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पाकिस्तान में हमला (हिन्दुस्तान)

कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान के लिए न सिर्फ दुख और चिंता की घड़ी है, बल्कि इस हमले ने यह भी जता दिया है कि आतंकी इंसानियत से दुश्मनी निभाने में बहुत नीचे उतर गए हैं। चार आतंकियों ने सोमवार सुबह बंदरगाह शहर कराची में पाकिस्तान के सबसे बड़े और सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज पर हमला बोल दिया। पहले ग्रेनेड और फिर बंदूक से किए गए इस हमले में मौके पर ही करीब पांच लोग मारे गए हैं। अच्छा हुआ कि सुरक्षाकर्मियों ने जल्द ही चार आतंकियों को शांत कर दिया, वरना कराची के बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक इलाके में तबाही का आलम होता। अब एक-एक दोषी पर शिकंजा कसना कराची पुलिस और सुरक्षा बलों का मुख्य मकसद हो जाना चाहिए। पिछले कुछ महीनों से कराची में स्थिति कुल मिलाकर ठीक थी और यहां के शासन-प्रशासन ने मेहनत करके शहर को कुछ सुधारा था। कभी कराची अपराध, राजनीतिक और जातीय हिंसा का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था। हथियारों से लैस समूहों में आपस में भिड़ंत होती रहती थी। कभी आवासीय क्षेत्रों पर भी हमले होने लगे थे। फिर भी हाल के वर्षों में सशस्त्र राजनीतिक संगठनों और कट्टर आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कार्रवाई के बाद स्थिति काफी हद तक संभल गई थी। पर इस हमले ने कराची को फिर चिंता में डाल दिया है। 
आज पाकिस्तान जिस आर्थिक स्थिति में है, उसमें कराची जैसे व्यावसायिक केंद्रों का महत्व बहुत ज्यादा है। गौरतलब है कि स्टॉक एक्सचेंज कराची के वित्तीय इलाके के केंद्र में है। यहां पाकिस्तान स्टेट बैंक के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के मुख्यालय भी हैं। ऐसे में, इस आतंकी हमले की गंभीरता को समझा जा सकता है। इसके पहले साल 2018 में अलगाववादी आतंकियों ने कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला किया था, जिसमें चार लोग मारे गए थे। 
ताजा हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को यह समझना होगा कि उनके द्वारा आगे बढ़ाए गए कौन-से आतंकी समूह ऐसे हैं, जो अपने ही देश को तबाह कर देना चाहते हैं। एक तो वैसे ही कोरोना का कहर है, जिससे पाकिस्तान में दो लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और 4,000 से ज्यादा लोगों को जान गंवानी पड़ी है। ऐसे विकट समय में भी आतंकियों को अगर हिंसा सूझ रही है, तो उनकी मानसिकता की जितनी भत्र्सना की जाए, कम होगी। साथ ही, ऐसी मानसिकता को खाद-पानी देने वाले पाकिस्तान को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। हिंसा और आतंकवाद को जिस तरह से उसने पनपने दिया गया है, जिस स्तर की अंधी संकीर्णता वहां जड़ें जमा चुकी है, उससे तत्काल पीछे हटने की जरूरत है। दुनिया को दिखाने के लिए केवल यह बोल देना ही काफी नहीं है कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं या हम खुद भी पीड़ित हैं। ऐसे दिखावटी दावों से पाकिस्तान आगे बढ़ने को तैयार नहीं है, और इसी का उसे खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पाकिस्तानी प्रतिष्ठान की इसी कमी ने उसे न केवल दुनिया, बल्कि स्वयं अपने लोगों में अविश्वसनीय बना रखा है। जरूरी है कि पाकिस्तान जमीनी हकीकत पर गौर करे, तभी वह अपने यहां आतंकी हमलों को रोक पाएगा और दूसरे देशों व विश्व मंचों पर शर्मसार होने से बचेगा।
 

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