Home करेंट अफेयर्स अखबारों के सम्पादकीय बहिष्कार नहीं, बड़ी लकीर खींचें (हिन्दुस्तान)

बहिष्कार नहीं, बड़ी लकीर खींचें (हिन्दुस्तान)

कोविड-19 के इलाज में हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन की भूमिका वाला अध्याय अब खत्म हो चुका है। लेकिन इस समय उसे याद करने की सबसे ज्यादा जरूरत है। दो महीने पहले, जब अचानक इस दवा की मांग उठी, तो पता चला कि पूरी दुनिया में इसका सबसे बड़ा उत्पादक भारत है। उस समय तक शायद ज्यादातर भारतीय भी इसे नहीं जानते थे। बढ़ी मांग का अर्थ था कि भारतीय कंपनियां इसका उत्पादन तेजी से बढ़़ाएं, तभी पता लगा कि इस दवा का उत्पादन करने वाली भारतीय कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। यह अकेला प्रकरण हमें कई चीजें बताता है। फिलहाल यहां हम ग्लोबलाइजेशन के उस अद्भुत अपूर्व स्वप्न की बात नहीं करेंगे, जो यह कहता रहा है कि कारोबार के मामले में पूरी दुनिया एक है, असली चीज है बाजार और इसमें मेरा, तेरा, उसका की बात नहीं होनी चाहिए।
हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन के बाजार में भारत की बादशाहत करीब ढाई दशक पुरानी उस नीति से उपजी थी, जिसमें यह तय किया गया था कि भारत को अब गैर-पेटेंट दवाओं के कारोबार का बड़़ा खिलाड़ी बनना है। और कुछ ही समय में हम बल्क ड्रग कारोबार के सबसे बड़े खिलाड़ी बन भी गए। इस कामयाबी का सबसे बड़ा उदाहरण हम ईरान में देख सकते हैं। दशकों से चली आ रही अमेरिकी पाबंदियों के दौरान ईरान की सबसे बड़़ी समस्या दवाओं को लेकर रही है। भारत से निर्यात होने वाली दवाओं ने न सिर्फ उसकी इस जरूरत को पूरा किया है, बल्कि इस दौरान वहां लाखों लोगों की जान भी बचाई। बल्क ड्रग कारोबार में कामयाबी दो चीजों पर निर्भर करती है। एक तो दवाओं की गुणवत्ता और इसी के साथ स्पद्र्धा वाले बाजार में उनकी कम कीमत। गुणवत्ता के मामले में तो भारतीय कंपनियों ने महारत हासिल कर ली, लेकिन कीमत कम रखने के लिए सस्ता कच्चा माल चीन में ही आसान विकल्प था, इसलिए यह कारोबार कई मामलों में चीन पर निर्भर हो गया। 
दूसरे शब्दों में कहें, तो कामयाबी की हमारी इस कोशिश में चीन ने भी एक भूमिका निभाई। और अगर इसी को अलग तरह से देखें, तो चीन आज जिस तरह से आर्थिक ताकत बना है, उसमें अपने सपनों के लिए चीन पर हमारी निर्भरता की भी एक भूमिका है। पिछले तीन दशक में दुनिया के तमाम विकसित और विकासशील देशों को इस तरह की निर्भरताएं देता हुआ चीन लगातार आगे बढ़ता गया है। पर क्या अब उसके उत्पादों और उसकी कंपनियों के बहिष्कार से चक्र को उल्टा घुमाया जा सकता है?
यह सवाल इस समय इसलिए जरूरी है कि पूरा सोशल मीडिया चीन और उसके उत्पादों के बहिष्कार की अपीलों से पटा पड़ा है। यह सिलसिला कोरोना संकट के पैदा होने के साथ ही शुरू हो गया था, लेकिन सीमा पर उसकी आक्रामकता ने इसे बढ़़ा दिया और पिछले मंगलवार को जब यह खबर आई कि लद्दाख के गलवान क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों की टुकड़ी पर हमला बोलकर 20 की जान ले ली, तब से यह शोर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर ऐसा उबाल जल्द ही बेहूदगी की हद तक पहुंच जाता है। हैशटैग बायकॉट चाइना के तहत पहले चीन में बने फोन और टीवी तोड़ने के वीडियो शेयर किए गए, फिर एक संदेश यह भी आया कि गुजरात में नमर्दा नदी के तट पर बनी सरदार पटेल की विशाल प्रतिमा को हटा लेना चाहिए, क्योंकि उसका निर्माण एक चीनी कंपनी ने किया है।
मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए भारत सरकार ने अपने आप को ऐसे किसी उबाल से दूर रखा है। एकाध केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने इससे सुर मिलाने की कोशिश जरूर की। इस बीच कुछ चीनी कंपनियों के ठेके जरूर रद्द हुए हैं, जिसे सरकार की मंशा के रूप में भी पेश किया जा रहा है। वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब चीन के उत्पादों के बहिष्कार पर उबाल दिखा हो। यही डोका ला विवाद के समय भी हुआ था और यही तब भी हुआ था, जब मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का साथ दिया था। इसके बावजूद भारतीय बाजार में चीन की हिस्सेदारी बढ़ती रही। 
क्या इस बार बहिष्कार की यह मुहिम चीन की अक्ल ठिकाने लगाने में कामयाब हो सकेगी? क्या सीमा पर चीन की हिमाकत का यही सही जवाब है? और सबसे बड़़ा सवाल यह है कि क्या बहिष्कार का यह रास्ता भारत को एक बड़ी आर्थिक ताकत बनाने की ओर ले जाएगा? यह तीसरा सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि बहिष्कार के तर्कों में अक्सर सारा जोर इसी पर होता है।
कोई भी देश बड़ी आर्थिक ताकत कैसे बनता है? इसके बहुत सारे उदाहरण हैं। सबसे पहले चीन का उदाहरण ही लेते हैं। चीन पूरे माओ युग में बहिष्कार वाला देश था। लंबे समय तक उसने पश्चिमी उत्पादों का बहिष्कार किया। वह ताकत तो था, लेकिन आर्थिक ताकत नहीं। आर्थिक ताकत वह बहिष्कार के युग से बाहर निकलने के बाद ही बना। इससे अच्छा उदाहरण जापान का है। दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने परमाणु बम गिराकर सिर्फ हिरोशिमा और नागासाकी को ही बरबाद नहीं किया, बल्कि जापान के अहं और गौरव को भी भारी ठेस पहुंचाई। बाद में जब आर्थिक तरक्की का युग शुरू हुआ, तो जापान ने कभी अमेरिका के बहिष्कार की बात नहीं की, लेकिन बाजार के खेल में उसने अमेरिका को मात दे दी। तरक्की का रास्ता बहिष्कार से नहीं, ज्यादा बड़ी लकीर खींचने से निकलता है। बहिष्कार करके आप खुद को ही उस रेस से बाहर कर लेते हैं, जिसे दरअसल आप जीतना चाहते हैं।
एक उदाहरण वालमार्ट का है। वालमार्ट भारत में न आए, इसके लिए कई राजनीतिक दलों ने जी जान लगा दी थी। हालांकि पिछले दरवाजे से वह चली आई। चीन में ऐसा नहीं हुआ। वालमार्ट बिना किसी विरोध के चीन में आई और उसने सैकड़ों स्टोर खोलकर वहां छाने की कोशिश की। लेकिन जल्द ही चीन की कुछ कंपनियों ने ज्यादा बड़ी लकीर खींच दी। इस समय चीन के संगठित रिटेल बाजार में वालमार्ट पांचवें नंबर की कंपनी है और चीन की अलीबाबा दुनिया के रिटेल बाजार की नंबर एक कंपनी बन चुकी है। 
फिलहाल हमारे सामने दोनों रास्ते खुले हैं- चीन के उत्पादों का बहिष्कार या उससे बड़ी लकीर खींचना। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Source link

