार्य जीवन मूल्यों को भूलते जा रहे हैं, उन्हें फिर से व्यवहार में लाने की शुरुआत करने का अवसर है। मानवीयता, प्रेम, मित्रता, सद्भाव का जो टोटा पड़ने लगा है, उसे दूर करना जरूरी है। देश को विश्व गुरु बनाने का जो सपना देखा गया है, उसे पूरा करने की दिशा में भी राम के गुण हमारे काम आ सकते हैं। पूरे वैभव के साथ राम के विराजने का लाभ न केवल अयोध्या, बल्कि पूरे देश और दुनिया को होना चाहिए।

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