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दरिद्र नारायण की सुधि (हिन्दुस्तान)

कोरोना, बारिश और त्योहारों के समय गरीब वर्ग को अन्न से संबल देने का प्रयास सराहनीय और स्वागतयोग्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजा घोषणा मूल रूप से देश के दरिद्र नारायण की सुधि लेने की ऐसी कोशिश है, जिसकी उम्मीद पिछले एक महीने से बंधी हुई थी। सरकार ने जुलाई से नवंबर तक पूरे पांच महीने तक देश के करीब 80 करोड़ जरूरतमंदों को पांच-पांच किलो गेहूं या चावल और चना मुफ्त देने का जो फैसला किया है, उससे देश को एक मानवीय आधार मिलेगा। यह आधार पूरे गुजारे के लिए भले पर्याप्त न हो, लेकिन इससे अभावग्रस्त परिवारों का मनोबल बढे़गा। इस राहत के उपरांत वे अपने थोडे़ से प्रयास या रोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने दिन ठीक से गुजार सकेंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के नवंबर तक विस्तार से अभावग्रस्त लोगों को अपने यथास्थान रहने की प्रेरणा भी मिलेगी। विशेष रूप से बिहार जैसे श्रमिक बहुल राज्य में छठ पूजा का बहुत महत्व है, जिसे प्रधानमंत्री ने भी जाहिर किया है। बड़ी संख्या में ऐसे कामगार होंगे, जो अब नवंबर में छठ पूजा के समापन के बाद ही यात्रा की योजना बनाएंगे। बेशक, देखने वाले इस घोषणा को चुनाव से जोड़कर भी देखेंगे, लेकिन वह भी इस योजना के व्यापक महत्व से इनकार नहीं कर पाएंगे। एक और अच्छी बात है कि इस योजना का श्रेय किसानों और ईमानदार करदाताओं को दिया गया है। 
जब देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है, तब सरकार का लोक-कल्याणकारी स्वरूप सशक्त होना ही चाहिए। इस योजना के विस्तार पर अगर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे, तो कोई बात नहीं। इस देश में ऐसी क्षमता है कि वह गरीबों के साथ खड़ा हो सकता है। यदि कोरोना के समय अमेरिका की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक लोगों को हमारी सरकारों ने मुफ्त अनाज दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। बहरहाल, यह भी जरूरी है कि ऐसी उदार योजनाओं का लाभ पूरी ईमानदारी से जरूरतमंदों तक पहुंचे। निचले स्तर पर वितरण से जुड़े लोगों के लिए भी यह परीक्षा और दरिद्र नारायण की सच्ची सेवा का समय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी बहाने से किसी भी जरूरतमंद को योजनाओं के लाभ से वंचित न किया जाए। 
प्रधानमंत्री के भाषण में एक और महत्वपूर्ण बात शामिल है, जो सबका ध्यान खींच रही है। ‘एक देश एक राशन कार्ड’ की घोषणा वैसे तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई महीने के मध्य में ही कर दी थी और उन्होंने यह भी बता दिया था कि ऐसा मार्च 2021 में संभव हो जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री के बोलने से लोगों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। एक देश एक राशन कार्ड लंबे समय से इस देश की जरूरत रही है। सभी राज्य अगर इस व्यवस्था को मिलकर पहले ही साकार कर लेते, तो संभव है, कोरोना के समय लाखों की संख्या में लोगों को अपने घर न लौटना पड़ता। जो जहां है, वहीं रहता और वहीं उसे राशन कार्ड के तहत जरूरी सामान और अनाज उपलब्ध करा दिया जाता। अब समय आ गया है कि एक देश एक राशन कार्ड और मुफ्त अनाज जैसे बुनियादी इंतजामों को स्थानीय सियासत से परे रखकर मदद का स्थाई ढांचा विकसित किया जाए। ऐसी मदद की व्यवस्था जितनी उदार और व्यापक बनेगी, हमारा देश उतनी ही राहत और खुशी महसूस करेगा।

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