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जाधव के लिए अभियान (हिन्दुस्तान)

कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान की चालाकी न सिर्फ इंसाफ, बल्कि इंसानियत की भी तौहीन है। भारत को परेशान करने का कोई भी मौका वह जाने देना नहीं चाहता और जब सामान्य रूप से उसे मौका नहीं मिलता, तब वह जबरन मौके गढ़ लेता है। जाधव का पूरा मामला पाकिस्तान की इसी गलत प्रवृत्ति का नतीजा है। पाकिस्तान ने अब भारत और दुनिया को यह सूचित किया है कि जाधव कोई पुनर्विचार याचिका नहीं लगाना चाहते, वह सिर्फ दया याचिका पर तवज्जो चाहते हैं। पाकिस्तान का यह व्यवहार न्यायप्रियता के सरासर खिलाफ है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने जुलाई 2019 में यह फैसला सुनाया था कि जाधव पर फिर से मुकदमा चलाया जाए। वह भारत के लिए बड़ी जीत थी, लेकिन पाकिस्तान भारत की उस जीत पर पानी फेरने की कोशिश में अभी भी लगा है। पाकिस्तान के साथ समस्या यह है कि यदि वह अदालत में सही ढंग से मुकदमा चलने दे, तो जाधव को बरी कराने में भारत को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। जैसे सुबूतों के आधार पर जाधव को जासूसी और आतंकवाद के इल्जाम में कैद किया गया है, वे किसी भी न्यायप्रिय अदालत में टिक नहीं पाएंगे। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अपने स्तर पर एकतरफा फैसला करते हुए जाधव को मृत्युदंड की सजा सुना रखी है और उसने इस  फैसले को अपने कथित सम्मान से जोड़ लिया है। जाधव को सजा होती है, तो यह इंसानियत पर   किसी धब्बे से कम नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान ने पूरा जोर लगाया था, पर जो सुबूत वहां नहीं टिक सके, वे पाकिस्तानी अदालत में भी नहीं टिकेंगे। चूंकि भारत जाधव को बचाने के लिए अच्छे से अच्छा वकील कर सकता है, इसलिए पाकिस्तान मामले को अदालत में पहुंचने ही नहीं दे रहा। 
यह मानने में कोई हर्ज नहीं कि जाधव पर दबाव डालकर पाकिस्तान ने मनमाफिक आवेदन कराया है। क्या पाकिस्तानी जेल में बंद जाधव सही न्यायपूर्ण सुनवाई के पक्ष में नहीं होंगे? क्या उन्हें नहीं पता होगा कि भारत ने अपने किन प्रयासों से उनके प्राण की रक्षा की है? कोई भी अपनी जान क्यों जोखिम में डालना चाहेगा? यह दुनिया को पता चल चुका है कि जाधव के खिलाफ गलत ढंग से मुकदमा चलाया गया था। पाकिस्तान की सैन्य अदालत और सरकार, दोनों की जगहंसाई हुई थी। ऐसे में, पाकिस्तान सरकार को स्वयं आगे बढ़कर सुधार करना था, पर उसने भलमनसाहत का एक मौका हाथ से फिर जाने दिया।
पाकिस्तान का यह बहाना सही नहीं है कि उसने भारतीय उच्चायोग को कई पत्र लिखकर अपील दाखिल करने को कहा था। सच्चाई यह है कि भारतीय पक्ष या जाधव को मामले में कोर्ट का आदेश, एफआईआर की प्रति या कोई अन्य सुबूत मुहैया नहीं कराए गए। बिना सुबूतों के याचिका कैसे दायर होती है, सुनवाई और सजा कैसे होती है, इसमें पाकिस्तान माहिर है, पर दुनिया सब देख रही है। भारत को नए सिरे से प्रयास करने पड़ेंगे। यदि आईसीजे में फिर जाना पड़े, तो पूरी तैयारी के साथ जाना चाहिए, ताकि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की पोल अच्छी तरह खुल जाए। जाधव की सुरक्षित और न्यायपूर्ण रिहाई का अभियान तेज होना चाहिए। इंसाफ की ओर बढ़ने वाला हमारा एक-एक कदम पाकिस्तान की बेईमानी या दुश्मनी को जर्रा-जर्रा बेनकाब करेगा।

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