Home करेंट अफेयर्स अखबारों के सम्पादकीय रोजगार लौटने की बढ़ती उम्मीदें  (हिन्दुस्तान)

रोजगार लौटने की बढ़ती उम्मीदें  (हिन्दुस्तान)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 26 जून को ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ का शुभारंभ कर दिया। वास्तव में, यह देश में कोरोना काल में रोजगार के लिए शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान है, जिस पर अपने राज्य लौटे मजदूरों के साथ ही देश की भी नजरें टिकी हैं। इसके तहत देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में करीब सवा करोड़ लोगों को विभिन्न परियोजनाओं के तहत रोजगार नसीब होगा। 
वस्तुत: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान’ का मुख्य लक्ष्य प्रदेश में वापस आए प्रवासी कामगारों को उनके ही क्षेत्र में हुनर व रुचि के आधार पर रोजगार प्रदान करने, स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए औद्योगिक संगठनों और अन्य संस्थानों को साथ जोड़ना है। जब लोग भी रोजगार के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं, तब यह एक सराहनीय कदम है। देश के विभिन्न राज्यों में भी रोजगार निर्माण के लिए ऐसे विशेष अभियानों की जरूरत दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के इस अभियान से अन्य राज्यों को भी यथोचित प्रेरणा मिलेगी।
आज निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के प्रयासों के साथ ही सरकारी स्तर पर ऐसी पहल बहुत जरूरी है। विशेष अभियानों के अलावा सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर तत्परता के साथ नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने पर भी ध्यान देना होगा। सरकार ने विगत 14 मार्च को संसद में बताया है कि रेलवे, रक्षा, डाक सहित अन्य सरकारी विभागों में करीब 4.76 लाख भर्तियां की जानी हैं। इनमें से यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड के जरिए 1.34 लाख और रक्षा विभाग में 3.4 लाख खाली पदों को भरा जाना है। केंद्र सरकार के अलावा राज्यों सरकारों के भी लाखों पद रिक्त हैं। सरकार के स्तर पर रिक्त पदों को भरने के लिए भी विशेष अभियान चलाने की जरूरत है। विशेष रोजगार अभियान को कुछ बहुत जरूरतमंद जिलों में चलाने के साथ ही मनरेगा में भी कोई कमी नहीं होनी चाहिए। काम मांगने वाले लोगों को रोजगार देकर समाज को व्यापक संकट से बचाया जा सकता है। ज्यादा लोगों को रोजगार देने से अर्थव्यवस्था को भी सीधे फायदा होगा। इससे मांग और आपूर्ति बढ़ेगी, विकास दर में तेजी आएगी।
यह साफ दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 और लॉकडाउन की वजह से देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार संकट ज्यादा बढ़ा है। इस दौर में देश में बेरोजगारी की चुनौती कितनी तेजी से बढ़ी है, इसका अनुमान प्राइवेट थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर मॉनिर्टंरग इंडियन इकोनॉमी’ द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इसके मुताबिक, भारत में जनवरी 2020 में बेरोजगारी दर 7.2 प्रतिशत थी, यह फरवरी में 7.8 प्रतिशत और मार्च में 8.7 प्रतिशत हो गई। यह अप्रैल 2020 में 23.52 फीसदी तथा मई 2020 में 23.48 फीसदी हो गई। यद्यपि लॉकडाउन समाप्त होने के साथ-साथ बेरोजगारी दर में कमी बताई जा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। 
युवाओं को अपना मनोबल और व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना चाहिए। चुनौतियां बढ़ी हैं, पर स्थिति ऐसी बुरी भी नहीं है कि जिससे उबरना मुश्किल हो। अच्छा रोजगार चाह रहे लोगों को किसी न किसी चीज में विशेषज्ञता या कार्य कुशलता के लिए प्रयास जरूर करना होगा। विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों में तथ्य उभरकर सामने आ रहा है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर में जोरदार गिरावट होगी, लेकिन आगामी वित्त वर्ष 2021-22 में देश की विकास दर में तेजी दिखाई देगी। भारत में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। ऐसे में, दुनिया के मानव संसाधन शोध संगठनों का कहना है कि कोविड-19 की चुनौतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं शीघ्रतापूर्वक बाहर निकलेगी और रोजगार के मौके बढ़ेंगे। पिछले दिनों न्यूयॉर्क के मैनपॉवर ग्रुप द्वारा प्रकाशित 44 देशों के रोजगार के वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, कोविड-19 के बीच रोजगार के मामले में सकारात्मक परिवेश दिखाने वाले दुनिया के चार शीर्ष देशों में भारत भी शामिल है। भारत के अलावा केवल जापान, चीन और ताइवान में रोजगार को लेकर सकारात्मक परिदृश्य पाया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद और कोरोना काल के बीच भारत में जुलाई से सितंबर 2020 की तिमाही में पांच सेक्टरों- खदान, निर्माण, वित्त, बीमा और रियल एस्टेट में नौकरियों के नए रास्ते खुलेंगे। 
प्रमुख मानव संसाधन कंपनी टीमलीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के चार महानगरों, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को छोड़कर मेट्रो के रूप में उभरते शहरों- बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, चंडीगढ़, कोच्चि, कोयंबटूर, आदि में रोजगार बढें़गे। इन शहरों में हेल्थ, फार्मा, ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, कृषि, एग्रो-केमिकल्स, ऑटो-मोबाइल्स और इनसे जुड़ी सेवाओं, बीपीओ सेवाएं, निर्माण तथा रिएल एस्टेट व ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के मौके तेजी से बढ़ेंगे। इसमें कोई दो मत नहीं है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दिए गए आर्थिक पैकेज से देश के उद्योग-कारोबार क्षेत्र को जो लाभ मिलेगा, उससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे। 
युवाओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोविड-19 के बाद आने वाले वर्षों में दुनिया के कई देशों में अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए प्रशिक्षित युवा हाथों की कमी होने वाली है। मानव संसाधन परामर्श संगठन कार्न फेरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल श्रम बल का संकट होगा, वहीं भारत के पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कुशल श्रम बल होगा। साल 2030 तक दुनिया के 19 विकसित व कई विकासशील देशों में 8.52 करोड़ कुशल श्रम शक्ति की कमी हो जाएगी। ऐसे में,भारत इकलौता देश होगा, जिसके पास 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल श्रम बल होगा। भारत दुनिया के तमाम देशों में कुशल श्रम बल को भेजकर फायदा उठा सकेगा।
निजी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इससे सरकारों की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। सरकारों को अपनी रोजगार योजनाओं को चाक-चौबंद तरीके से चलाकर समाज में राहत का भाव बनाए रखना होगा। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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