Home करेंट अफेयर्स अखबारों के सम्पादकीय जसराज से जा मिले रसराज (हिन्दुस्तान)

जसराज से जा मिले रसराज (हिन्दुस्तान)

हमारे राष्ट्रीय मानस में पंडित मार्तंड जसराज गहरे बसे रहे। वह हमारे सांस्कृतिक लोकाचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। उनके गुजर जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसको कभी भरा नहीं जा सकता। यह शून्य मेरे निजी जीवन के लिए कहीं अधिक गहरा है। ऐसा कोई शुभ अवसर मुझे याद नहीं आता, जब उन्होंने अपनी जादुई आवाज में मुझे शुभकामना न दी हो, फिर चाहे वह मौका मेरे गृह प्रवेश का हो या मेरे बेटे की शादी का।
पंडित जसराज हमारी शास्त्रीय गायन परंपरा के महान चटुष्टय के आखिरी स्तंभ थे। ये चार महान गायक थे- किराना घराने से ताल्लुक रखने वाले पंडित भीमसेन जोशी; जयपुर घराने की किशोरी अमोनकर; सेनिया और बनारस घराने की गिरिजा देवी, और मेवाती घराने के खुद पंडित जसराज। भारतीय संगीत के प्रति अपने गहरे लगाव के कारण मुझे इन चारों के साथ निजी ताल्लुकात बनाने का सौभाग्य मिला। हालांकि, कुछ खासियत सिर्फ पंडित जसराज में थीं।
सदाशयता, दुलार और समभाव उनके स्वभाव के खास गुण थे। किसी भी मौके पर मैंने उन्हें नाराज होते नहीं देखा। न तो उनको बेअदब श्रोताओं से कोई शिकायत रही और न ही किसी बीमारी से वह खीझते हुए देखे गए। एक बार उन्हें वायरल बुखार हुआ, तो जब मैंने उनसे अपना ख्याल रखने को कहा, तो मजाकिया अंदाज में उन्होंने जवाब मिला, ‘प्रतिष्ठित संगीत प्रेमियों की उपस्थिति और उनका उत्साह मेरी पीड़ा खत्म कर देती है’। 
हिसार में जन्मे पंडित जसराज ने विभिन्न शैलियों के गायन को अपनाते हुए एक लंबी यात्रा तय की। मैंने उनके बड़े भाई पंडित मणिराम द्वारा सिखाए जा रहे कुछ बोलों को भी उनसे सुना है, और वाकई सर्वश्रेष्ठ गुरु-शिष्य परंपरा को एक साथ सुनना मेरे लिए एक अनमोल अनुभव है। मेवाती घराने से संबंध रखने की वजह से उन्होंने विभिन्न संगीत शैलियों का मिश्रण बनाने की कोशिश की। इस अर्थ में उनके पास एक दूरदर्शी नजरिया था। उनका मानना था कि अपनी निर्मलता और मूल को खोए बिना शास्त्रीय परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। यही कारण है कि मेवाती घराने से सीखने के दौरान उन्होंने अपनी संगीत-शैली, खासतौर से कीर्तन को काफी निखारा। देश-दुनिया में चर्चित ‘जसरंगी’ के वह प्रणेता हैं, जिसमें महिला गायिका के साथ मिलकर वह साथ-साथ गायन किया करते थे। कई अवसरों पर वह ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:  गाया करते, जो श्रोताओं को अध्यात्म के चरम भाव पर में पहुंचा देता था। उनकी एक बड़ी खूबी यह थी कि शास्त्रीय परंपरा को आत्मसात करते हुए वह लगातार उसे सुधारते रहे।
मुझे याद है। 8 मई, 1998 को एक उमस भरी दोपहर में उन्होंने राग धुलिया मल्हार गाने का फैसला किया था। इस राग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि यह बारिश का अग्रदूत है और इसमें बारिश की बूंदें अक्सर धूल कणों से मिलती हैं, ताकि तेज बरसात से पहले धूल का तूफान पैदा हो सके। जब उन्होंने अपना गायन शुरू किया, तब बादल का नामो-निशान नहीं था। मगर गायन के साथ ही दूर बादल दिखने लगे और बूंदाबांदी भी शुरू हो गई, जिससे वातावरण काफी ठंडा हो गया। बादलों की जादुई उपस्थिति और सुदूर हो रही बारिश से वहां मौजूद सभी लोगों को तानसेन की याद हो आई। कहते हैं कि जब तानसेन राग मल्हार गाया करते थे, तो बारिश होने लगती थी और दीपक राग से दीपक जल उठते थे। निश्चय ही, वैसा कि हम सभी ने उस शाम अनुभव किया। पंडित जसराज 21वीं सदी के तानसेन थे।
एक अर्थ में यह विडंबना ही है कि एक व्यक्ति, जिसका जन्म हिसार में हुआ और जो भारत की संगीत परंपराओं को संपूर्णता में जीता रहा, उसने अपनी अंतिम सांस न्यू जर्सी में ली। दुख की इस घड़ी में सांत्वना की बात बस यही है कि वह एक ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिससे वह बेपनाह प्यार करते थे, यानी छात्रों को शास्त्रीय संगीत की महान भारतीय परंपरा को सिखाने का काम, जिसके वह सर्वश्रेष्ठ वाहक थे। भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपरा को वैश्विक बनाने के अपने आह्वान के बाद पंडितजी ने अटलांटा, टम्पा, वैंकूवर, टोरंटो, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, पिट्सबर्ग, मुंबई और केरल में स्कूलों की स्थापना की। 
उनकी बेटी दुर्गा जसराज आखिरी पल तक पंडित जी की देखभाल करती रहीं। वह उनकी प्यारी बेटी हैं और उनसे प्रशिक्षित भी हैं। पंडित जसराज ने उन्हें तिरंगा कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए खासा प्रोत्साहित किया था, इससे जाने-माने कवि व गीतकार जावेद अख्तर भी जुड़े थे। पंडित जी का यूं जाना मुझे इसलिए और ज्यादा गमगीन कर रहा है, क्योंकि न्यू जर्सी के इस प्रवास में मैं उनसे अक्सर बातें किया करता था और बातचीत में वह अक्सर उत्सुक होकर कहते कि भारत लौटने पर वह संगीत प्रेमियों के लिए अपने गायन का एक कार्यक्रम करेंगे। मेरा यह सपना अब अधूरा ही रहेगा। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर कहा है, ‘पंडित जसराज जी के निधन से भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र में एक गहरा शून्य पैदा हुआ है। न केवल उनकी प्रस्तुतियां उत्कृष्ट थीं, बल्कि उन्होंने कई अन्य गायकों के एक असाधारण गुरु के रूप में अपनी पहचान भी बनाई’। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी, जिनके साथ भी मैंने काम किया है, उन्हें खूब पसंद किया करते थे। वह उन्हें ‘रसराज’ कहकर संबोधित करते थे, जिसका अर्थ होता है रसों का राजा। अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 2019 में मंगल और बृहस्पति ग्रहों के बीच परिक्रमा करने वाले एक लघु ग्रह का नाम ‘जसराज’ रखा था। अब वह उसी ग्रह-नक्षत्र का हिस्सा बन गए हैं।
भारतीय शास्त्रीय संगीत जिस आध्यात्मिकता की महान विरासत का प्रतिनिधित्व करता है, वह हमेशा आगे बढ़नी चाहिए। पंडित जसराज हम सभी को यह जिम्मेदारी सौंप गए हैं कि सुरीली परंपराएं आम भारतीयों के जीवन में प्रासंगिक बनी रहें। भारतीय शास्त्रीय संगीत में आम लोगों की भागीदारी के लिहाज से उनका अतुलनीय योगदान है। उनका तिरंगा और ऊंची उड़ान भरता रहे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Source link


Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by DEFINITE BPSC.

हमारा सोशल मीडिया

29,751FansLike
25,786SubscribersSubscribe

Must Read

शक्ति और मर्यादा संजोने का समय (हिन्दुस्तान)

अब नवरात्र के दिनों में पुराना बंगाल खूब याद आता है। 1950 के दशक के शुरुआती वर्षों में बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई...

हमारी आलोचना (हिन्दुस्तान)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की जो आलोचना की है, वह न सिर्फ दुखद, बल्कि शुद्ध रूप से राजनीति...

BPSC 65th मुख्य परीक्षा का नया शेड्यूल जारी, जानिए एग्जाम और एडमिट कार्ड की डिटेल

Bihar BPSC 65th CCE Mains 2020 Exam Date and Admit Card: बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission, BPSC) ने 65 वीं संयुक्त प्रतियोगी...

Top 5 Sarkari Naukari-23 October 2020: PPSC, BPSC, ABVU, OMC, NIRT एवं अन्य संगठनों में निकली 1100 से अधिक सरकारी नौकरियां

सरकारी नौकरी प्राप्त करने हेतु युवाओं के लिए आज है पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC), बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय...

Related News

शक्ति और मर्यादा संजोने का समय (हिन्दुस्तान)

अब नवरात्र के दिनों में पुराना बंगाल खूब याद आता है। 1950 के दशक के शुरुआती वर्षों में बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई...

हमारी आलोचना (हिन्दुस्तान)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की जो आलोचना की है, वह न सिर्फ दुखद, बल्कि शुद्ध रूप से राजनीति...

BPSC 65th मुख्य परीक्षा का नया शेड्यूल जारी, जानिए एग्जाम और एडमिट कार्ड की डिटेल

Bihar BPSC 65th CCE Mains 2020 Exam Date and Admit Card: बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission, BPSC) ने 65 वीं संयुक्त प्रतियोगी...

Top 5 Sarkari Naukari-23 October 2020: PPSC, BPSC, ABVU, OMC, NIRT एवं अन्य संगठनों में निकली 1100 से अधिक सरकारी नौकरियां

सरकारी नौकरी प्राप्त करने हेतु युवाओं के लिए आज है पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC), बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय...

BPSC 65th Mains 2020: बिहार लोक सेवा आयोग ने 65वीं मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया, 25 नवंबर से शुरू होगा एग्जाम

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। BPSC 65th Mains 2020: बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने 65वीं संयुक्त मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा 2020 की तिथियों...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here