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जरूरी अभियान (हिन्दुस्तान)

कोरोना के समय में देश के जिस राज्य में सबसे ज्यादा कामगार लौटे हैं, उस राज्य में रोजगार की विशेष पहल न केवल स्वागतयोग्य, बल्कि अनुकरणीय भी है। एक अनुमान के अनुसार, देश भर से करीब 38 लाख प्रवासी श्रमिक उत्तर प्रदेश लौटे हैं। अप्रैल में उनके लौटने का सिलसिला जब तेज हुआ था, तभी से यह चिंता जताई जा रही थी कि ये घर लौटकर क्या करेंगे, कैसे गुजारा करेंगे? मई का महीना आते ही लोगों ही नहीं, सरकारों को भी लगने लगा कि कोरोना जल्दी खत्म नहीं होगा। इसके बाद ही स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार देने की मांग व चिंता जोर पकड़ने लगी। अब उत्तर प्रदेश ने इस जरूरी पहल को अपने ढंग से अंजाम दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। विशेष रूप से मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्यादा मजदूर लौटे हैं, तो आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार कार्यक्रम का फोकस इन्हीं जिलों पर होना आश्वस्त करता है कि यह पहल कारगर हो सकती है। अब गेंद जिम्मेदार अधिकारियों के पाले में है, उन्हें इस अभियान को जमीन पर साकार कर दिखाना होगा। 
लगभग 23 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले उत्तर प्रदेश में जितने प्रवासी कामगार लौटे हैं, इसके अलावा लगभग इतने ही अन्य स्थानीय कामगारों को रोजगार की जरूरत होगी। ऐसे में, अगर 1.25 करोड़ लोगों को इस अभियान के तहत काम नसीब होता है, तो प्रदेश के लिए यह बहुत बड़ी सफलता होगी। इस अभियान की पृष्ठभूमि में एक और अच्छी पहल हुई है, करीब 30 लाख प्रवासी मजदूरों की ‘स्किल मैपिंग’ की गई है। कौशल या हुनर के आधार पर तमाम मजदूरों का डाटा तैयार करना सुगठित अर्थव्यवस्था के अनुकूल कदम है। उपलब्ध डाटा के आधार पर न केवल कार्य वितरण, बल्कि योजनाओं और नीतियों का निर्माण भी कारगर साबित हो सकता है। ऐसे ही आंकड़े अन्य राज्यों के पास भी होने चाहिए। संभव है, लोगों के लिए जिलावार या ग्रामीण क्षेत्रवार अलग-अलग तरह के रोजगार की व्यवस्था करनी पड़े, मौजूदा समय में लोगों की आजीविका को बल प्रदान करने के लिए ऐसा करना ही होगा। 
गौरतलब है कि पिछले शनिवार को प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की थी, जिसके तहत, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा के जरूरतमंद कामगारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। दूसरे राज्य मनरेगा व दूसरी योजनाओं के तहत भी लोगों को रोजगार मुहैया करा सकते हैं। पुरानी योजनाओं के तहत भी लोगों को लाभ पहुंचाने के व्यापक प्रबंध संभव हैं। राज्य सरकारों के पास असीम ताकत है, वे रोजगार बढ़ाने के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं। हां, एक बात ध्यान में रहनी चाहिए कि अब समय आ गया है, जब किसी योजना के नाम के साथ गरीब शब्द न जोड़ा जाए। यह ऐसा समय है, जब बहुत योग्य या कुशल लोग भी बेरोजगार हुए हैं, उनके प्रति संवेदनशील रहना जरूरी है। अत: उत्तर प्रदेश सरकार ने अभियान का एक अच्छा नाम रखकर उसके मान और दायरे को बढ़ा दिया है। जिन छह राज्यों में इस अभियान के तहत काम शुरू हुआ है, वहां नाकामी की कोई गुंजाइश नहीं छूटनी चाहिए। इन सभी राज्यों में अगर यह अभियान फलदायी होता है, तो इससे पूरे देश और उसकी अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। इसके साथ ही इन राज्यों के मजदूरों का देश में मान-भुगतान भी बढ़ेगा।
 

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