हमारा सोशल मीडिया

29,468FansLike
25,786SubscribersSubscribe

Must Read

BPSC APO की 553 भर्ती : 162 उम्मीदवारों की एप्लीकेशन रिजेक्ट, देखें पूरी लिस्ट

बिहार लोक सेवा आयोग (पीएससी) ने सहायक अभियोजन पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा-2019 के उन अभ्यर्थियों की सूची जारी की है जिनके आवेदन किसी न...

ताकि घर के पास मिले रोजगार (हिन्दुस्तान)

अंग्रेज भारत को वनों का महासागर कहते थे। इन पेड़-पौधों को ग्राम और आदिवासी समूहों ने पाला-पोसा था। दादाभाई नौरोजी के शब्दों में...

जरूरी परिपक्वता (हिन्दुस्तान)

राज्यसभा में रक्षा मंत्री ने भारत का पक्ष जिस तरह से पेश किया, उसकी सराहना होनी चाहिए। पड़ोसी देश के प्रति जहां दृढ़ता...

बिहार समाचार (संध्या): 17 सितम्बर 2020 AIR (Bihar News + Bihar Samachar + Bihar Current Affairs)

घर बैठे BPSC परीक्षा की तैयारी: https://definitebpsc.com/ Industrial Dispute in Hindi: https://www.youtube.com/watch?v=y3W56i3zkds हमारा Telegram चैनल - https://t.me/DefiniteBPSC हमारा फेसबुक पेज लाइक करिये -...

Related News

BPSC APO की 553 भर्ती : 162 उम्मीदवारों की एप्लीकेशन रिजेक्ट, देखें पूरी लिस्ट

बिहार लोक सेवा आयोग (पीएससी) ने सहायक अभियोजन पदाधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा-2019 के उन अभ्यर्थियों की सूची जारी की है जिनके आवेदन किसी न...

ताकि घर के पास मिले रोजगार (हिन्दुस्तान)

अंग्रेज भारत को वनों का महासागर कहते थे। इन पेड़-पौधों को ग्राम और आदिवासी समूहों ने पाला-पोसा था। दादाभाई नौरोजी के शब्दों में...

जरूरी परिपक्वता (हिन्दुस्तान)

राज्यसभा में रक्षा मंत्री ने भारत का पक्ष जिस तरह से पेश किया, उसकी सराहना होनी चाहिए। पड़ोसी देश के प्रति जहां दृढ़ता...

बिहार समाचार (संध्या): 17 सितम्बर 2020 AIR (Bihar News + Bihar Samachar + Bihar Current Affairs)

घर बैठे BPSC परीक्षा की तैयारी: https://definitebpsc.com/ Industrial Dispute in Hindi: https://www.youtube.com/watch?v=y3W56i3zkds हमारा Telegram चैनल - https://t.me/DefiniteBPSC हमारा फेसबुक पेज लाइक करिये -...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here